जिसका मन मस्त, उसके पास समस्त : कनकप्रभाजी
हैदराबाद, जिसका मन मस्त है, उसके पास समस्त है। यही जीवन जीने का मूल मंत्र है। उक्त उद्गार फीलखाना स्थित महावीर भवन में श्री महावीर स्वामी जैन श्वे. संघ चातुर्मास व्यवस्था समिति द्वारा आयोजित चातुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी कनकप्रभाजी म.सा. ने दिये। प्रचार प्रसार मंत्री उत्तम संकलेचा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पू. कनकप्रभाजी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि सर्वप्रथम हमें आत्मा का परमात्मा से मिलन कराना है।
मेरी आत्मा पूर्व में भी थी, वर्तमान में भी है और भविष्य में भी रहेगी। इसलिए गुरु भगवंत कहते हैं कि हमें अच्छे संस्कारों को भीतर में लेने की आवश्यकता है। ऐसे संस्कारों को हम ग्रहण करेंगे जो इस भव और आगे के भव में भी लाभकरी हों। हमारा ज्ञान और मोह हमें दुखी कर रहा है। इच्छा हमें दुख पहुंचा रही है। चित्त प्रसन्न तप से हमारे मन में अच्छे और संस्कारी भाव उत्पन्न होते हैं। जीवन जीने की कला कठिन है लेकिन मुश्किल नहीं है।
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आज दत्त सूरी तप के बियासने सम्पन्न हुए जिसका लाभ गोमीदेवी शंभुमल सिंघवी कटारिया ने लिया। चातुर्मास समिति द्वारा उनका बहुमान किया गया। आज चित्त प्रसन्न तप के एकासना का दूसरा दिवस रहा। इसमें काफी संख्या में युवा भाग ले रहे हैं। श्री जिनदत्त सूरी जैन सेवा मंडल द्वारा व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। साधर्मिक भक्ति का लाभ मोहिनी देवी भंवरलाल संकलेचा परिवार ने लिया। चातुर्मास सह-संयोजक मनीष श्रीश्रीमाल ने सभी से प्रचवन और जिनशासन के हर कार्य में अधिक से अधिक संख्या में पधारने का आग्रह किया है।
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