इजराइल में मोदी, जापान में योगी आखिर क्या है भारत का नया एजेंडा ?

प्रधानमंत्री मोदी का इजराइल दौरा जहां वैश्विक रणनीतिक संतुलन, सुरक्षा सहयोग और हाई क्वालिटी टेक्नीक शेयरिंग पर फोकस्ड है, वहीं योगी आदित्यनाथ का सिंगापुर-जापान दौरा आर्थिक कूटनीति और निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम है। एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर भारत अपनी विदेश नीति को मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश वैश्विक पूंजी और तकनीक को आकर्षित करने की कोशिश में जुटा है। दोनों यात्राएं यह दर्शाती हैं कि आज की राजनीति में कूटनीति सिर्फ राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं है बल्कि सुरक्षा, तकनीक, व्यापार और निवेश से सीधे जुड़ी हुई है।

पीएम मोदी का इजराइल दौरा ऐसे समय में हुआा है जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है। एक तरफ ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा बरकरार है तो दूसरी तरफ इजराइल भी लंबे समय से फिलिस्तीन में हमास से संघर्ष में जुटा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। पीएम मोदी और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी मुलाकात के दौरान रक्षा से लेकर व्यापार और तकनीक से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के मुद्दे पर कई समझौते किए हैं।

भारत की विदेश नीति इस वक्त चर्चा में है। चर्चा में इसलिए, क्योंकि एक तरफ पीएम मोदी और दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी दोनों ही विदेश दौरे पर गए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर और जापान का दौरा किया। दोनों नेताओं की यात्राएं अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक, रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक नजरिए से बेहद अहम मानी जा रही हैं। एक तरफ भारत-इजराइल की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देने की कोशिश है, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने के प्रयास की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

नरेंद्र मोदी का दूसरा इजराइल दौरा, रणनीतिक संदेश

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दौरे पर गए। यह उनका दूसरा इजराइल दौरा था। इससे पहले वे 2017 में इजराइल गए थे। नौ साल बाद यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिक्स के लिहाज से हालात तेजी से बदल रहे हैं। भारत-इजराइल संबंध रणनीतिक साझेदारी के नए स्टेप में आ चुके हैं। पीएम मोदी तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर पहुंचे, तो वहां उनका भव्य स्वागत हुआ। इजरायली सरकार की ओर से पीएम मोदी को दिया जा रहा महत्व दोनों देशों की बढ़ती नजदीकियों को गहराई देता है।

पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच द्बिपक्षीय बातचीत में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और नई तकनीकों पर विशेष फोकस रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। कई अहम समझौते भी हुए। भारत और इजराइल के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत है। ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, निगरानी तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग रहा है। इस दौरे के दौरान सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर नए एमओयू पर हस्ताक्षर भी हुए।

अब बात करते हैं सीएम योगी के विदेश दौरे की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर के बाद जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचे। वहां उन्होंने उत्तर प्रदेश इन्वेस्टमेंट रोडशो किया और जापानी निवेशकों से मुलाकात की। योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश को भगवान राम की जन्मभूमि और भगवान बुद्ध की पवित्र भूमि बताते हुए सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर चलने की बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां निवेश के असीम अवसर हैं।

उत्तर प्रदेश की वैश्विक निवेश और तकनीक पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। राज्य में व्यापक रेल नेटवर्क और तेजी से बढ़ती एयर कनेक्टिविटी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत आबादी युवा है, जो एक मजबूत वर्कफोर्स के रूप में उपलब्ध है। स्किल्ड मैनपावर और अपेक्षाकृत कम लागत निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

राज्य सरकार की नीतिगत स्थिरता और फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस सिस्टम को भी उन्होंने निवेशकों के सामने प्रमुख ताकत के रूप में रखा। जापान से पहले योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर में प्रमुख निवेशकों से मुलाकात की। उन्होंने टेमासेक के चेयरमैन टी ओ ची हीन से चर्चा की। इस दौरान डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, रिन्यूएबल एनर्जी और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर में संप्रभु निवेश की संभावनाओं पर बात हुई।

योगी आदित्यनाथ ने अपने दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी सामने रखा। राज्य सरकार का मानना है कि वैश्विक निवेश और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिये उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिग और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में डेवलप किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी का इजराइल दौरा जहां वैश्विक रणनीतिक संतुलन, सुरक्षा सहयोग और हाई क्वालिटी टेक्नीक शेयरिग पर फोकस्ड है, वहीं योगी का सिंगापुर-जापान दौरा आर्थिक कूटनीति और निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम है।

उत्तर प्रदेश की वैश्विक निवेश और तकनीक पर फोकस

एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर भारत अपनी विदेश नीति को मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश वैश्विक पूंजी और तकनीक को आकर्षित करने की कोशिश में जुटा है। दोनों यात्राएं यह दर्शाती हैं कि आज की राजनीति में कूटनीति सिर्फ राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, व्यापार और निवेश से सीधे जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी के इजराइल दौरे के सबसे अहम बिंदु रक्षा और सुरक्षा पर होने वाले समझौते है।

भारत इस क्षेत्र में हथियार खरीद से लेकर उन्नत तकनीक हासिल करने पर जोर दे रहा है। इस समझौते के तहत भारत को इजराइल के उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों तक पहुंच मिल सकती है, जिसमें अत्याधुनिक लेजर-आधारित आयरन बीम शामिल है। इजराइली सरकार ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए चार करोड़ डॉलर की योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत भारत में 10 नए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कट्टरपंथी विरोधियों का सामना करने के लिए हेक्सागन गठबंधन नाम का एक क्षेत्रीय गुट बना रहे हैं जिसमें इजराइल, भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब-अफ्रीकी देश शामिल होंगे।

उधर जापान दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निवेश और औद्योगिक सहयोग को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जापानी निवेशकों के लिए विशेष जापान इंडस्ट्रियल सिटी विकसित की जा रही है, जिसकी निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है। यह इंडस्ट्रियल सिटी लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य जापान की कंपनियों को विश्वस्तरीय औद्योगिक ढांचा उपलब्ध कराना है।

उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए जापानी उद्योगों को आमंत्रण

मुख्यमंत्री ने जापान के उद्योग प्रतिनिधियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है। बीते 9 वर्षों में राज्य में 16 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन शुरू किया गया है, जिससे कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जल्द संचालित होगा। जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगा।

राजेश श्रीवास्तव

एयरपोर्ट के आसपास 27 बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जिससे हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे और वैश्विक कंपनियों को निवेश का बेहतर प्लेटफॉर्म मिलेगा। साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि जापान की कई कंपनियों ने नोएडा क्षेत्र में निवेश को लेकर सकारात्मक रुचि दिखाई है और कुछ ने निवेश भी किया है। गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री सिंगापुर दौरे पर भी गए थे, जहां हजारों करोड़ रुपए के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ था। अब जापान दौरे के माध्यम से उत्तर प्रदेश को एशियाई निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जेवर एयरपोर्ट के संचालन के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।

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