मेडिगड्डा, अन्नाराम और सुंदिला बैराजों को बचाने के लिए वैज्ञानिक प्रयास जारी : उत्तम कुमार रेड्डी
हैदराबाद, सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि कालेश्वरम परियोजना के क्षतिग्रस्त मेडिगड्डा, अन्नाराम और सुंदिला बैराजों को बचाने के लिए व्यवस्थित और वैज्ञानिक प्रयास जारी हैं। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर तेलंगाना सचिवालय में आयोजित बैठक में पुनर्वास कार्यों की प्रगति का आकलन करने केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के साथ समन्वय की समीक्षा की।
मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि बैराजों का जिम्मेदारीपूर्वक जीर्णोद्धार करना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि पिछली बीआरएस सरकार के तहत किए गए भारी सार्वजनिक व्यय को सुरक्षित रखा जा सके और उसका उचित उपयोग किया जा सके। सतर्कता, राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) और न्यायिक आयोग की रिपोर्टों ने व्यवस्थागत विफलताओं और अतार्किक निर्णयों की ओर इशारा किया है, जिसके कारण मेडिगड्डा बैराज ढह गया और अन्नाराम व सुंदिला बैराजों में रिसाव हुआ। राजनीतिक और इंजीनियरिंग दोनों स्तरों पर खामियाँ पायी गयीं। अब सरकार संरचनाओं को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से सुधारात्मक कार्रवाई कर रही है।
सरकार ने स्वतंत्र तकनीकी संस्थानों की सेवाएँ लेने का निर्णय
मंत्री ने बताया कि सिंचाई विभाग के केंद्रीय डिज़ाइन संगठन (सीडीओ) की भी जाँच एजेंसियों द्वारा आलोचना की गई थी, इसलिए सरकार ने स्वतंत्र, उच्च योग्य तकनीकी संस्थानों और सलाहकारों की सेवाएँ लेने का निर्णय लिया। केंद्रीय जल आयोग ने सलाह दी कि डिज़ाइन योग्य और अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जाएँ, जिनकी वे जाँच करेंगे, अनुमोदन करेंगे और कार्यान्वयन के दौरान मार्गदर्शन करेंगे।
मंत्री ने आगे कहा, कई कंपनियों ने प्रतिक्रिया दी है और हम उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनके आईआईटी या भारत सरकार के अन्य तकनीकी निकायों जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) या गठजोड़ हैं। उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद पुणे स्थित भारत सरकार का संगठन केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (सीडब्ल्यूपीआरएस) द्वारा परीक्षण किए जाएँगे।
भू-भौतिकीय और हाइड्रोलिक जाँच सहित ये परीक्षण नुकसान की सीमा निर्धारित करने और पुनर्वास योजना तैयार करने में डिज़ाइन सलाहकारों का मार्गदर्शन करने में मदद करेंगे। वर्तमान में मानसून के दौरान किए गए परीक्षण पूरे हो चुके हैं और नदी का जलस्तर कम होने के 15 से 20 दिनों के भीतर आगे की जाँच शुरू हो जाएगी। मंत्री ने बताया कि शुरुआत में पाँच एजेंसियों को चुना गया था, जिनमें से तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के आधार पर अंतिम चरण के लिए तीन का चयन किया जाएगा।
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एनडीएसए और न्यायिक आयोग ने डिज़ाइन व गुणवत्ता खामियाँ बताईं
चुनी गई फर्मों के पास बाँध सुरक्षा का एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड और प्रतिष्ठित तकनीकी संगठनों के साथ गठजोड़ होना आवश्यक है। चयनित सलाहकार तीनों बैराजों के जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत डिज़ाइन और लागत अनुमान तैयार करने के लिए सीडब्ल्यूपीआरएस डेटा का उपयोग करेंगे। कार्यान्वयन शुरू होने से पहले सलाहकारों द्वारा तैयार डिज़ाइनों की सीडब्ल्यूसी द्वारा जाँच की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि एनडीएसए रिपोर्ट में डिज़ाइन संबंधी खामियों, अपर्याप्त मॉडल अध्ययनों और कार्यान्वयन एवं संचालन के दौरान खामियों को उजागर किया गया है, जबकि न्यायिक आयोग ने वित्तीय अनियमितताओं, खराब गुणवत्ता नियंत्रण, योजना की कमी और जाँच एवं डिज़ाइन में कमियों की ओर इशारा किया है। उन्होंने आगे कहा कि सतर्कता विभाग की रिपोर्ट में निर्माण में लापरवाही और अनियमितताओं के लिए कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
कालेश्वरम के साथ-साथ मंत्री ने कई अन्य सिंचाई मुद्दों की भी समीक्षा की, जिनमें सम्मक्का सरक्का परियोजना, सीताम्मा सागर, सीताराम सागर, मोदीकुंटा वागु, चानका-कोराटा और चिन्ना कालेश्वरम परियोजनाओं के लिए निवेश मंज़ूरियाँ शामिल हैं।
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