विराग बिना मोक्ष संभव नहीं : राजमतीजी
हैदराबाद, संत महात्मा का चातुर्मास हो, दीक्षा का प्रसंग हो, वहाँ पैसे का उपयोग करेंगे, तो उसका ब्याज भी पुण्य के रूप में प्राप्त हो होगा। उक्त उद्गार सिख छावनी स्थित श्री आनंद जैन भवन कोरा में श्री जैन श्रावक संघ कोरा के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा में राजमतीश्रीजी म.सा. राजुल आदि ठाणा-3 ने व्यक्त किये। आज महामंत्री गौतमचंद मुथा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूज्यश्री ने कहा कि भगवान की वाणी सच्चे मन से सुनने से वृत्ति बढ़ती है, रागी विरागी बन जाता है।
म.सा. ने कहा कि विराग बिना मोक्ष होने वाला नहीं है। भाव बदले बिना भव बदलने वाला नहीं है। भाव को मोह, माया, पैसा, शरीर से हटा दो। शरीर को कितना भी खिलाओ पिलाओ यह अपना नहीं है, एक दिन नष्ट होने वाला है। विभाव ही हमें एक दिन प्रभु कल्याण की तरफ ले जाता है। म.सा. ने कहा कि पुण्यवाणी है, तो पैसा मिलेगा। पुण्य से ही लक्ष्मी हाथ में आयेगी। पैसा आते ही धर्म को गुरु को भूल जाते हैं, पर केवल घरवाली को याद करते हैं, क्योंकि वह प्राणों से भी प्यारी तब तक है, जब तक पैसा है, पैसा नहीं तो पत्नी भी नहीं पूछती।
पुण्य, धन और दान का महत्व
पैसा स्वार्थ के लिए कमाना जरूरी है, पर उसका सदुपयोग करना भी जरूरी है। आज के जमाने में पैसे के बिना कदर नहीं होती। पैसा है, तो व्यक्ति लूला लंगडा जैसा भी हो, उसे सभी पसंद करते हैं। म.सा. ने कहा कि पुण्यवानी है, तो पैसा रहेगा, पैसा रहेगा तो मान-सम्मान होगा, लोग पूछेंगे। पैसा है तो किसी अच्छे कार्य के लिए दान करें। पुण्य से मिला सुख, धन, मान-सम्मान और अंत में समाधि भाव मिलता है।
मंच संचालन करते हुए महामंत्री गौतमचंद मुथा ने बताया कि रविवार, 17 अगस्त को राजमतीश्रीजी म.सा. राजुल का 59वाँ जन्मदिन एकसन एवं सामयिक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। अध्यक्ष संजय कटारिया ने सभी से ज्यादा से ज्यादा एकासना करने का आह्वान किया।
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