आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखने का निर्देश
नयी दिल्ली, दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को अत्यधिक गंभीर बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को शहर की सरकार और नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को उठाना शुरू करें और उन्हें आश्रय स्थलों में रखें।
कुत्तों के काटने की घटनाओं से निपटने के लिए कई निर्देश पारित करते हुए न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन आवारा कुत्तों को उठाने में अधिकारियों के काम में बाधा डालेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान हाई कोर्ट ने भी दिया आदेश
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि फिलहाल लगभग 5,000 आवारा कुत्तों के लिए आश्नय गृह बनाए जाने चाहिए और कुत्तों के बंध्याकरण और टीकाकरण के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी तैनात किए जाने चाहिए। पीठ ने कहा कि आवारा राजस्थान हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर सख्त फैसला लेते हुए नगर निकायों को निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे शहर की सड़कों से आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को हटाएँ और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें न्यूनतम शारीरिक नुकसान पहुंचे।
अदालत ने आगे कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति नगर निकायों को सड़कों/कॉलोनियों/सार्वजनिक रास्तों से आवारा पशुओं को हटाने से रोकता है, तो नगर निगम के अधिकारी/कर्मचारी ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिसमें लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के लिए एफआईआर दर्ज करना भी शामिल है।
कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखा जाए और उन्हें सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर न छोड़ा जाए। पीठ ने कहा, हम व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए ये निर्देश जारी कर रहे हैं। साथ ही, उसने यह भी कहा कि शिशुओं और छोटे बच्चों को किसी भी कीमत पर आवारा कुत्तों से बचाना होगा, जिनके काटने से रेबीज होता है। उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर एक हेल्पलाइन बनाने का भी निर्देश दियाI
जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान याचिका पर यह आदेश पारित करते हुए कहा कि वह नगर निगमों से अपेक्षा करती है कि वे टेलीफोन/मोबाइल नंबर/ई-मेल आईडी अधिसूचित करें, जहां उस क्षेत्र के नागरिक/निवासी आवारा पशुओं के संबंध में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। अदालत ने कहा कि हम आम जनता से अपेक्षा करते हैं कि यदि वे अपनी भावनाओं या धार्मिक विश्वासों या जानवरों के प्रति प्रेम के कारण उन्हें खाना खिलाना या उनकी देखभाल करना चाहते हैं, तो उन्हें नगर पालिकाओं या निजी व्यक्ति/संगठन द्वारा बनाए गए कुत्ता आश्रयों और मवेशी तालाबों/गौशालाओं में ऐसी गतिविधियां करनी चाहिए। ताकि कुत्तों के काटने के सभी मामलों की तुरंत सूचना दी जा सके। शीर्ष अदालत ने 28 जुलाई को दिल्ली में कुत्तों के काटने से रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था।(भाषा)
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