नवाचार से बदल सकती है निर्माण उद्योग की तस्वीर

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हैदराबाद, भवन निर्माण गतिविधियाँ हैदराबाद सहित देश भर में तेज़ी से बढ़ी हैं। भविष्य में यही गति लगातार रहने की संभावना है, लेकिन इन गतिविधियों में परंपरा के साथ नवाचार को जोड़ा नहीं जाता, तो प्रकृति एवं पर्यावरण से संबंधित समस्याओं में तेज़ी से वृद्धि हो सकती है। उक्त विचार गोलमेज़ सम्मेलन में देश के विभिन्न शहरों से आये भवन निर्माण सामग्री उत्पादन से जुड़े उद्यमियों ने व्यक्त किये।

हैदराबाद के होटल हयात प्लेस में प्रमुख उद्यमियों की मीडिया के साथ बैठक इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया द्वारा मुंबई में प्रस्तावित वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया-2025 के 11वें संस्करण की तैयारियों के अंतर्गत आयोजित की गयी। डब्ल्यूओसी प्रदर्शनी सह सम्मेलन 8 से 10 अत्तूबर तक मुंबई के बॉम्बे एक्जीबिशन सेंटर में आयोजित होने वाला है, जिसमें निर्माण और बुनियादी ढाँचा मूल्य श्रृंखला के 250 से अधिक प्रदर्शक, 350 से अधिक ब्रांड और 15,000 से अधिक उद्योग पेशेवर भाग लेंगे। इसमें हैदराबाद से बड़ी संख्या में उद्यमी और पेशेवर हिस्सा लेंगे।

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भारत निर्माण में स्थायी समाधानों और नवाचार पर जोर

चर्चा बैठक में जिंदल पैंथर सीमेंट के सीईओ रोहित वोरा, वास्तुकार डॉ. एस.पी. अंचुरी, सीईएआई के उपाध्यक्ष सोमनाथ घोष, इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के वरिष्ठ समूह निदेशक रजनीश खट्टर, वाव मटेरियल की संस्थापक निवेधा, बिरला नू के मुख्य नवाचार अधिकारी प्रणव देसाई एवं अन्य उद्योग विशेषज्ञों ने बाज़ार के अवसरों, टिकाऊ प्रथाओं और नवीन तकनीकों पर अनुभव और भावी संभावननाओं पर विचार साझा किये। उन्होंने बताया कि भारत का निर्माण उद्योग सरकार द्वारा संचालित बुनियादी ढाँचा योजनाओं, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई)-अनुकूल सुधारों और स्थिरता के लिए एक मज़बूत प्रयास के समर्थन से तेज़ी से विस्तार कर रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि उद्योग जगत के नेताओं, नवप्रवर्तकों और विशेषज्ञों को जियोपॉलिमर कंक्रीट जैसे स्थायी समाधानों की खोज करने के लिए मंच साझा करना होगा, ताकी प्रदूषण को कम करने तथा भारत के कंक्रीट और निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में दक्षता, स्थिरता और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

रजनीश खट्टर ने कहा कि भारत निर्माण क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने और लचीले, समावेशी और टिकाऊ बुनियादी ढाँचे के निर्माण में वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। भारत न केवल सीमेंट बल्कि कंक्रीट उत्पादन में भी विश्व में दूसरे नंबर पर है। प्लास्टिक, मलबे और कचरे की रीसाइकिल कर कई नये उत्पाद बनाये जा रहे हैं। मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शनी सह सम्मेलन में भारत के अलावा दस और देशों से प्रतिनिधि नवाचार पर चर्चा करेंगे। जर्मनी का विशेष पवेलियन स्थापित किया जाएगा।

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