माघी कालाष्टमी व्रत शिव के रूद्र रूप को करें प्रसन्न

तिथि मुहूर्त

माघ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 जनवरी, शनिवार की सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरु हो रही है, जो 11 जनवरी, रविवार की दोपहर 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा। शनिवार को कालाष्टमी का प्रभाव और भी अधिक होता है।

माघ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माघी कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, जिसे भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप भैरव भगवान की पूजा करने का विधान होता है। मान्यता है कि कालाष्टमी का व्रत और पूजा करने से जीवन से सभी प्रकार के भय और दुःख दूर हो सकते हैं।

पूजा विधि

पूजाघर में लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान शिव, माता पार्वती व बाबा कालभैरव की मूर्ति स्थापित करें। चारों तरफ गंगाजल का छिड़काव करें। भगवान को फूलों की माला व ताजे फूल अर्पित करें। नारियल, मदिरा, गेरुआ, इमरती आदि का भोग लगाएँ और भगवान के सामने एक चौमुखी दीपक अवश्य जलाएं।

उसके बाद धूप-दीप दिखाकर कुमकुम या हल्दी से सभी का तिलक करें। शिवजी, मां पार्वती और कालभैरव की एक-एक करके आरती करें। भैरव चालीसा व शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें। इसके अलावा बटुक भैरव पंजर कवच का पाठ भी कर सकते हैं। बाबा कालभैरव के मंत्रों का 108 बार जाप करें।

ऐसा करने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है। व्रत पूर्ण होने पर काले कुत्ते को दूध पिलाएं और संध्या समय कुत्ते की भी पूजा करें। कालाष्टमी की रात में सरसों के तेल, काले तिल, दीपक आदि से कालभैरव की पूजा करें। रातभर जागरण करने से उत्तम फल प्राप्त होता है।

महत्व

यह दिन भगवान भैरव को समर्पित माना जाता है। कालाष्टमी का व्रत और पूजा करने से जातक को नकारात्मक शक्तियों, भय, कष्ट व शत्रुओं से मुक्ति मिल सकती है। इससे कुंडली में अशुभ ग्रह के प्रभावों में कमी हो सकती है। लाल किताब के अनुसार, बाबा भैरव शनि के अधिपति देव हैं। इनकी पूजा और कालाष्टमी का व्रत रखने से राहु, केतु और शनि के दोषपूर्ण प्रभावों को कम किया जा सकता है।

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