लोक अदालत पुरानी व्यवस्था : जस्टिस पॉल

हैदराबाद, लोक अदालत कोई नई व्यवस्था नहीं है, यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसे हमने पहले भी लागू किया है है और इसमें विवादों का समाधान समझौते से किया जाता है।

उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने आज राज्य भर में आयोजित लोक अदालत कार्यक्रम के तहत हैदराबाद सिटी सिविल कोर्ट में लोक अदालत का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए उन्होंने उक्त बातें कही।

जस्टिस पॉल ने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि अदालतों में एकपक्ष ही जीतता है और हारने वाला पक्ष अपील करने के लिए उच्च न्यायालय जाता है, लेकिन लोक अदालत की शुरुआत इससे अलग हटकर हुई है। जहाँ पर दो पक्षों के बीच मामले में समझौता होने से यहाँ दोनों पक्ष विजेता होते हैं।

जस्टिस पॉल ने कहा कि लोक अदालतें अदालतों का बहुमूल्य समय बचाती है और दोनों पक्षों के बीच सद्भावना का माहौल बनाती है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि तेलंगाना में सामूदायिक मध्यस्थता की शुरुआत की गई, जहाँ पारिवारिक विवाद, माता-पिता और बच्चों के बीच विवाद को सामूदायिक मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है।

12 लाख मामले सुलझाए गए

राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव सी.एच. पंचाक्षरी ने बताया कि शनिवार को राज्य भर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत 12.48 लाख मामलों का निपटारा किया गया। उन्होंने बताया कि विभिन्न न्यायालयों में लम्बित 7.85 लाख मामलों तथा 4.63 लाख प्री-लिटिगेशन मामलों का लोक अदालत के जरिए निपटारा किया गया। मामलों को निपटाकर लोक अदालत में 935 करोड़ रुपये मुआवजे की घोषणा की गई।

उच्च न्यायालय में 165 मामले सुलझाए गए

उच्च न्यायालय में विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित लोक अदालत में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस लक्ष्मीनारायण अली शेट्टी और पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जी. श्रीदेवी की खण्डपीठ ने सुनवाई की और 120 मामलों का निपटारा किया। इनमें से 84 मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित मामले थे, जिनमें 9 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई। उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव एम. शांतिवर्धन ने बताया कि मामलों के संबंध में 750 लोगों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि समिति के अध्यक्ष जस्टिस अभिनंद कुमार शाविली के निर्देशानुसार आयोजित लोक अदालत सफल रही।

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