सिंधु जल संधि सबसे बड़ी भूलों में से एक थी : नड्डा
नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने सोमवार को कहा कि सिंधु जल संधि सबसे बड़ी भूलों में से एक थी और इसे निलंबित करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक और गंभीर ऐतिहासिक भूल को सुधारा है। नड्डा ने 1960 की संधि को नेहरू की बहुत बड़ी भूल बताते हुए आरोप लगाया कि इसने भारत की जल सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को स्थायी रूप से खतरे में डाल दिया। उन्होंने कहा, सिंधु जल संधि- 1960 पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सबसे बड़ी भूलों में से एक थी, जिसने राष्ट्रीय हित को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की वेदी पर रख दिया।
राष्ट्र को यह पता होना चाहिए कि जब पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे तो उन्होंने सिंधु बेसिन के 80 प्रतिशत जल को पाकिस्तान को एकतरफा तौर पर सैंप दिया था, जिससे भारत के पास केवल 20 प्रतिशत हिस्सा रह गया था। नड्डा ने कहा, यह एक ऐसा निर्णय था जिसने भारत की जल सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को स्थायी रूप से खतरे में डाल दिया।
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सबसे भयावह पहलू यह था कि उन्होंने भारतीय संसद से परामर्श किए बिना ऐसा किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, इस संधि पर सितंबर 1960 में हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन इसे संसद में दो महीने बाद नवंबर में और वह भी केवल दो घंटे की औपचारिक चर्चा के लिए रखा गया। भाजपा नेता ने कहा कि यह संधि इतनी बड़ी भूल थी कि पंडित नेहरू की पार्टी के सांसदों ने भी इसका कड़ा विरोध किया था।उन्होंने कहा, उन्होंने (नेहरू ने) बहुत कुछ दिया लेकिन बदले में कुछ भी नहीं पाया।(भाषा)
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