उमस में तन और मन के भारीपन को दूर भगाता है शशांक आसन
योग
शशांकासन यानी हेयर पोज एक सरल, लेकिन बेहद लाभकारी योगासन है, खास करके मानसून के दिनों में, जब लगातार बारिश और उमस से मन और तन दोनों भारी रहते हैं। उस समय यह आसन करने से मानसिक शांति और तन की थकान से राहत मिलती है। शशांकासन में जैसा कि इसका नाम है, खरगोश के समान मुद्रा में झुकना पड़ता है।

यह आसन करने के लिए वज्रासन में बैठकर आगे की ओर झुकते हैं तथा माथा जमीन पर टिकाते हैं। इस दौरान हाथ आगे की ओर फैले होते हैं। इससे तनाव और चिड़चिड़ापन दूर होता है। क्योंकि बारिश और धूप के अभाव में निराशा का वातावरण बनता है। मन में तनाव हावी रहता है, ऐसे में शशांकासन मस्तिष्क में अतिरिक्त रूप से रक्तप्रवाह बढ़ाकर मन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। चूंकि बारिश में पाचनतंत्र भी कमजोर हो जाता है।

ऐसे में शशांकासन करने के दौरान पेट पर हल्का-सा बनाया गया दबाव पाचन अंगों को सािढय करता है और इस मौसम में चूंकि अकसर जुकाम या सिरदर्द की समस्या होती है, इससे भी यह आसन माथे और चेहरे में रक्त संचार बढ़ाकर राहत देता है।
शशांकासन से साइनस संबंधी परेशानियां भी दूर होती हैं। साथ ही इसे करने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है। नमी और निपियता के कारण बारिश के दिनों में पीठ में जो अकड़न आ जाती है, उसे यह आसन दूर करता है।
इस आसन के साथ एक अच्छी बात यह है कि अगर आप बारिश के कारण घर से बाहर किसी खुले वातावरण में मसलन, पार्क आदि में न भी जा सकें, तो भी यह आसन आराम से घर में किया जा सकता है। शांति और ध्यान के लिए यह आसन बिल्कुल आदर्श होता है।
शशांकासन करने की विधि

सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं, दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और लंबी-लंबी सांस लें। सांस छोड़ते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं और दोनों हाथ जमीन पर रखें। माथा जमीन से लगाएं, हाथ कंधे की सीध में रहें और सामान्य ढंग से सांस लेते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में बिताएं। फिर धीरे-धीरे वापस वज्रासन मुद्रा में लौट आएं।
शशांकासन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि अगर आपको उच्च रक्तचाप की समस्या हो, पीठ में चोट लगी हो या चक्कर आ रहे हों तो तुरंत आसन रोक दें और अगली बार डॉक्टर या प्रशिक्षक की सलाह के बिना न करें। एक और बात का ध्यान रखें कि कभी भी शशांकासन भोजन के तुरंत बाद न करें। खाली पेट करें या कम से कम भोजन करने के तीन घंटे बाद करें।इसके जरिये पाचन अंगों को संरेखित किया जाता है।

जांघों और घुटनों में इससे रक्तसंचार सक्रिय होता है। शशांकासन करते समय हाथ ऊपर उठाना और सांस लेना महत्वपूर्ण होता है। इससे फेफड़ों में पूरी हवा जाती है और कंधे व पीठ की मांसपेशियां सक्रिय होती है। यह आसन परसिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम को सािढय करती है, जो तनाव घटाकर शांति देती है। शशांकासन दिन में सिर्फ एक बार वह भी सुबह करना चाहिए। इसे करते समय 3 से 5 बार दोहराया जा सकता है और हर बार 10 से 30 सेकंड की अवधि पर्याप्त होती है।
इसके पहले क्या करें और क्या न करें

शशांकासन के पहले वज्रासन या ताड़ासन करना चाहिए। इससे रीढ़ सीधी करने और संतुलन बनाने में मदद मिलती है। इस आसन के पहले गहरी श्वांस लेनी चाहिए ताकि फेफड़ों को तैयार किया जा सके और हल्की वार्मअप स्ट्रैचिंग भी जरूरी है ताकि मांसपेशियों को गर्म किया जा सके। इससे पहले अत्यधिक व्यायाम या कार्डियो भी नहीं करना चाहिए।
घुटनों या रीढ़ में दर्द होने पर जबर्दस्ती जोर नहीं डालना चाहिए। शशांकासन के बाद शवासन या मकरासन किया जा सकता है, इनसे मांसपेशियों को आराम मिलता है। प्राणायाम भी किया जा सकता है, इससे शांति को गहरा करने और तंत्रिका तंत्र को संतुलन करने में मदद मिलती है। यह आसन करने के बाद थोड़ा पानी पीना चाहिए, जिससे कि हाइड्रेशन बना रहे। इस आसन के तुरंत बाद कोई भारी व्यायाम ना करें।

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साथ ही आसन बंद करने पर झटके के साथ न खड़े हों, इससे चक्कर आ सकते हैं। अगर सही तरीके से इस मौसम में शशांकासन किया जाए तो मानसिक शांति मिलती है, स्ट्रेस कम होता है, पाचनतंत्र सुधरता है, मलाशय और आंतों की अच्छे से मालिश होती है, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है, उसमें रक्तप्रवाह बढ़ता है और अंतस्रावी गंथियां विशेषकर पिट्यूटरी ग्लैंड और पीनल ग्लैंड पर असर होता है। इस तरह इस मौसम में शशांकासन बहुत फायदेमंद होता है।
दिव्यज्योति नंदन
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