क्या पीओके का विद्रोह भारत के लिए मौका है?
पाकिस्तान जिस रास्ते पर है, उसकी बर्बादी ज्यादा दूर नहीं है, हम सिर्फ यह कोशिश कर सकते हैं कि वो बर्बादी और जल्दी आए। मरता हुआ पाकिस्तान विदेशी शक्तियों के हाथ का खिलौना बन चुका है, इसलिए उससे दूर रहना जरूरी है। पीओके वापस लेना हमारी नीति है लेकिन जब वो वापस आएगा तो नई समस्याएं भी साथ लेकर आएगा। पीओके खुद भारत के पास आया तो समस्याएं कम होंगी। अंत में इतना कहा जा सकता है कि हमें पहले पीओके के पाकिस्तान से अलग होने का इंतजार करना होगा। जब वो अलग हो जाएगा तो उसे अपने पास आने का मौका देना होगा।
जब जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था, तब पाकिस्तान ने हमला करके इसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना उस हिस्से को वापस लेना चाहती थी लेकिन तत्कालीन सरकार को संयुक्त राष्ट्र पर ज्यादा भरोसा था। संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान के साथ-साथ भारत को भी आक्रामणकारी घोषित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र चाहता था कि दोनों देश इस राज्य से निकल जाए और जनता को निर्णय करने दें कि वो किसके साथ रहना चाहती है।
इसके लिए पहले पाकिस्तान को अपने कब्जे वाले इलाके को खाली करना था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, इसलिए संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों का पालन नहीं हो सका। इसके बावजूद पाकिस्तान पूरे जम्मू-कश्मीर राज्य को अपना हिस्सा मानता है और भारत से इसे वापस लेने के लिए पिछले 78 सालों से लड़ रहा है। जब तीन युद्धों से भी वो कश्मीर नहीं ले सका तो उसने आतंकवाद के सहारे इसे पाने की कोशिश शुरू कर दी।
पाकिस्तान पर आतंकवाद का भारी बोझ और नुकसान
पिछले 45 सालों से वो भारत को आतंकवाद की आग में जलाता आ रहा है। उसके आतंकवाद के कारण न केवल भारत के हज़ारों नागरिकों और सैनिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को लाखों करोड़ रुपए की चपत लगी है। आतंकवाद लंबे समय तक भारत के विकास की बड़ी रुकावट बना हुआ था। भारत को आतंकवाद की आग में जलाने के लिए पाकिस्तान को कई देशों की मदद मिली है।
कहा जाता है कि जो दूसरे के लिए गड्ढा खोदता है, वो एक दिन खुद भी उसमें गिर जाता है। पाकिस्तान के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। भारत ने तो आतंकवाद से निपटना सीख लिया है लेकिन पाकिस्तान अब आतंकवाद की आग में जल रहा है। भारत ने आतंकवाद को जम्मू-कश्मीर तक सीमित कर दिया है लेकिन इस समय पूरा पाकिस्तान आतंकवाद की आग में जल रहा है। भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को इस भयानक दौर से बाहर निकाल लिया है लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुकी है।
पीओके में विकासहीनता और जनता का नाराजगी
पाकिस्तान एक भिखारी देश बन गया है। उसके रहनुमा जहां भी जाते हैं, साथ में भीख का कटोरा लेकर जाते हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने खुद ही बयान दिया था कि हम जिस देश में भी जाते हैं, उन्हें लगता है कि कुछ मांगने आए होंगे। पाकिस्तान ने भारत को बर्बाद करने के चक्कर में खुद को बर्बाद कर लिया है। वो भारत से कश्मीर छीनना चाहता था लेकिन आज उसके लिए अपना कश्मीर बचाना भी मुश्किल हो गया है।
पाक अधिकृत कश्मीर, जिसे पीओके कहा जाता है, आज भयानक विद्रोह का सामना कर रहा है। वहां जनता पाकिस्तान के हुक्मरानों से आजादी मांग रही है। अभी तक जो नारे भारतीय कश्मीर में लगते थे, वही नारे अब पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में लग रहे हैं। पाकिस्तानी सत्ता ने कश्मीर के संसाधनों का तो भरपूर इस्तेमाल किया है लेकिन उसे उसका हक नहीं दिया है।
पीओके में बिजली पैदा करके पाकिस्तान के दूसरे सूबों को सप्लाई की जाती है लेकिन पीओके दिन में सिर्फ 4-6 घंटे ही बिजली पाता है। वहां की जनता आजादी नहीं मांग रही है बल्कि पाकिस्तान से छुटकारा मांग रही है। इसकी वजह यह है कि वहां कोई विकास नहीं हुआ है। पाकिस्तान से ज्यादा महंगाई पीओके में है। पाकिस्तानी सेना ने वहां आतंकवादी अड्डे बना रखे हैं जिसके कारण पीओके के युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो रही है।
आतंकवादी संगठन पीओके के युवाओं का ब्रेनवाश करके उन्हें जिहादी बना रहे हैं। ये आतंकवादी संगठन इन युवाओं को आतंकवाद का प्रशिक्षण देकर भारत में भेज रहे हैं। भारतीय सेना पिछले कई सालों से आतंकवादियों को जिस तरह से ठिकाने लगा रही है, उसके कारण पीओके की जनता पाकिस्तानी हुक्मरानों से नाराज है। पीओके में बुनियादी ढांचा बहुत खराब स्थिति में है जबकि भारतीय कश्मीर में तेजी से बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
पीओके में जनता का विद्रोह और पाकिस्तानी जुल्म
भारतीय कश्मीर का विकास भी पीओके की जनता को परेशान कर रहा है। पिछले दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बयान दिया था कि पीओके खुद ही कहेगा कि वो भारत है। उनकी बात सच होती दिख रही है क्योंकि पीओके देख रहा है कि भारतीय कश्मीर की जनता कितनी खुशहाल है। पीओके में हो रहे उपद्रव को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना जनता पर जुल्म कर रही है।
इस विद्रोह को दबाने के लिए कई प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। पाकिस्तानी मीडिया सच्चाई को छुपा रहा है लेकिन पीओके से खबर आ रही है कि 40 से ज्यादा लोग पाकिस्तानी सेना की गोली का शिकार बन गए हैं। इसके अलावा सौ से ज्यादा लोग घायल हैं। इसके बावजूद पीओके की जनता पीछे नहीं हट रही है और पाकिस्तानी सेना का मुकाबला कर रही है।
वास्तव में पीओके की जनता को आतंकवादी संगठनों के जरिये दबाकर रखा जाता था लेकिन भारतीय सेना के डर से वो पीओके को छोड़कर चले गए हैं, इसलिए पाकिस्तानी सेना को खुद मैदान में उतरना पड़ा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने विश्व समुदाय से पीओके में मानवाधिकारों के हनन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है । इसके अलावा पाकिस्तान में बलूचिस्तान भी जल रहा है। वहां बलूच विद्रोही पाकिस्तानी सेना पर भारी पड़ रहे हैं।
पाकिस्तान में अराजकता और पीओके की स्थिति
कहा जा रहा है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण खो चुका है। बलूच विद्रोहियों को दबाने के लिए भी पाकिस्तानी सेना बलूचों का नरसंहार कर रही है। ऐसे ही खैबर-पख्तूनख्वा में पख्तूनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी वायुसेना बम बरसा रही है। सिंध की जनता भी पाकिस्तानी सत्ता से नाराज चल रही है लेकिन अभी वहां स्थिति ज्यादा बुरी नहीं है। पाकिस्तानी तालिबान अब पाकिस्तानी सेना के जवानों को अपना शिकार बना रहा है।
इस इलाके में नियमित अंतराल पर आत्मघाती आतंकवादी हमले हो रहे हैं। अफगानिस्तान का तालिबान भी पाकिस्तान से नाराज चल रहा है, इसलिए पाकिस्तान का तालिबान बेकाबू होता जा रहा है। पाकिस्तान धीरे-धीरे अराजकता की ओर बढ़ रहा है। पाकिस्तान अपने हिस्से वाले कश्मीर को आज़ाद कश्मीर कहता है, इसलिए उसे अपना राज्य भी नहीं बनाया। पाकिस्तान के चार राज्य हैं और कश्मीर को एक स्वतंत्र इलाका घोषित किया हुआ है।
ऐसा इसलिए किया गया ताकि भारतीय कश्मीर को आज़ाद होने के लिए उकसाया जाता रहे। कश्मीर पर कब्जे के बाद पाकिस्तान प्रचार करता रहा है कि वो भारत के कश्मीर को आजाद करवा कर पीओके में जोड़कर नया कश्मीर बनाएगा। पीओके के हालातों को देखकर भारत में एक बड़ा वर्ग उसे वापस लेने की बात कह रहा है। भारतीय मीडिया में यह चर्चा चल रही है कि क्या पीओके लेने का सही समय आ गया है।
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पाकिस्तान की अराजकता पर भारत की संयमित रणनीति
पीओके की जनता भी यही चाह रही है लेकिन पाकिस्तान के उत्पीड़न के डर से चुप है। अगर पीओके की जनता भारत में विलय की मांग कर देती है तो पाकिस्तान उन्हें देशद्रोही और धर्मविरोधी करार देगा। तब पीओके की जनता को दबाने के लिए वो ताकत का ज्यादा इस्तेमाल कर सकता है । ऐसा नहीं लगता है कि भारत सरकार को पीओके लेने की जल्दी है। वैसे भी भारत सरकार पीओके लेने के लिए पाकिस्तान से युद्ध नहीं करना चाहेगी।
पीओके को आजाद करवाने के लिए भारत उसकी मदद कर सकता है लेकिन उसे आजाद करवाने के लिए भारतीय सेना अंदर नहीं जाएगी। भारत सरकार जानती है कि इस मामले में दखल देना कितना घातक साबित हो सकता है। इस मामले में चीन और अमेरिका भी पाकिस्तान के साथ खड़े हो सकते हैं। पीओके बांग्लादेश नहीं है जिसमें भारत को दखल देना पड़ा क्योंकि वहां से करोड़ों शरणार्थी भारत में आ चुके थे।

वहां लाखों लोगों की हत्या कर दी गई थी और हजारों महिलाओं का गैंग रेप हो रहा था। पीओके में अगर कुछ होता भी है तो वो सिर्फ भारत की समस्या नहीं होगी। पाकिस्तान भी बांग्लादेश वाली गलती नहीं करेगा। भारत को इस मामले में नहीं कूदना है, सिर्फ दूर से तमाशा देखना है। जब पाकिस्तान अपने पापों के बोझ से दबकर मरने वाला है तो उसकी हत्या का पाप हम क्यों ले। एक आत्मघाती देश से ऐसे हालातों में दूर रहना ही ठीक है।
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