जागृत रहने के लिए ज्ञान और विवेक आवश्यक : राजमतीजी म.सा.
हैदराबाद, जीवन को जागृत बनाने के लिए ज्ञान और विवेक दोनों की ही आवश्यकता होती है। इनमें से एक भी कम है, तो जीवन चल नहीं सकता। उक्त उद्गार सिख छावनी स्थित श्री आनंद जैन भवन कोरा में श्री जैन श्रावक संघ कोरा के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए राजमतीजी राजुल म.सा. ने व्यक्त किये।
संघ के मंत्री अनिल तातेड़ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, म.सा. ने कहा कि जागने वाला ही जिनवाणी को प्राप्त करता है और जो सोता है वह खोता है। केवल आँखे खुली हैं, तो वह व्यक्ति जागा हुआ नहीं है। जागृत व्यक्ति वही है, जिसके पास ज्ञान व विवेक की आँखें हैं। यदि यह दोनों बंद हैं, तो जीवन का कोई लाभ नहीं है। स्थानांग सूत्र के अनुसार जिस व्यक्ति के पास ज्ञान विवेक नहीं है, वह पत्थर के समान है। पत्थर में कोई शक्ति नहीं है, लेकिन वह पत्थर किसी कारीगर के हाथ में चला जाए, तो साकार मूर्त रूप ले लेता है और पूजनीय हो जाता है। कला कलाकार के हाथ में होती है।
तप, त्याग और भक्ति से ही आत्मा का कल्याण
म.सा. ने कहा कि कला के कारण कलाकार बन जाता है। हाथी जैसा शरीर है और यदि ज्ञान, तप, जप का विवेक नहीं है, तो ऐसा शरीर किस काम का। रात और दिन तिर्यंच की तरह ही भटकते रहेंगे। आपको जैन कुल मिला, उत्तम शरीर मिला है, तप, त्याग, जप, साधना नहीं है, तो आत्मा जागेगी ही नहीं। त्याग के बिना मोक्ष नहीं मिलता। नींद का त्याग करेंगे, तो ज्ञान होगा, अन्न का त्याग करेंगे, तो तप-ध्यान होगा।
म.सा. ने कहा कि व्यक्ति को धन संपदा के सपने तो आते हैं, जो नींद खुलते ही टूट जाते हैं। क्या कभी तीर्थ का सपना या दीक्षा ग्रहण करने का सपना भी आया है। जीवन में इतनी भक्ति नहीं, तो कर्म करने की आवश्यकता है। मन चलायमान हो, तो तप नहीं हो सकता, तो आत्मा का कल्याण नहीं होगा। म.सा. ने कहा कि तप, जप, आराधना करते नहीं और मोक्ष में जाने का लक्ष्य रखते हैं। प्रभु ने दान, शील और तप तीन मार्ग बताए हैं। दान भी जरूरी है, तप भी जरुरी है, इसके बिना कर्म खपेगा नहीं, तप की आग लगेगी, तो शरीर का सारा मैल मिटेगा, जप की साधना होगी, तो आत्मा पवित्र होगी।
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तप, त्याग और धर्म से मोक्ष की ओर अग्रसरता
म.सा. ने कहा कि त्याग, उपवास, बेला, तेला, आयंबिल नहीं किया, सारे समय खाते रहे, तो भला कैसे मोक्ष मिलेगा। सावन, भादव में भी त्याग नहीं हो रहा है, तो कब करेंगे। जिस समय करना है, उस समय करेंगे, तो लाभ मिलेगा, क्योंकि जीवन का भरोसा नहीं, फिर मौका मिले या ना मिले। बातों में समय जा रहा है, रात दिन बातें कर रहे हैं। ऐसे मे चौमासा निकल गया, तो फिर तपस्या का इंतजार करना पड़ेगा। म.सा. ने कहा कि भगवान आदिनाथ ने धर्म से परिचित करवाया। आदिनाथ भगवान का उपकार न भूलें। धर्म, तप, जप ,त्याग जीवन की कला बताने वाले आदिनाथ हैं। सबसे पहले भगवान आदिनाथ को याद करें। परिश्रम कर कर्म को तोड़ें, तो आनंद की प्राप्ति होती है।
मंच का संचालन मंत्री अनिल तातेड़ ने किया। नवकार महामंत्र का जाप प्रतिदिन गतिमान है। आज बेंगलुरू यशवंतपुर के अध्यक्ष सुमेरमल मुणोत, मंत्री रमेश बोहरा, कार्याध्यक्ष नेमीचंद कटारिया का श्री संघ के सदस्य संपतराज कोठारी, मंगलचंद कटारिया, बिजराज श्रीश्रीमाल, गौतमचंद कटारिया, गौतम सुखानी, सजन्नराज भंडारी, संजय कटारिया, अनिल तातेड, धर्मेंद्र मंडोत आदि ने किया। सुरेंद्र आंचलिया ने भाव व्यक्त किए।
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