संवत्सरी पर्व समता एवं एकता का प्रतीक : मंगलज्योतिजी म.सा.
हैदराबाद, पर्युषण पर्व का अंतिम दिन संवत्सरी (क्षमा दिवस) होता है, जिसमें सभी जैन लोग एक-दूसरे से क्षमा माँगते हुए एक-दूसरे को माफ करते हैं। यह सभी के लिए समता और एकता का प्रतीक है। समता का अर्थ है हर स्थिति में मन और भावनाओं को स्थिर रखना, न किसी सुख से बहुत प्रसन्न होना और न ही किसी दुःख से विचलित होना।
उक्त उद्गार अमीरपेट जैन स्थानक में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, अमीरपेट द्वारा आयोजित चातुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते हुए मंगलज्योतिजी म.सा. ने व्यक्त किये। यहाँ अमीरपेट संघ के महामंत्री पंकज रांका द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूज्यश्री ने कहा कि पर्युषण पर्व में समता दिवस सीधे तौर पर कोई विशेष दिन नहीं होता, बल्कि पूरे पर्व में समता (समानता और संतुलन) की भावना पर जोर दिया जाता है। हालाँकि तीसरे दिन को सामायिक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो समता और आंतरिक शांति प्राप्त करने से संबंधित है।
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पर्युषण में साधक समता साधना और उपवास कार्यक्रम
पर्युषण पर्व में साधक समता की साधना करते हैं, जो आत्मा को शुद्ध करने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का मार्ग है। यह आत्मा को शुद्ध करने और कर्म बंधनों को कम करने का सुनहरा अवसर है। अमीरपेट संघ के महामंत्री पंकज रांका ने पूज्य प्रवर्तक पन्नालालजी म.सा. की जन्म जयंती की शुभकामनाएँ देते हुए गुरुदेव के जीवन चरित्र पर भाव व्यक्त किए। नवकार महामंत्र का जाप, एकासन आयंबिल दया पौषध, प्रतिक्रमण आदि धार्मिक क्रियाएँ निरंतर गतिमान हैं।
9 उपवास नगीन कोठारी एवं प्रज्ञा कोठारी के सहजोड़े, 10 उपवास हंसी और खुशी बोहरा, 9 उपवास मोहित पोकरना, 7 उपवास हितेश लोढ़ा, 7 उपवास चिराग नाहर, 7 उपवास गुणवती नाहर के रहे। सभी तपस्वियों की अनुमोदना के साथ स्वाति कोठारी, इशिका, अंजलि, प्रियंका, अशोक तातेड़, फलक कोठारी, नव उन्नति मंडल ने भाव व्यक्त किए। आज की गौतम प्रसादी ज्ञानचंद, लाभचंद, नगीन, नवीन कोठारी परिवार की ओर से रखी गयी।
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