जीवन का उद्धार करता है राम नाम : लक्ष्मीजी
हैदराबाद, राम कथा जीवन में यह समझ प्रदान करती है कि जीवन में राम नाम की विशेष महिमा है। बारह करोड़ बार यदि कोई प्रभु राम का नाम जपता है, उसको साक्षात परामात्मा आकर दर्शन प्रदान करते हैं। संसार में राम नाम की महिमा अपरंपार है। राम नाम से जीवन का साक्षात उद्धार हो जाता है। उक्त उद्गार अत्तापुर स्थित श्री साई बाबा मंदिर प्रांगण में राजस्थानी जागृति समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन की कथा का श्रवण कराते हुए कथा वाचक बाल विदुषी सुश्री लक्ष्मीजी ने रखे।
लक्ष्मीजी ने कहा कि शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह प्रतिदिन आतुर होकर श्रीराम की प्रतीक्षा करती थी। शबरी को पूर्ण विश्वास था कि एक न एक दिन रघुनाथ अवश्य आएंगे। भगवान अपने भक्तों को भाव देखकर अवश्य दर्शन देते हैं। गुरु द्वारा उल्लखित श्रीराम की विशेषताओं जैसे कमलमयन, लंबे हस्त, जटाओं का मुकुट, वनमाल तथा अनुज लक्ष्मण के आधार पर शबरी उनको पहचान कर आह्लादित हो उठी और भावपूर्ण होकर राघव का स्वागत किया। आज भी शबरी माता के अनन्य प्रेम का उदाहरण दिया जाता है।
रामकथा से जीवन उद्देश्य और भक्ति का मार्ग
सुश्री लक्ष्मीजी ने कथा प्रसंग को विस्तार देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान दिया।नौ प्रकार की भक्ति में संतों का संग, भगवत कथा से प्रेम, मानरहित होकर सद्गुरु की सेवा, कपट त्यागकर भगवान का गुणगान, मंत्रजाप, सज्जनता के साथ कर्तव्यों का पालन, संसार में सबको एक समान समझना, धर्मपालन तथा जीवन में सरलता धारण करते हुए भगवान के भरोसे हो जाना शामिल है।
लक्ष्मीजी ने रामकथा जीवन जीना सिखाती है। इस कथा के माध्यम से प्रभु के प्रति भक्ति तथा समर्पण का भाव जाग्रत होता है। इस कथा के सार को आत्मसात करके अपने जीवन को धन्य करना चाहिए। लक्ष्मीजी ने रामकथा से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का श्रवण कराते हुए कहा कि भगवान हम सभी को संसार में एक उद्देश्य के साथ भेजते हैं। जब हम उस उद्देश्य का पालन नहीं कर पाते हैं, तो भगवान हमको जीवन और मृत्यु के चक्र में घुमाते रहते हैं।
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शीघ्रातिशीघ्र पहचाने अपने जीवन का उद्देश्य
यह चक्र तब तक चलता रहता है, जब तक मनुष्य भगवान द्वारा दिए गए उद्देश्य को पूर्ण नहीं करता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके हमें अपने जीवन के उद्देश्य को समझ लेना चाहिए। चौरासी लाख योनियों में भटकने से अच्छा है कि अपने जन्म उद्देश्य को पूरा करते हुए प्रभु नाम को अपना जीवन समर्पित कर दें। आज की कथा के मुख्य यजमान अग्रवाल समाज तेलंगाना के अध्यक्ष अनिरुद्ध गुप्ता और सह मुख्य यजमान अग्रवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष अंजनी कुमार अग्रवाल थे।
दैनिक यजमान अग्रवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, माहेश्वरी युवा संगठन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रूपेश सोनी, समाजसेवी मुकेश कुमार लोया, उद्योगपति वेणुगोपाल तोतला, लव फॉर काऊ के चेयरमैन जसमतभाई पटेल, समाजसेवी कृष्ण कुमार सौंथलिया, महेश बैंक के निदेशक बृजगोपाल असावा, श्री राजस्थानी नव जागृति मंच के अध्यक्ष सुरेश कुमार मोदी, अग्रवाल समाज अत्तापुर के पूर्व अध्यक्ष रामअवतार गुप्ता, समाजसेवी सुभाष केड़िया, राजस्थानी जागृति समिति के उपाध्यक्ष प्रेमचंद मुणोत थे। संयोजक राजस्थानी जागृति समिति के मंत्री महेश अग्रवाल थे।
कथा में समिति के अध्यक्ष श्रीनिवास सोमाणी, समिति के सहमंत्री रामदेव नागला, कोषाध्यक्ष संजय राठी, सह-कोषाध्यक्ष मनीष सोमाणी, संगठन मंत्री रमेश मोदानी, प्रचार प्रसार मंत्री रिद्धिश जागीरदार, कार्यकारिणी सदस्य जयप्रकाश लड्डा, बालाप्रसाद मोदानी, विद्यादेवी शर्मा, धर्मराम ढाका, बद्रीविशाल तोष्णीवाल, प्रेम परवाल, बालाप्रसाद लड्डा, श्याम सुन्दर जांगिड़, रामकुमार गोयल, कैलाश नारायण भांगडिया, बैजनाथ सिग्नोडिया, नरेश कुमार टिबड़ेवाल, कमल किशोर कांकाणी, मधुसूदन सौंथलिया, हीरालाल सोमाणी, सुरेश कुमार अग्रवाल, प्रमोद कुमार केडिया, महेन्द्र कुमार विजयवर्गीय, बद्रीप्रसाद सरायवाला, जनमालाल मनोहरलाल कांकाणी, सुधाकर रेड्डी, पं. सुरेश शर्मा एवं अन्य ने सहयोग प्रदान किया।
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