कहते हैं कि दुनिया में एक शक्ल के 7 लोग होते हैं। उसी तरह भगवान श्रीकृष्ण के भी हमशक्ल था। यहाँ उस पौराणिक पुरुष के संबंध में जानते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का एक हमशक्ल था, जिसका नाम था- पौंड्रक। वह खुद को असली कृष्ण बताता था, क्योंकि उसके पिता का नाम भी वासुदेव था।
वह लोगों से कहता था कि मैं ही श्रीकृष्णहूं और मेरी पूजा करो। भागवत पुराण और महाभारत में पौंड्रक का वर्णन मिलता है।पौंड्रक वासुदेव काशी के पास पुंड्र साम्राज्य का एक राजा था, जिसने स्वयं को असली कृष्ण घोषित किया था। उसकी माँ श्रीकृष्ण के पिता, वासुदेव की बहन थीं और उसके पिता का नाम भी वासुदेव था।
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उसे अपनी चापलूसी बहुत पसंद थी और वह खुद को असली कृष्ण कहता था। उसने श्रीकृष्ण जैसा दिखने के लिए माया से नकली सुदर्शन चक्र, कौस्तुभ मणि और मोर पंख धारण किए थे। पौंड्रक वासुदेव ने भगवान कृष्ण को संदेश भेजकर उन्हें मथुरा छोड़कर जाने या उसके साथ युद्ध करने के लिए कहा था।
अंत में जब युद्ध हुआ, तो भगवान कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से पौंड्रक को उसके सहयोगियों समेत मार गिराया।
एक बार पौंड्रक ने भगवान कृष्ण को एक संदेश भेजा था, जिसमें लिखा था- तुम्हें अपना नाम और वेशभूषा छोड़नी होगी, अन्यथा युद्ध के लिए तैयार रहना होगा।
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भगवान कृष्ण ने पहले तो उसकी बातों और हरकतों को नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में युद्ध की चुनौती स्वीकार कर ली।
श्रीकृष्ण युद्ध के मैदान में पहुंचे, तो वे पौंड्रक के नकली रूप को देखकर हंसने लगे। उन दोनों के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ, जिसके बाद भगवान कृष्ण ने अपने सुदर्शन-चक्र से पौंड्रक का वध कर दिया।
