अन्याय के खिलाफ थे शिवाजी : गहिनीनाथ
हैदराबाद, पंढरपुर देवस्थान विट्ठल रुक्मिणी मंदिर के सह अध्यक्ष ह.भ.प. गहिनीनाथ औसेकर महाराज ने छत्रपति शिवाजी महाराज को समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि छत्रपति किसी धर्म जाति के विरुद्ध नहीं थे, वे अन्याय के विरुद्ध लड़ते रहे।














श्री छत्रपति शिवाजी मराठा नवयुवक मंडल एवं छत्रपति शिवाजी मराठा सांस्कृतिक ट्रस्ट के तत्वावधान में भव्य रूप से मनाए गए छत्रपति शिवाजी महाराज के 396वें जन्मोत्सव पर इमलीबन छत्रपति शिवाजी ब्रिज स्थित शिवाजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर धर्म सभा को संबोधित करते हुए औसेकर महाराज ने कहा कि शिवाजी महाराज न्यायप्रिय थे, जिन्होंने न्याय देते समय कभी अपना-पराया नहीं देखा। उन्होंने कहा कि यदि छत्रपति की दूरदर्शिता, प्रशासनिक दक्षता व सुरक्षा के प्रति सजगता देखनी हो, तो महाराष्ट्र में बने किले देखने पर पता चल जाएगा। उन्होंने कहा छत्रपति की महिलाओं के प्रति आदर भावना, उनके अधिकारों को लेकर सजगता समस्त समाज, विशेषकर भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है।
इतिहास से अवगत कराने का जिम्मा अभिभावकों का
संदीप महाराज व प्रेरणा ताई ने कहा कि जीजामाता ने छत्रपति शिवाजी के भीतर संस्कार कूट-कूट कर भरे, परंतु वर्तमान में माताओं को मंथन करना होगा कि क्या हम अपने बच्चों में संस्कारों के बीज बो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान आधुनिक युग में सोशल मीडिया में व्यस्त युवा पीढ़ी को छत्रपति के स्वाभिमान, विधर्मियों के खिलाफ लड़ने के इतिहास से अवगत कराने का जिम्मा अभिभावकों का है। उन्होंने कहा कि अपने पुत्रों में बहनों व महिलाओं के प्रति आदर भाव के बीज बोएँ, जिस प्रकार जीजामाता ने किया था। उन्होंने कहा कि छत्रपति में पक्षपात व भेदभाव नहीं था, वे न्याय के पक्षधर थे। उन्होंने शहीद भगत सिंह का नाम लेते हुआ कहा कि उनके प्रेरणास्त्रात्र छत्रपति शिवाजी थे, जिस कारण वे स्वतंत्रता संग्राम में पूरी ताकत से लड़ सके।
पूर्व विधायक प्रेम सिंह राठौड़ ने कहा कि म्युनिसिपल चुनाव के समय राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार के दौरान कई स्थानों पर छत्रपति की प्रतिमाओं को देख प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि शिवाजी ब्रिज पर जब छत्रपति की प्रतिमा स्थापित की गई थी, तब काफी मुश्किलें आई थीं, लेकिन छत्रपति शिवाजी मराठा नवयुवक मंडल ने प्रतिमा स्थापित की। उसके बाद जागरूकता आने से कई स्थानों पर ऐसी प्रतिमा स्थापित कर हर साल छत्रपति का जन्मोत्सव भव्य रूप से मनाया जाने लगा, जिसका श्रेय मंडल को जाता है।
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छत्रपति की शोभायात्रा से वातावरण बना आध्यात्मिक
जय शिवराय व जय श्रीराम के नारों के साथ धूमधाम से निकाली गई छत्रपति की शोभायात्रा से सारा वातावरण आध्यात्मिक बन गया। पुरानापुल शिवद्वार पर माता भवानी का पूजन कर गाजे-बाजे व ढोल-नगाड़ों की धुन पर नृत्य करते भक्तों के साथ प्रारंभ शोभायात्रा में रथ पर उपस्थित गहिनीनाथ औसेकर महाराज का आशीर्वाद लेने भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। शोभायात्रा में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमाओं के साथ ही विट्ठल-रुक्मिणी की आकर्षक प्रतिमा व पारंपरिक परिधानों में भजन करती महिलाओं ने आध्यात्मिकता का परिचय दिया।
शोभायात्रा पुरानापुल गांधी प्रतिमा, जुम्मेरात बाजार, चूड़ी बाजार, बेगम बाजार छतरी, सिद्दिअंबर बाजार, गौलीगुड़ा शंकरशेर होटल, बड़े मियाँ पेट्रोल पम्प से होकर शिवाजी ब्रिज स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के समीप शाम को धर्मसभा में परिवर्तित हुई। शोभायात्रा का मार्ग में मंच स्थापित कर विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया।
शोभायात्रा में छत्रपति शिवाजी मराठा नवयुवक मंडल के अध्यक्ष मदन जाधव, महासचिव विश्वनाथ मोरे, सांस्कृतिक ट्रस्ट के महासचिव दिलीप जगताप, तेलंगाना मराठा मंडल के अध्यक्ष प्रकाश पाटिल, निवास निकम, नवयुवक मंडल नगर अध्यक्ष के. गजानन देशमुख, विनोद शिंदे, पवन शिंदे, रितेश चिंचोली, रितेश जाधव, राम शेरीकर, सह संयोजक लक्ष्मण राव जाधव, सलाहकार मारुति राव जगताप, भास्कर कोकाटे, भगिनी मंडल की अरुणाबाई शिंदे, ज्योति शिंदे, रजनी मोहिते, हरीशचंद्र कोनाले, अशोक पवार, नवीन भोंसले, रमेश भोंसले, अशोक पांढ़रे, मारुति राव गायकवाड़, दगडु यादव (रघु), विलास राव जाधव, नामदेव राव जाधव, दत्ता भालके, दयानंद गोवे, विश्वनाथ वाड़ीकर, सुधाकर बिरादार, राजेंद्र बिरादार, भास्कर कोकाटे, अचिंत जाधव, संतोष जाधव, कुलदीप जाधव, आनंद पाटिल, नामदेव राव जाधव, निवर्तमान पार्षद पी. लाल सिंह, सुदर्शन सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।
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