सोलह श्रृंगार से प्रसन्न होती हैं मां पार्वती
हरियाली तीज सौंदर्य, प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। माना जाता है कि सोलह श्रृंगार करने से मां पार्वती प्रसन्न होती हैं और महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। यह श्रृंगार श्रद्धा, समर्पण और दांपत्य प्रेम की अभिव्यक्ति भी है। सोलह श्रृंगार में बिंदी, सिंदूर, काजल, मेहंदी, चूड़ियां, मंगलसूत्र, नथ, पायल, अंगूठी, गजरा, इत्र, झुमके, कमरबंद, बिछुआ, गजरा और सुंदर पोशाक शामिल हैं। यह श्रृंगार देवी स्वरूप को साकार करने का एक प्रयास भी माना जाता है।
व्रत प्रकिया और नियम
हरियाली तीज का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है। महिलाएं स्वच्छ परिधान धारण करके घर के मंदिर में दीप प्रज्जवलित करके शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। कथा सुनने और सुनाने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है। जो महिलाएं व्रत नहीं कर सकतीं, वे केवल पूजा करके भी पुण्य प्राप्त कर सकती हैं। अविवाहित युवतियों के लिए भी यह व्रत खास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और पूजा करने से उन्हें योग्य जीवन-साथी प्राप्त होता है। इसके लिए निम्न मंत्र जपना लाभकारी माना गया है-
हे गौरी शंकरार्धांगी।
त्वं शंकर प्रिया।
मां कुरु कल्याणी।
कान्त कान्तां सुदुर्लभाम।
यह मंत्र जीवन में प्रेम और सामंजस्य लाने की भावना को प्रकट करते हैं।
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पूजा के दौरान देवी पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करें, जिसमें हरे रंग की साड़ी, हरी चुनरी, सिंदूर, कंघी, बिछुआ, बिंदी, चूड़ियां, खोल, कुमकुम, मेहंदी, दर्पण और इत्र आदि। यह व्रत निर्जला रखने का विधान है। इस दिन पर हरे रंग का विशेष महत्व माना गया है। इसलिए अपने श्रृंगार में हरे रंग को शामिल करें, जैसे- हरे रंग की चूड़ी, बिंदी, हरी साड़ी आदि। इस दिन हाथों में मेहंदी जरूर लगाएं। इससे साधक को मां पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
-हितेंद्र कुमार शर्मा
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