विश्व नेतृत्व के उत्कर्ष हेतु मूल्याधारित शिक्षा की भूमिका अहम : इंद्रसेना रेड्डी

हैदराबाद, भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रान्त प्रमुखों की तीन दिवसीय बैठक कान्हा शांति वनम में आयोजित की जा रही है। बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखण्ड सहित देश के सभी राज्यों के 274 प्रांत टोली कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में देश के विभिन्न विश्विविद्यालयों के 30 से अधिक कुलगुरु व देश के राष्ट्रीय महत्व के शैक्षिक संस्थानों के निदेशक व प्रमुख शिक्षाविद भी सहभागिता कर रहे हैं।

आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय शिक्षण मंडल की अखिल भारतीय प्रांत प्रमुख बैठक के उद्घाटन सत्र को त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली के निर्माण में संलग्न देश के श्रेष्ठतम मनीषियों को संबोधित करना सम्मान का विषय है। उन्होंने भारत केंद्रित व मूल्य आधारित शिक्षा प्रणाली को भारतीय शिक्षा प्रणाली में समाहित करने के लिए भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।

भारत केंद्रित शिक्षा और तकनीक की नई दिशा

इंद्रसेना रेड्डी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक मूल्य समान रूप से आवश्यक हैं। भारतीय शिक्षण मंडल का अनुसंधान, प्रबोधन, प्रशिक्षण, प्रकाशन एवं संगठन पर आधारित कार्य-प्रणाली भारत के लिए उपयुक्त शैक्षिक संरचना की नींव है। विशेष रूप से गुरुकुल शिक्षा का पुनर्जागरण, भारतीय ज्ञान परंपराओं का एकीकरण और मूल्याधारित शिक्षा प्रणाली की दिशा में शिक्षण मंडल की पहल अत्यंत सराहनीय है।

इंद्रसेना रेड्डी ने कहा कि गुरुकुल प्रणाली केवल शैक्षणिक व्यवस्था नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से मूल्यों का बीजारोपण करने वाली जीवन यात्रा है। ऐसे में यह संगठन शिक्षा को मैकॉले के ढाँचे से निकालकर भारत केंद्रित दिशा में पुनर्निर्मित करने की सशक्त शक्ति बनकर उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि 21वीं सदी भारत की होगी और अगले दशक में शिक्षा क्षेत्र के योगदान से भारत विश्व पटल पर अग्रणी भूमिका निभाएगा।

अवसर पर डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सतीश रेड्डी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि यह वह युग है, जब भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। तकनीक किसी भी राष्ट्र के विकास का प्रमुख संकेतक होती है। इसकी आधारशिला देश की शिक्षा व्यवस्था है। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक पटल पर प्रमाणित किया है।

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राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों और शोधार्थियों की भूमिका

स्वागत भाषण के दौरान भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि शिक्षण मंडल युवाओं को बौद्धिक योद्धाओं के रूप में तैयार कर राष्ट्र निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। अच्छे शिक्षकों के बिना उत्तम समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। भारतीय शिक्षण मंडल विभिन्न आनंदशालाओं के माध्यम से शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण में संलग्न है।

इंद्रसेना रेड्डी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय शिक्षण मंडल के 70 प्रतिशत सुझावों को सम्मिलित किया गया। उन्होंने कहा कि मंडल द्वारा वर्ष 2024 में आयोजित विविभा कार्यक्रम के माध्यम से 1400 से अधिक युवा शोधार्थियों को भारत-केंद्रित एवं मूल्याधारित अनुसंधान की दिशा में प्रेरित किया गया, जो विकसित भारत के निर्माण हेतु एक सशक्त बौद्धिक आधार एवं परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में योगदान देंगे।

सत्र का संचालन डॉ. उमा, प्रांत मंत्री, तेलंगाना ने किया। अतिथि का परिचय डॉ. मधुकर, विश्वविद्यालय कार्य-विभाग प्रमुख, तेलंगाना प्रांत ने दिया। प्रो. शिवराज, प्रांत अध्यक्ष, तेलंगाना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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