आतंक के खिलाफ भारत का जल युद्ध ,निर्णायक मोड़ या रणनीतिक संकेत?
भारत सरकार का यह फैसला उस नाराजगी की परिणति है जो बार-बार आतंकी हमलों, घुसपैठ और सीमापार छद्म युद्ध को लेकर वर्षों से उबल रही थी। पाकिस्तान, विशेषकर उसकी सेना और आईएसआई पर लंबे समय से आतंकवादी संगठनों को शह देने का आरोप लगता रहा है। भारत का मानना है कि सिंधु जल संधि जैसे उदार कदमों का जवाब बार-बार भारत विरोधी गतिविधियों के रूप में मिला है। ऐसे में वियना संधि (1969) की धारा 62 में फंडामेंटल चेंज ऑफ सर्कमस्टांसेज के आधार पर संधि को समाप्त कर दिया है। जब पाकिस्तान अपनी करतूतों से बाज़ नहीं आ रहा तो हमें ऐसे कठोर कदम तो उठाने ही होंगे।
पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त और दूरगामी असर वाले कदम उठाए हैं। इनमें सबसे गंभीर निर्णय सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का है। यह वही संधि है जिसे भारत ने तीन युद्धों और अनेक आतंकी हमलों के बावजूद अब तक निभाया था। पर अब और सहन नहीं किया जा सकता तो इस संधि को ध्वस्त करके सिंधु नदी का जल अब पाकिस्तान जाने से रोक दिया जाएगा।
क्या है सिंधु जल समझौता?
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में कराची में हुए एक ऐतिहासिक समझौते के तहत सिंधु जल संधि अस्तित्व में आई थी। वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में हुई यह संधि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुई थी। संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों को पूर्वी (रावी, ब्यास, सतलुज) और पश्चिमी (सिंधु, झेलम, चेनाब) नदियों में विभाजित किया गया।
इसमें भारत को पूर्वी नदियों के पूर्ण उपयोग का अधिकार दिया गया, जबकि पश्चिमी नदियों पर पाकिस्तान का प्राथमिक अधिकार तय हुआ -भारत को सीमित सिंचाई, घरेलू उपयोग और रन-ऑफ-रिवर हाइड्रो पावर के लिए उपयोग की छूट दी गई। पर अब पाकिस्तान की इस तरह की हरकतों के बाद उस पर या उसके नागरिकों के बारे में सोचने की भारत को कोई जरूरत नहीं है क्योंकि पहलगाम में आतंकवादियों ने भी निर्दोष पर्यटकों पर गोलियां चलाई वह भी धर्म पूछकर जिसे कतई माफ नहीं किया जा सकता।
भारत ने इसलिए अपनाया यह रुख
भारत सरकार का यह फैसला उस नाराजगी की परिणति है जो बार-बार आतंकी हमलों, घुसपैठ और सीमापार छद्म युद्ध को लेकर वर्षों से उबल रही थी। पाकिस्तान, विशेषकर उसकी सेना और आईएसआई पर लंबे समय से आतंकवादी संगठनों को शह देने का आरोप लगता रहा है। भारत का मानना है कि सिंधु जल संधि जैसे उदार कदमों का जवाब बार-बार भारत विरोधी गतिविधियों के रूप में मिला है।
ऐसे में वियना संधि (1969) की धारा 62 में फंडामेंटल चेंज ऑफ सर्कमस्टांसेज के आधार पर संधि को समाप्त कर दिया है। जब पाकिस्तान अपनी करतूतों से बाज़ नहीं आ रहा तो हमें ऐसे कठोर कदम तो उठाने ही होंगे।
पाकिस्तान पर यह पड़ेगा असर
यहां हमारे लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी हो जाता है कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा के समान है। पाकिस्तान की लगभग 90 प्रतिशत खेती इसी प्रणाली से जुड़ी है। पंजाब और सिंध प्रांतों में करोड़ों लोग पीने के पानी, सिंचाई और उद्योगों के लिए इन नदियों पर निर्भर हैं। अगर इसका पानी रोक दिया जाता है तो इसका सीधा असर इस क्षेत्र पर पड़ेगा और पाकिस्तान की जनता त्राहि-त्राहि करेगी।
मंगल और तारबेला जैसे प्रमुख हाइड्रोपावर डैम इन्हीं नदियों से जल लेकर पाकिस्तान की कुल बिजली का 30-50 प्रतिशत तक उत्पादन करते हैं। भारत द्वारा पश्चिमी नदियों के जल पर नियंत्रण या मोड़ने की कार्रवाई से यह प्रणाली बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। ऐसे में इसका सीधा असर कृषि उत्पादकता, औद्योगिक उत्पादन, रोज़गार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जो पहले से ही गंभीर संकट में है। जाहिर सी बात है कि परेशान जनता सरकार पर दबाव बनाएगी और जो देश पहले से परेशान है, बदहाल है उसकी परेशानी इससे कितनी बढ़ जाएगी यह तो सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है।
यह भी पढ़ें… क्या भारत का नया रुख आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक होगा ?
भारत की तैयारियां और सीमाएं
भारत पहले ही पूर्वी नदियों पर कई बांध और परियोजनाएं चला रहा है – भाखड़ा नागल (सतलुज), पोंग डैम (ब्यास), रंजीत सागर (रावी)। हाल के वर्षों में भारत ने पश्चिमी नदियों पर भी नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में काम किया हैö बगलीहार डैम, किशनगंगा प्रोजेक्ट, रतले, पाकल डुल जैसी परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें से कुछ चालू हैं और कुछ निर्माणाधीन।
हालांकि, जल रोकने या मोड़ने की प्रक्रिया रातों-रात नहीं हो सकती। इसके लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग और पर्यावरणीय तैयारी की आवश्यकता है। साथ ही, अत्यधिक जल रुकाव से जम्मू-कश्मीर और पंजाब में बाढ़ का खतरा बन सकता है। पर यह सब योजना बनाकर सिल-सिलेवार तरीके से किया जाएगा जिससे हमें किसी तरह की कोई परेशानी न हो। देखना यह है कि अब इसमें कितना समय लगता है।
पाकिस्तान के पास अब यह विकल्प
पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों – जैसे यूएन, वर्ल्ड बैंक या हेग इंटरनेशनल कोर्टö पर ले जाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन भारत की कानूनी तैयारी और हालात की गंभीरता को देखते हुए इन मंचों से पाकिस्तान को कोई विशेष राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले ही पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सशंकित रहा है, खासकर जब आतंकी गुटों की मौजूदगी उसके भू-भाग से जुड़ी हो।
चीन एकमात्र देश है जो पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा हो सकता है लेकिन जल विवाद में चीन की भूमिका भी सीमित रहेगी। ऐसे में पाकिस्तान का परेशान होना और कुछ न कर सकना तय है। वह सिर्फ सारे विश्व से दया की भीख मांगता रह जाएगा पर कहीं से उसे मदद मिलने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि सारे देश उसकी करतूतों को न सिर्फ देख रहे हैं बल्कि अधिकतर देश तो भारत के साथ हैं। तो अब पाकिस्तान के भुगतने का समय आ गया है। उसने अब तक जो बोया है, अब वह वही काटेगा।
संकेत मात्र नहीं, स्पष्ट संदेश
बहरहाल, सिंधु जल समझौते को स्थगित करना भारत की रणनीतिक धैर्यसीमा का अंत दर्शाता है। यह केवल जल प्रबंधन का मामला नहीं, बल्कि राजनयिक दबाव, कूटनीतिक संदेश और आतंक समर्थकों के लिए चेतावनी है। अब यह पाकिस्तान पर है कि वह अपने रवैये में बदलाव लाता है या आत्मघाती जिद पर अड़ा रहता है।
वैसे इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान सुधरने वाला नहीं है और भारत के प्रति तो कभी उसका रवैया ठीक रहा ही नहीं। भले ही उसके देश में जनता परेशान हो, महंगाई हो, गरीबी हो पर उसका सारा ध्यान आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने और फिर उन्हें भारत भेजने में लगा रहता है। यह ऐसा देश है जहां की सरकार चाहे बदल जाए पर मानसिकता नहीं बदलती। देश चाहे पिछड़ता जाए पर वहां की सरकार आतंकवादियों को पनाह देने, उन्हें बचाने, उनकी मदद करने में लगी रहती है। तभी तो यह ऐसा देश बन गया है जिसे हर कोई उसके आतंकवाद व पिछड़ी मानसिकता के लिए जानते हैं। साथ ही वहां के आंतरिक हालात भी ठीक नहीं है।
जहाँ एक ओर बलूच अलग पहचान व देश बनाने को तत्पर है वहीं सिंध और खैबरपख्तूनखा के लोग भी खासे परेशान है। पर पाकिस्तान की सरकार को न अपने देश की चिंता है न जनता की तभी तो वह आतंकवादियों का अड्डा बन गया है और अब समय आ गया है पाकिस्तान को सही सबक सिखाने का। दूसरी ओर पाकिस्तान भी जानता है कि भारत उसे अब छोड़ने वाला नहीं है और इसीलिए वह डर से थक्र-थर कांपता नजर आ रहा है।
राजेश जैन
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।





