प्रतिभा प्रिंटिंग प्रेस में विश्व हिंदी दिवस मनाया गया
हैदराबाद, हिन्दी भाषा की वैश्विक उपस्थिति एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान को स्थापित करने के उद्देश्य से प्रतिभूति मुद्रणालय, हैदराबाद में विश्व हिन्दी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. पी के जैन, एसोसिएट डायरेक्टर व वैज्ञानिक, एडवांस रिसर्च सेंटर, हैदराबाद मुख्य अतिथि व विशेष व्यक्त के रूप में उपस्थित थे।
विश्व हिन्दी दिवस कार्यक्रम का आरंभ मुख्य अतिथि, महाप्रबंधक के दीप प्रज्वलन एवं कु. सुमना दत्ता की सरस्वती वंदना से हुआ। एस.आर. वाजपे, महाप्रबंधक ने मुख्य अतिथि डॉ. पी के जैन का शॉल व मोमेंटों से स्वागत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मेहुल राठौड़, प्रबंधक (मा.सं.) व राजभाषा प्रभारी ने स्वागत भाषण के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के बढ़ते कदमों की विवेचना की और हिन्दी को वैश्विक भाषा बनाने के लिए प्रयत्नशील रहने की अपील की।
विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर कार्यालय में सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए सामूहिक हिन्दी ग्रुप परिचर्चा का आयोजन ‘एक राष्ट्र-एक भाषा व पारंपरिक ज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (जो इस वर्ष की थीम भी है) विषय पर किया गया गया। इसमें कार्यालय के अधिकांश कर्मचारियों ने भाग लेकर अपनी-अपनी राय जाहिर की तथा विजेता कर्मचारियों को प्रथम, द्वितीय व तृतीय नकद पुरस्कार मुख्य अतिथि के कर कमलों से प्रदान किये गए।
डॉ. पी के जैन ने हिन्दी भाषा के भौतिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास का वैज्ञानिक विवेचन करते हुए बताया कि अंग्रेजी का विकास के साथ कोई संबंध नहीं है, ब्रिटिश राज से पहले भारत में फारसी और उससे पहले संस्कृत व्यवहार व व्यापार की भाषा थी, लेकिन ब्रिटिश काल में अंग्रेजी को रोजगार से जोड़कर भारतीय भाषा व संस्कृति को समाप्त करने की पुरजोर कोशिश की गई।
हिन्दी का वैश्विक महत्व बढ़ा, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसका वर्चस्व
आज भी कई विकसित देश ऐसे हैं जिन्हें अंग्रेजी का ज्ञान नहीं है, लेकिन भारतीय मानसिकता ऐसी है जो आज भी यह समझती है कि जो अंग्रेजी जानता है वो ज्ञानी है। उन्होंने कहा कि कोई भी भाषा सीखने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि मात्र भाषा को बाई आँख, हिन्दी को दाई आंख व अंग्रेजों को आवश्यकता अनुसार चश्मे की तरह इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि विश्व की 1/5 जनता भारत में निवास करती है और इस वृहद बाजार पर सभी देशों की निगाह है। उन्हें पता है कि हिन्दी भाषा ही उनके उत्पाद को पहचान दिलवा सकती है।
आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भाषा, कला संस्कृति, दर्शन व योग की खुल कर चर्चा होती है तभी विश्व के 175 विश्वविद्यालयों में हिन्दी अध्ययन व शोध की सुविधा उपलब्ध है। हिन्दी का वर्चस्व व इसकी गूंज दिनों दिन बढ़ती जा रही है। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में महाप्रबंधक एस आर वाजपे ने कहा कि वैश्विक स्तर पर हिन्दी का महत्व समझ में आ रहा है। पहले जो निर्यातक अपने ब्रोचर केवल अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच अथवा मैंगनीज भाषा में भेजा करते थे, आज हिन्दी में भी भेजने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि हिन्दी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुखर हो रही है और आने वाले समय में इसे मंच ही हिन्दी को उसका सही स्थान दे पाने में सक्षम होंगे। कार्यक्रम का समापन डॉ. कमलेश शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन व राष्ट्रीय गीत से हुआ।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



