हैदराबाद, भक्त एवं प्रभु के बीच सबसे बड़ा पर्दा माया का है। जो जीव माया के चक्कर में पड़ता है, वह भटकता रहता है। जो माया को छोड़ प्रभु की शरण में जाता है, उसका कल्याण होता है। उक्त उद्गार सिद्दिअम्बर बाजार स्थित बाहेती भवन में राजस्थानी जागृति समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा वाचक बाल विदुषी सुश्री हरिप्रिया वैष्णवीजी ने दिये। उन्होंने कहा कि संसार को ज्ञानियों ने दुखों का सागर बताया है क्योंकि जो भी संसार में आता है वह संसारी चमक-दमक में फंस कर रह जाता है।
संसार में जिस उद्देश्य के लिए जन्म लिया, उसे भूल जाता है। संसार रूपी माया से केवल प्रभु ही भक्तों को बचा सकते हैं। भक्त और भगवान के बीच केवल माया का पर्दा है और इसे हटाने वाला ही जीवन को साकार बनाता है। हरिप्रियाजी ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा की महत्ता बताते हुए कहा कि जब पृथ्वी पापों के बोझ से मुक्त हो गई तो पृथ्वी ने ब्रह्माजी से पापों से एवं राक्षसों से मुक्त करने का आग्रह किया।
ब्रह्माजी विष्णुजी के पास गये और फिर पृथ्वी से कहा कि मैं स्वयं ही धरती पर अवतार लेकर पृथ्वी को राक्षसों व पाप से मुक्त करूँगा। इस प्रकार प्रभु अपना वादा पूर्ण करते हुए माता देवकी के गर्भ में आठवें पुत्र के रूप में आये। आकाशवाणी ने कंस को चेताया था कि तुम्हारी बहन देवकी का आठवां पुत्र ही काल बनकर आयेगा। इसलिए कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और सात संतानों का वध किया। आठवें पुत्र के अवतार लेते ही प्रभु ने माया रची और सभी को गहरी नींद में सुला दिया। इसके बाद वासुदेव ने श्रीकृष्ण को भारी तूफान में नंद बाबा के महल में पहुँचा दिया।
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प्रभु की मर्जी के आगे किसी की नहीं चलती
सुश्री हरिप्रिया ने कहा कि जब भी संसार में कुछ अच्छा होता है तो पापियों में हाहाकार मच जाती है और वे सारे प्रयास करते हैं कि अच्छे कार्य न हों, लेकिन जो प्रभु की मर्जी होती है उसके आगे किसी की नहीं चलती है। कथा में श्रीराम जन्म तथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अतिथि कमल कांकाणी, प्रकाश बंसल, हरिकिशन ओझा, महेश तिवारी, सुभाष राठी, भगवानदास कांकाणी, विद्या देवी शर्मा, प्रशांत बल्दवा, अमित सोमाणी, सुमित सोमाणी का स्वगात अध्यक्ष श्रीनिवास सोमाणी व अन्य ने किया।
अवसर पर कथा के मुख्य यजमान अग्रवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष अंजनी कुमार अग्रवाल, कथा के दैनिक यजमान अग्रवाल समाज के निवर्तमान अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, उद्योगपति वेणुगोपाल तोतला, कृष्ण कुमार सौंथलिया, बृजगोपाल असावा, हीरालाल सोमाणी चिनूर, समाजसेवी कमल किशोर कांकाणी, जया रमेश जागीरदार, अशोक हीरावत, सहयोगी अग्रवाल समाज के अध्यक्ष अनिरुद्ध गुप्ता, ओमप्रकाश अग्रवाल, रामकुमार गोयल, बैजनाथ सिग्नोडिया, जमनालाल मनोहरलाल कांकाणी, बद्रीविशाल बंसल, मधुसूदन सौंथलिया, मुकेश कुमार लोया, इन्द्रकरण सौंथलिया, दिनेश मानसिंह, महेन्द्र विजयवर्गीय, रूपेश सोनी, भगवान पंसारी ,नारायणलाल बाहेती, कैलाशचंद मणियार, सुरेश कुमार अग्रवाल ने कथा में सहयोग प्रदान किया।
अवसर पर अध्यक्ष श्रीनिवास सोमानी, उपाध्यक्ष प्रेमचंद मुणोत, अशोक कुमार हीरावत, मंत्री महेश अग्रवाल, सह-मंत्री रामदेव नागला, कोषाध्यक्ष संजय राठी, सह-कोषाध्यक्ष मनीष सोमाणी, संगठन मंत्री रमेश मोदानी, प्रचार मंत्री रिद्धीश जागीरदार, सदस्य जयप्रकाश लड्डा, बालाप्रसाद मोदानी, दामोदर सोमाणी, धर्मराज ढाका, नेमीचंद झा, बालाप्रसाद लड्डा, कमल भट्टड़, बद्रीविशाल तोष्णीवाल, प्रेम परवाल, गोविन्दराव बिरादर, महेश उपाध्याय, हेमलता शर्मा, लीला बजाज, आशा देवी सोमाणी, शोभा डागा, अल्का सांखला, शकुंतला नावंदर व अन्य ने सहयोग दिया। कथा के पश्चात सभी के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई।
