व्यक्ति के हाथ में धर्म और कर्म : राजमतीजी म.सा.

हैदराबाद, धर्म और कर्म अपने हाथ में है। एक हाथ में कर्म है, तो दूसरे में धर्म। धर्म और कर्म अपने हाथ में होने पर भी व्यक्ति व्यर्थ बातों में दुर्लभ समय को गंवा रहा है। अभी भी समय रहते तप, जप, त्याग, साधना करेंगे, तो आज भी अच्छा होगा और कल भी।

उक्त उद्गार सिख छावनी स्थित श्री आनंद जैन भवन कोरा में श्री जैन श्रावक संघ कोरा के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए राजमतीजी राजुल म.सा. ने व्यक्त किये। संघ के मंत्री अनिल तातेड़ व धर्मेंद्र मांडोत द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, म.सा. ने कहा कि प्रभु की जिनवाणी हर व्यक्ति को पवित्र और सुखी बनाती है।

तप-त्याग से जीवन बने सार्थक

भगवान की वाणी पर विश्वास नहीं, तो भगवान पर भी विश्वास नहीं होगा। भगवान की देशना हमेशा तरोताजी रहती है, जो कभी पुरानी होने वाली नहीं है। म.सा. ने कहा कि व्यक्ति में गुण और अवगुण होंगे ही होंगे। जो व्यक्ति हमेशा अवगुण वाले को देखता है, पर उसमें भी एक तो गुण मिलेगा ही।

छदमस्त में सुनने-देखने कुछ करने में शक्ति है, तो बिगड़ने की शक्ति भी होती है। मनुष्य खुद कुछ कर भी सकता है और दूसरों से करा भी सकता। सभी जीवों में सबसे बड़ा बुद्धिमान है व्यक्ति। परमात्मा ने कितना अच्छा जीवन दिया है, तो कभी परमात्मा को इतना सुन्दर जीवन देने के लिए आभार व्यक्त किया है। भगवान ऋषभदेव नहीं होते, तो कौन बताता कि खाना-पीना, अच्छा और बुरा कर्म क्या है। प्रभु ने अच्छा रहना, खाना, बोलना, जीना सिखाया, पर आज के व्यक्ति सारे जीवन में मिलावट कर रहा है।

जो कोई तप, उपवास, एकासना, बियासना, तेला आदि करे, उनका देखा देखी आपको भी प्रेरणा लेकर उपवास, आयंबिल करने चाहिए। व्यक्ति दूसरे की वस्तु, संपत्ति, गाड़ी-बंगला आदि देखकर उसकी बराबरी या अनुकरण करने की सोचता है, पर तप, त्याग, जो मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाते हैं, उसका अनुसरण नहीं करता।

Ad

आत्मा का श्रृंगार ही सच्चा कल्याण

म.सा. ने कहा कि व्यक्ति को शरीर का श्रृंगार नहीं, बल्कि आत्मा का श्रृंगार करने के लिए तप, जप, त्याग करना होग।, जब तक यह नहीं होगा, तब तक कल्याण नहीं होगा। जीवन में दान, तप, शील और भाव जड़ने पर ही कल्याण होगा। म.सा. ने कहा कि एक व्यक्ति रेत के समान, दूसरा व्यक्ति पत्थर के समान और तीसरा व्यक्ति वृक्ष के समान है।

वृक्ष भी दो तरह के होते हैं। एक ऊँचा होकर भी फल से लदने के बाद झुक जाता है, जबकि दूसरा वृक्ष अरंडी होता है, जिसके पत्ते तो नीचे होते हैं, लेकिन फल उसके ऊपर लगते हैं, जो केवल दवा बनाने के ही काम आते हैं। वटवृक्ष जो स्वयं के फल नहीं खाता, फिर भी सुख शांति देता है। मनुष्य बड़ा हो गया तो क्या हुआ, विवेक, ज्ञान, प्रेम, स्नेह नहीं, तो किसी काम का नहीं।

यह भी पढ़े : मन की आँखें खोलकर लक्ष्य पहचानें : श्री भक्तिदर्शन विजयजी

मंच संचालन करते हुए महामंत्री गौतमचंद मुथा ने बताया कि आज मधु महेंद्र कुमार पोकरणा ने 17 उपवास के पचखान लिए और आगे के भाव हैं। आज मुंबई से पधारे श्रद्धालुओं का श्री संघ की ओर से स्वागत अभिनंदन किया गया। आज की प्रभावना के लाभार्थी नरपतलाल रतनचंद विनायकिया, धारावी, मुंबई मरुधर में खंडप वाले थे।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Ad

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button