अवैध आप्रवासियों की घर-वापसी!

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही अवैध आप्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालने के अपने संकल्प को साकार रूप देना शुरू कर दिया। स्वाभाविक है कि यह बिजली बहुत से भारतीयों पर भी गिरी है। इस बीच भारत सरकार ने भी अपने ऐसे सभी नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस लाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर काम करने का संकेत दिया है। अमेरिका में लगभग 18,000 अवैध भारतीय प्रवासियों की पहचान की गई है, जिन्हें सामूहिक निर्वासन के आदेश पर वापस घर भेजा जाना है। इनमें सबसे बड़ी तादाद पंजाब और गुजरात से अवैध रूप से अमेरिका में घुसे युवाओं की बताई जा रही है।

जैसा कि भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है, प्रवास और आवाजाही पर भारत-अमेरिका सहयोग के हिस्से के रूप में, दोनों पक्ष अवैध प्रवास को रोकने की प्रािढया में लगे हुए हैं।ऐसा भारत से अमेरिका में कानूनी प्रवास के लिए और अधिक रास्ते बनाने के लिए किया जा रहा है। भारत सरकार ने इस मामले में सहयोग की पेशकश की है। विदेश-मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई भारतीय नागरिक अवैध रूप से अमेरिका में हैं, तो भारत उनकी वैध वापसी के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा अपने नागरिकों के लिए किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए काम करेगा, और अवैध प्रवासन के ख़िल़ाफ हमारा रुख स्पष्ट है।

ऐसा प्रतीत होता है कि भारत व्यापार युद्ध से बचने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से अवैध आप्रवासियों को वापस लाने पर सहमत है। यह दूरगामी प्रभाव वाला एक जटिल मुद्दा है और कोई राय बनाने से पहले सभी पक्षों पर विचार करना ज़रूरी है। अवैध आप्रवासियों को वापस लेने के लिए भारत के तैयार होने की सबसे अहम वजह, अमेरिका के साथ बेवजह टकराव से बचने की नीति हो सकती है। अमेरिका और भारत, दोनों ही समझते हैं कि व्यापार युद्ध दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए हानिकारक होगा। अवैध आप्रवासियों को वापस लेकर, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका को दिखा सकता है कि वह आप्रवासन मुद्दों के समाधान के प्रति गंभीर है।

अमेरिका के साथ संबंध सुधारने की इच्छा, भारत की इस नीति की दूसरी वजह हो सकती है। आज की तारीख में संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है। आव्रजन मुद्दों पर सहयोग करके भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने रिश्ते सुधार सकता है। तीसरी वजह यह संभव है कि अवैध आप्रवासियों को वापस लेकर भारत अपनी अर्थव्यवस्था और सामाजिक सेवाओं पर दबाव कम कर सकता है क्योंकि अवैध आप्रवासन किसी भी देश के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

यहाँ यह जोड़ना भी ज़रूरी है कि इतने सारे अवैध आप्रवासियों को वापस लेना भारत के लिए कई परेशानियों का सबब भी होगा ही। एक तो यही कि, इन अवैध आप्रवासियों को स्वदेश वापस लाना क़ाफी महँगा सौदा है। भारत को परिवहन और अन्य लागतों का भुगतान करना होगा न! दूसरे, अवैध आप्रवासियों को वापस लाने से भारत पर नकारात्मक सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, इससे बेरोजगारी और अपराध में वृद्धि हो सकती है। यदि स्वदेश वापसी प्रािढया को सावधानी से नहीं सँभाला गया, तो इससे भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव भी पैदा हो सकता है। देखना होगा कि भारत इस अचानक आ पड़ी ट्रंप-दत्त आ़फत को कैसे सँभालता है! वैसे अमेरिका को स्वर्ग समझकर अपना देश छोड़ भागने वालों के लिए इफ़्तिख़ार आऱिफ का यह शेर कितना मौजूँ है कि-

घर से निकले हुए बेटों का म़ुकद्दर मालूम;

माँ के क़दमों में भी जन्नत नहीं मिलने वाली!

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