सामाजिक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित हो शोध : प्रो. मोलुगरम

हैदराबाद, उस्मानिया विश्वविद्यालय में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद-दक्षिणी क्षेत्रीय केंद्र की साझेदारी में अगली पीढ़ी का प्रशिक्षण-उभरते विद्वानों के लिए शोध पद्धति शीर्षक से दस दिवसीय पाठ्यक्रम आरंभ हुआ।क्षेत्रीय शहरी पर्यावरण अध्ययन केंद्र के भूगोल विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को कर्नाटक, पांडिचेरी, तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों के तीस शोध विद्वानों को अत्याधुनिक पद्धतिगत कौशल से लैस करने के लिए डिजाइन किया गया है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पाठ्यक्रम के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम ने विद्वानों का वास्तविक सामाजिक समस्याओं के समाधान पर शोध अध्ययन केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से बल दिया कि शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक पूर्णता नहीं, बल्कि सार्थक प्रभाव होना चाहिए।

प्रो. मोलुगरम ने कहा कि एक सशक्त साहित्य समीक्षा और शोध समस्या की उचित पहचान उच्च-गुणवत्तापूर्ण, प्रभावशाली शोध के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत स्तंभ हैं। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण प्रकाशनों के निर्माण के महत्व पर बल देते हुए प्रतिभागियों से प्रकाशन की मात्रा के पीछे भागने के बजाय उच्च प्रभावी, सूक्ष्म शोध परिणाम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।

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पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. नागेश ने सामाजिक विज्ञान की विविध धाराओं के विद्वानों के लिए व्यापक कवरेज सुनिश्चित करने हेतु देश भर से संकाय के रणनीतिक चयन पर प्रकाश डाला। सह-पाठ्यक्रम निदेशक तथा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. जी. नरेश रेड्डी ने प्रतिभागियों को शोध यात्रा के लिए एक मजबूत पद्धतिगत आधार स्थापित करने हेतु अनुभवी संसाधन व्यक्तियों की विशेषज्ञता का उपयोग करके सीखने के अवसरों को अधिकतम करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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