धर्म चक्र की भांति रक्षा करता है नवकार महामंत्र : मंगलज्योतिजी म.सा.

हैदराबाद, जिस प्रकार चक्रवर्ती के सेना के आगे धर्म चक्र चलता है, उसी प्रकार मानव को भी प्रतिदिन अपनी दिनचर्या शुरू करने से पहले नवकार महामंत्र का स्मरण कर कार्य प्रारम्भ करने चाहिए। नवकार महामंत्र धर्म चक्र की भांति रक्षा करता है।


उक्त उद्गार अमीरपेट स्थित जैन स्थानक में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, अमीरपेट के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मासिक धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी मंगलज्योतिजी म.सा. ने व्यक्त किये। संघ के महामंत्री पंकज रांका द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, साध्वीजी ने कहा कि पुण्य का उदय पूर्व भव के कर्म से माँ के गर्भ में आते ही शुरू हो जाता है। पिता का हृदय कठोर एवं माता का हृदय कोमल होता है। माता-पिता के मूलभूत गुण होते हैं। माँ के गर्भ में बालक के आते ही स्वप्न जरूर आता है, परन्तु किसी को याद रहता है, किसी को नहीं। स्वप्न में शेर का आना शुभ माना जाता है।

म.सा. ने कहा स्वप्न में शेर शांत एवं डरावना लगे, ऐसा नहीं होना चाहिए। शगुन अच्छे-बुरे मनुष्य को लगते हैं, परन्तु बुरे स्वप्न बुरे नहीं होते, क्योंकि वह आने वाले संकट या परेशानी का संकेत देकर हमें सजग करते हैं। प्रभु भक्ति का शुभ समय सुबह 3.30 के बाद प्रारंभ होता है, रात में 12 बजे से 3.30 तक मिथ्याती आत्माएँ गमन करती हैं। मोक्ष में जाने वाले या चले गये, वह आत्मा ही भगवान कहलाती है। पति-पत्नी का रिश्ता जीवनसाथी का होता है।

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संसार में मानव समझदारी से जीवन जिये, तो संसार अनुकूल, ईर्ष्या भाव से जिए तो प्रतिकूल लगता है। नवकार महामंत्र का पारिवारिक जाप, आयंबिल तप की आराधना, पाँच उपवास, एकासना, निरंतर जप-तप गतिमान है।

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