मोक्ष प्राप्ति के लिए आवश्यक है ज्ञान, तप और त्याग : अभिनंदनचंद्र सागरजी

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हैदराबाद, श्री राजस्थानी जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ जैन भवन में महाशतावधानी अभिनंदनचंद्र सागरजी म सा ने उत्तराध्ययन आगम ग्रंथ के चार दुर्लभ विषय पर वर्णन करते हुए बताया कि जिनवाणी श्रवण करना भी दुर्लभ है। परमात्मा महावीर स्वामी ने चार दुर्लभ बताए हैं। उसमें द्वितीय दुर्लभ का नाम है जिनवाणी। जिनवाणी श्रवण हमारी आत्मा को अमृत से भर देता है। हमें सही मार्गदर्शन करवाता है।

महामंत्री राजेंद्र मुथा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गुरुदेव ने आगे कहा कि परमात्मा की वाणी का श्रवण कर रोहिणेय चोर जैसे की आत्मा भी तिर गई। परमात्मा की वाणी श्रवण करने समोवसरण में असंख्य देवतागण पधारते थे। तीर्यगणभी जिनवाणी श्रवण करने अहोभाव से आते थे। मगधाधिपति जैसे बड़े-बड़े श्रेणिक महाराज भी हजारों मनुष्यगण के साथ पधारते थे। परमात्मा की वाणी श्रवण कर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते थे।

जिनवाणी श्रवण करने के अवसर को हमें कभी चूकना नहीं है जो मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। सम्यकतवी जीव का एक लक्षण भी प्रवचन का राज बताया है। सम्यक जीव को ही जिनवाणी श्रवण करने की रुचि अधिक होती है। जैन भवन में प्रतिदिन प्रात 6:30 बजे आध्यात्मिक वंचना तथा 9:15 बजे से जिनवाणी प्रवचन जारी है। गुरुवार को आगमों द्वाराक आनंद सागर सूरीश्वरजी म सा के जन्मदिन निमित्त गुणाअनुवाद सभा का आयोजन किया जाएगा।

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इसके पश्चात सामूहिक आयम्बिल की व्यवस्था रखी गई है। इसके लाभार्थी संघवी मातृ श्री सुकन्याबाई मोतीलाल खरगांधी परिवार हैं। श्री ऋषभ भक्तांबर तप भी लगातार जारी है। प्रतिदिन रात 9 बजे युवाओं के लिए प्रवचन भी सुंदर रूप से चल रहा है। गुरुदेव ने ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुड़ने का आग्रह किया है। अवसर पर संघ के अध्यक्ष योगेश गांधी समेत ट्रस्टी गण, पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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