सालार जंग संग्रहालय में संस्थापक गैलरी उद्घाटित

राज्यपाल ने दिया संग्रहालयों को जीवंत शिक्षण केंद्रों के रूप में पुनर्परिभाषित करने पर बल

हैदराबाद, तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने आज सालारजंग संग्रहालय के 74वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर यहां संस्थापक गैलरी का उद्घाटन किया। अवसर पर उन्होंने संग्रहालयों को जीवंत शिक्षण केंद्रों के रूप में पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता पर विशेष रूप से बल दिया।

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने अपने संबोधन में सालारजंग संग्रहालय की विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कला और ज्ञान के प्रति दूरदर्शिता तथा जिज्ञासा आदि का एक दुर्लभ संगम है। उन्होंने कहा कि भारतीय, पश्चिमी और पूर्वी परंपराओं को प्रदर्शित करने वाली सुविचारित दीर्घाओं और दुर्लभ पांडुलिपियों एवं सुलेख कृतियों से सुसज्जित तथा समृद्ध यह संग्रहालय भावी पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण भंडार है।

टैगोर के विचारों के साथ शिक्षा में संग्रहालयों की भूमिका पर जोर

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को उद्धृत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सर्वोच्च शिक्षा वह है जो हमें केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सामंजस्य स्थापित करने में सहायक होती है। उन्होंने कहा कि इस आदर्श को साकार करने में संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राज्यपाल ने अवसर पर संग्रहालयों को जीवंत शिक्षण केंद्रों के रूप में पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता पर भी विशेष रूप से बल दिया।

राज्यपाल ने कहा कि संग्रहालयों को केवल स्थिर प्रदर्शन स्थल या आकस्मिक पर्यटन आकर्षण के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए। बल्कि उन्हें ऐसे गतिशील शिक्षण केंद्रों में विकसित होना चाहिए, जो युवाओं को सक्रिय रूप से शामिल करें। नए प्रदर्शनी स्थलों के विकास पर संग्रहालय प्रबंधन को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने युवा दर्शकों को आकर्षित करने के लिए नवोन्मेषी दृष्टिकोण अपनाना जारी रखने का आह्वान किया।

दुर्लभ कला संग्रह के माध्यम से हैदराबाद की विरासत संरक्षित

राज्यपाल ने देशभर के संग्रहालयों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सालार जंग संग्रहालय जीवंत संस्था के रूप में उभरकर आदर्श के रूप में कार्य कर सकता है। उद्घाटित संस्थापक गैलरी में सालार जंग परिवार की तीन पीढ़ियों सहित प्रख्यात राजनेताओं, प्रशासकों और कला संरक्षकों को प्रदर्शित किया गया है। विशेष रूप से सालार जंग तृतीय पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिन्होंने अपना जीवन विश्वभर से दुर्लभ कला वस्तुओं को एकत्र करने और संरक्षित करने में समर्पित कर दिया था।

चित्रों, तेल चित्रों, व्यक्तिगत वस्तुओं, स्मृति चिन्हों और औपचारिक वस्तुओं के माध्यम से यह गैलरी आगंतुकों को परिवार की जीवनशैली, सांस्कृतिक परिवेश और स्थायी विरासत की झलक दिखाएगी। साथ ही हैदराबाद के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करेगी। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रधान सचिव एम.दाना किशोर, नवाब अहमद अली खान, सालार जंग संग्रहालय निदेशक प्रियंका मैरी फ्रांसिस, उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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