चलो हम सब झूला झूलें

सावन की रितु झूमझूम कर आई
चलो हम सब झूला झूलें।
पेंग बढ़ाकर हम सब
आज बादलों को छू लें।

रिमझिम आज सावन की फुहार
मन को खूब भा रही है।
सावन रितु की कजरी
दिल धड़का रही है।

आज नाग पंचमी का त्योहार
मिलकर ख़ूब मनाते सब।
गुजिया गुलगुला मालपुए
खीर मिठाई खाते सब।

सर्प को लोग दूध पिलाते हैं
पचई का त्योहार हम मनाते हैं।
मंदिर-मंदिर जाकर सब
शिव को दूध-लावा चढ़ाते हैं।

यह भी पढ़े: झूल रहे हैं झूला (बाल कविता)

-बद्री प्रसाद वर्मा अनजान

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