प्रदर्शनी मैदान में राष्ट्र संतों के सान्निध्य में मनाया गया रक्षाबंधन

हैदराबाद, नुमाइश मैदान के विशाल पंडाल में हजारों भाई-बहनों ने शनिवार को राखी पर्व के अवसर पर राष्ट्र संत चन्द्रप्रभजी महाराज, ललितप्रभ सागरजी महाराज और मुनि शांतिप्रिय सागरजी के सानिध्य में रक्षाबंधन महोत्सव मनाया। सैकड़ों श्रद्धालु बहनें भाव विह्वल होकर 35 फीट की राखी लेकर जब मंच पर पहुंचीं, तो हजारों सत्संगप्रेमियों ने ताली बजाकर स्वागत किया। यह राखी गुरुजनों और चातुर्मास समिति को समर्पित की गयी।

आज यहां समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति, त्रयनगर, हैदराबाद द्वारा नामपल्ली के एग्जिबिशन ग्राउंड में आयोजित 53 दिवसीय प्रवचनमाला के 35वें दिन प्रेम का पर्व रक्षाबंधन विषय पर प्रवचन के दौरान जब गुरुजनों द्वारा अभिमंत्रित रक्षा सूत्र सत्संग प्रेमियों में बाँटा गया और सभी ने एक-दूजे को मंत्रोच्चार के रक्षा सूत्र एक साथ बाँधा तो पूरे पंडाल में श्रद्धा, भक्ति और प्रेम का अद्भुत माहौल बन गया।

1001 बहनों की राखी से विश्व रिकॉर्ड की ओर एक अनोखा कदम

लगभग 1001 बहनों द्वारा एक साथ भाइयों को राखी बांधकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की दावेदारी प्रस्तुत की गई। गुरुजनों द्वारा जीवन की उन्नति के लिए महा मांगलिक का विशेष आयोजन हुआ। अवसर पर राष्ट्र संत ललितप्रभजी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि रक्षाबंधन रिश्तों में मिठास घोलने और टूटे रिश्तों को साधने का पर्व है। रिश्तों को बनाना आसान है, पर उन्हें मीठा-मधुर बनाकर रखना मुश्किल है।

रिश्तों को बनाना तो ठीक वैसे ही है जैसे मिट्टी पर मिट्टी से मिट्टी लिखना, पर उन्हें निभाना पानी पर पानी से पानी लिखने जैसा है। हमारे रिश्ते रोटी जैसे न हों कि थोड़ी-सी आँच क्या लगी कि वह काली पड़ गई। रिश्ते तो मछली और सरोवर जैसे होने चाहिए कि जब तक जिएँगे तब तक साथ-साथ रहेंगे। जो घर को सदा जोड़कर रखे, वही बुद्धिमान और बुद्धिनिधान है। म.सा. ने बहुओं को समझाया कि जो बहुएँ घर को तोड़ती हैं वह घर के लिए अभिशाप बन जाती है, पर जो बहू घर को किसी भी हालत में टूटने नहीं देती, वही घर की महालक्ष्मी कहलाती है।

घर की बहुएँ बनें महालक्ष्मी, तभी टिकेगा सुख-समृद्धि का वास

लक्ष्मी की पूजा करने से पता नहीं लक्ष्मी जी कितने प्रतिशत आएँगी, पर घर की बहुएँ महालक्ष्मी बन जाएं, तो घर में सदा लक्ष्मीजी का बसेरा हो जाएगा। पूज्य ने कहा कि आज के दिन तो संत हृदय भी द्रवित हो उठता है। यद्यपि हमें सगी बहनें न मिलीं, पर भगवान को धन्यवाद है कि उसने हमें हजारों बहनें दी हैं। जब तक हम जीवित हैं किसी भी बहन पर आँच आने नहीं देंगे। संतप्रवर ने कहा कि भ्रूण हत्या करना राखी का अपमान है।

हर संतान ईश्वर के घर से मिला उपहार है। उसकी कोख में हत्या करना स्वयं ईश्वर की हत्या करना है। आज हजारों लोग ऐसे हैं जो संतान न होने की वजह से बिलख रहे हैं, अगर आपने ऐसा पाप किया तो आपको भी ऐसे ही बिलखना पड़ेगा। आप कोख में आई संतान को अवश्य जन्म दें। भले ही संतान रहित दंपत्ति को उसे उपहार में दे दें, उनका वंश आबाद हो जाएगा और वे जिंदगीभर आपके ऋणी भी बने रहेंगे। अवसर पर डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागरजी ने नवकार महामंत्र की सामूहिक प्रार्थना करवाई।

समारोह का शुभारंभ महावीर प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से

समारोह का शुभारंभ विद्या बाई, मांगीलाल, उत्तमचंद, सुशीला देवी, संजू, रिविका, सुविष्ट भलगट परिवार खैरताबाद द्वारा भगवान महावीर की मूर्ति के समक्ष माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि राष्ट्र संत गुरुदेव के सांसारिक दफ्तरी परिवार जयपुर से किशन लाल कोठारी, नरेश कुमार श्रीमाल का स्वागत विमल कुमार नाहर, मोतीलाल भलगट, उमेश बागरेचा, प्रदीप सुराणा, अमित मुणोत,

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पवन कुमार पांडया, नवरतनमल गुंदेचा, अशोक कुमार नाहर, माणक चंद पोकरणा, विमल कुमार मुथा, महिलाओं का स्वागत शोभा देवी नाहर, शोभा रानी भलगट, आरती सुराणा, दीपिका बागरेचा, सूरज देवी गुंदेचा, लाड़ कंवर नाहर, ललिता पोकरणा, सविता मुथा ने किया। मंच संचालन ने करते हुए महामंत्री अशोक कुमार नाहर बताया कि रविवार को एग्जिबिशन ग्राउंड में सुबह 9 बजे कैसे लाएं समाज में एकता विषय पर प्रवचन होगा और गणधर गौतम स्वामीजी की सामूहिक एकासना का आयोजन होगा।

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