माघी पूर्णिमा है पुण्य योग का दिन

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तिथि मुहूर्त

विक्रम पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी, रविवार की सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ हो रही है, जो 2 फरवरी, सोमवार तड़के 3 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर माघ पूर्णिमा का व्रत 1 फरवरी, रविवार को रखा जाएगा।

स्नान-दान

सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक।

चंद्रोदय

शाम 5 बजकर 46 मिनट पर।

माघ पूर्णिमा सनातन धर्म में आस्था और पुण्य का विशेष पर्व है। इस दिन गंगा-स्नान, व्रत, पूजा-पाठ और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए शुभ कर्मों का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। माघ पूर्णिमा पर दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसे आत्म-शुद्धि और पुण्य-संचय का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा को अन्न, वस्त्र, धन और जरूरतमंदों की सहायता करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि माघ पूर्णिमा पर किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है, इसलिए इस शुभ तिथि पर दान अवश्य करना चाहिए और अपनी सामर्थ्य के अनुसार पुण्य-कर्मों में भाग लेना चाहिए। विक्रम पंचांग के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान होते हैं, तब माघ पूर्णिमा का विशेष पुण्य संयोग बनता है। इसी शुभ स्थिति के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

व्रत, पूजा और पुण्य-योग

नक्षत्रों की दृष्टि से माघ नक्षत्र के प्रभाव के कारण ही इसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है, जो पुण्य, स्नान और दान के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। हिंदू पंचांग में प्रत्येक पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व है, लेकिन माघी पूर्णिमा को विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पूर्णिमा पुत्र-सुख, सौभाग्य और मोक्ष प्रदान करने वाली होती है। इस दिन श्रद्धा पूर्वक व्रत रखने और दान-पुण्य करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

माघी पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा कराना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कर्म व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाते हैं। माघी पूर्णिमा के अवसर पर गंगा सहित सभी पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। विशेष रूप से प्रयागराज के संगम में स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा से संबंधित ग्रह-दोषों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि इस दिन को पुण्य-योग का दिन भी कहा जाता है।

संगम स्नान, दान और मोक्ष की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघी पूर्णिमा के दिन स्वयं भगवान विष्णु प्रयागराज संगम में स्नान के लिए आते हैं। इस पावन अवसर पर संगम में स्नान करने वाले भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। स्नान के समय गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है, जिससे मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है। धार्मिक ग्रंथों में माघ माह के दान को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। विशेष रूप से माघी पूर्णिमा तिथि पर किया गया दान कई गुना फल प्रदान करता है।

इस दिन तिल, अन्न, भोजन, वस्त्र, गुड़, घी, कपास, फल और लड्डू का दान करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मत्स्य पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति माघ माह की पूर्णिमा को ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को श्रद्धा पूर्वक दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है और अंतत मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करना चाहिए।

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