संसार मनाये रंग-पर्व बारंबार
हे विष्णु ! नरसिंह अवतार का अंजाम है
हिरण्यकश्यप का संहार
आपके परम उपासक श्रद्धेय श्री श्री भक्त प्रह्लाद का महाउद्धार
वरदान भी अभिशाप में बदल सकता है
बताया आपने पालनहार
न जलने का वरदान
होलिका का हो गया बेकार
बता दिया कभी-न-कभी चूर होता है अहंकार
द्वेष नहीं, तकरार नहीं, बरकरार रखना प्यारे
हे कमलनयन ! उदाहरण सहित नसीहत देने के
बावजूद हम मानव सुधर नहीं पाये हैं होलिका,
हिरण्यकश्यप के विकारों को अपने दिलो-दिमाग
से निकाल नहीं पाये हैं। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व
होली जोश-खरोश से मनाते
एक-दूजे को रंग लगाकर
शत्रु को गले लगाकर बखूबी रीत निभाते
हे नारायण! आप पर पूरी सृष्टि का दारोमदार
भले ही न आए हममें कभी भी सुविचार
कृपा करके मत आने दीजिए दानवी विचार
आ भी जाएँ तो कर दीजिए शीघ्र ही दरकिनार
अन्यथा हो जाएगी द्वेष की भरमार
अहंकार, छलछद्म छा जाएगा चहुँदिशी अंधकार
पारिवारिक युद्ध भी होने लगेंगे अपार
अपने ही अपनों से नहीं रखेंगे व्यवहार
कैसे मना पाएँगे होली का पावन त्यौहार
आपके किये-कराये पर फिर जाएगा पानी।
करबद्ध प्रार्थना है, नजर बनाये रखिए लगातार
समस्त संसार मनाये रंग-पर्व बारंबार।
-महेन्द्र अग्रवाल
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