संशोधित वक्फ अवतरित, राज्यसभा ने पारित किया विधेयक

नई दिल्ली, लोकसभा के बाद राज्यसभा ने आज देर रात वक्फ (संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया। लोकसभा और राज्यसभा में पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। इससे पूर्व राज्यसभा में वक्फ बिल पर हुई लंबी चर्चा के दौरान विपक्ष के आरोपों पर किरेन रिजिजू ने जवाब दिया।

जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमने विपक्ष के कई सुझावों को माना है। सरकार ने विपक्ष के सभी सवालों के जवाब दिए हैं। इस दौरान विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो बहुमत में होता है वो सरकार चलाता है और लोकतंत्र बहुमत से चलता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कहा कि ट्रिब्यूनल में तीन मेंबर होने चाहिए, हमने वो बात मानी है।

उन्होंने कहा कि जब पहली बार वक्फ संशोधन विधेयक का मसौदा तैयार किया गया था और जो विधेयक हम अब पारित कर रहे हैं, उसमें बहुत सारे बदलाव हैं। अगर हमने किसी के सुझाव नहीं माने होते तो यह विधेयक पूरी तरह से अलग होता। उन्होंने कहा कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 22 मेंबर होंगे। एक्स ऑफिशियो मेंबर को मिला कर 4 से ज्यादा गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे। वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में 3 से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं होंगे। यह साफ तौर पर बताया जा चुका है।

जे. पी. सी. के सदस्य स्वयं जे. पी. सी. में बैठते हैं और आरोप लगाते हैं कि जे. पी. सी. में उनकी बात नहीं सुनी गई। जितना आप चाहते हैं, उतना स्वीकार नहीं किया जाएगा। अगर जेपीसी में बहुमत को मंजूरी मिल गई है, तो हम क्या कर सकते हैं?

सुधांशु ने विपक्ष पर बोला तीखा हमला

वक्फ संशोधन बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने साफ किया कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने विपक्ष को धर्मनिरपेक्षता की आड़ में तुष्टीकरण की राजनीति करने वाला बताया। राज्यसभा में बोलते हुए त्रिवेदी ने साफ कहा कि मुस्लिम समाज के कई लोग वक्फ बोर्ड की व्यवस्था से परेशान हैं और बीजेपी सरकार उनकी तकलीफ समझती है।

उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि ये लड़ाई शराफत अली और शरारत खान के बीच की है। बीजेपी सरकार शराफत अली के साथ खड़ी है और उन गरीब मुसलमानों के साथ है, जो ईमानदारी से जीना चाहते हैं। यही नहीं सुधांशु त्रिवेदी ने गांधी परिवार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि कभी देश में भूदान आंदोलन हुआ करता था, लेकिन आज गांधियों के नेतृत्व में भू हड़पने का सिलसिला चल पड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर शिया और सुन्नी के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड क्यों बनाए गए?

वक्फ विवाद और मुस्लिम कल्याण पर त्रिवेदी का बयान

सुधांशु त्रिवेदी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ लोग उम्मा (मुस्लिम उम्मा) का सपना देख रहे थे, लेकिन उनकी उम्मीदों पर अब पानी फिर गया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये वही लोग हैं जो अल्पसंख्यकों की बात तो करते हैं, लेकिन जब उनके अधिकारों की बात आती है तो उन्हें भी तौलने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि कानून को नहीं मानेंगे, नियम को नहीं मानेंगे और अदालत के आदेश को भी नहीं मानेंगे, तो इसका मतलब यह है कि वे अपनी खुदाई में जी रहे हैं।

त्रिवेदी ने आगे कहा कि बीजेपी सरकार ईमानदारी से मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए काम कर रही है। उन्होंने इसे एक बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि ये लड़ाई शराफत अली और शरारत खान के बीच की है, और हमारी सरकार शराफत अली के साथ खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने गरीब मुसलमानों का साथ दिया है और कट्टरपंथियों के वोट बैंक की राजनीति को ठुकरा दिया है।

वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग पर टिप्पणी करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है, लेकिन यहां तो पुराना मुल्ला ज्यादा प्याज खा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता लाने के लिए वक्फ कानून में बदलाव कर रही है, जिससे जमीनों की हेराफेरी पर रोक लगाई जा सके।

यह भी पढ़ें… मुसलमानों के खिलाफ नहीं है वक्फ़ संशोधन विधेयक, राज्यसभा में बोले मंत्री रिजिजू

दिग्विजय और शाह में तकरार

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी वक्फ विधेयक पर लंबी बहस चली। इस दौरान बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी के भाषण के एक हिस्से को लेकर जबरदस्त बवाल हो गया। बीजेपी सांसद के भाषण के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह और कांग्रेस सांसद दिग्विजय के बीच तकरार हो गई, जिस पर शाह ने यहां तक कह दिया कि इनको मेरा हौआ है, इन्हें सिर्फ मैं ही दिखाई देता हूं।

दरअसल, दिग्विजय सिंह ने शाह पर हमला करते हुए कहा कि जब गुजरात में दंगे थे तो आप वहां गृह मंत्री थे और आपका क्या रोल था, यह सब जग जाहिर है। इस पर शाह ने पलटवार करते हुए बताया कि दंगे के समय वे गृह मंत्री थे ही नहीं, बल्कि 18 महीने बाद बने थे। वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने अपने भाषण में कहा कि आजादी मिलने के समय मुस्लिम समाज के प्रतीक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, जाकिर हुसैन, मजरूह सुल्तानपुरी, साहिर लुधियानवी आजमी जैसे लोग थे।

लेकिन आज मुस्लिम समाज का नेतृत्व किन लोगों के साथ जोड़ा जाता है- मुख्तार अंसारी, इशरत जहां, याकूब मेनन, अतीक अहमद जैसे लोगों के साथ। सुधांशु त्रिवेदी के इस बयान पर एनसीपी-एससीपी सांसद फौजिया खान, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह समेत तमाम विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया। इस पर अमित शाह ने खड़े होकर कहा कि सुधांशु त्रिवेदी ने मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि इंडी अलायंस के लिए ऐसा कहा है।

इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो गुजरात में दंगे-फसाद हुए, उसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार थे, यह बताइए। इस पर शाह ने सिंह को जवाब देते हुए कहा कि आपने नहीं कहा कि (26/11) के हमले में आरएसएस का हाथ था तो अभी खड़े होकर बुलवा दीजिए। फिर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि मैंने यह कभी बात नहीं कही है। आप लोगों का यह प्रचार है।(एजेंसियाँ)

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