अचल होते हैं सिद्ध परमात्मा : सुमंगलप्रभाजी

हैदराबाद, सिकंदराबाद स्थित मारुति विधि जैन स्थानक में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिकंदराबाद द्वारा आयोजित चातुर्मासिक धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा. ने कहा कि सिद्ध परमात्मा अचल होते हैं। सिद्ध भगवान की स्तुति करने से आत्मा के शुद्ध स्वरूप को प्रकट करने के लिए जीव प्रवृत्त होता है। दुनिया के लोग ईश्वर का जो स्वरूप कल्पित करते हैं, वह वास्तव में सही नहीं है। जो जीव हमें दिखाई देते हैं जैसे चूहा, गाय, मनुष्य आदि वे गोचर हैं अर्थात जो इंद्रियों से जाने जाएँ, वे गोचर और जो इंद्रियों से न जाने जाएँ, वे अगोचर हैं।

सिद्ध भगवान इंद्रियों से नहीं जाने जा सकते हैं, अत: अगोचर हैं। साध्वीजी ने आगे कहा कि जैन लोग ईश्वर के प्रचलित स्वरूप को नहीं मानते हैं, इसलिए वे नास्तिक हैं। ऐसा ईश्वरवादी कहते हैं, परन्तु जैन को नास्तिक कैसे मानें? जो शुभ कर्म के शुभफल, अशुभ कर्म के अशुभ फल, आत्मा त्रिकालिक, अस्तित्व, आत्मा के परभव गमन आदि को मानता है, वह आस्तिक है, नास्तिक नहीं। इसलिए जैन भी आस्तिक है। सिद्ध परमात्मा सब कर्मों से मुक्त हैं, अत: वे अमर है। कर्म तो मैल के समान है।

कर्म की अशुद्धि से मुक्ति ही जीव की सिद्धि का मार्ग है

कर्म से मैला जीव संसार में परिभ्रमण करता है। जीव के लिए कर्म अशुद्धि है। कर्म मैल से मुक्त जीव शुद्ध हो जाता है- सिद्ध हो जाता है। अनादि से जो कर्म की भटकन चल रही थी, उस पर पूर्ण विराम लग जाता है। लोक स्वभाव से वह लोक शिखर पर सदा के लिए स्थित हो जाता है। आज से साध्वी भगवंत ने श्रीपाल चारित्र वाचन की आराधना प्रारंभ की। सभा का संचालन करते हुए संघ के अभिषेक अलिजार ने बताया कि 5 घंटे का जाप सुचारू रूप से चल रहा है, जिसकी प्रभावना श्री अरिहंत नवयुवक मंडल की ओर से प्रदान की गई।

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ओमप्रकाश बडगुजर और प्रदीप सोलंकी ने 9 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। महामंत्री सुरेन्द्र कटारिया ने बताया कि बाल संस्कार शिविर दोपहर 12 से 3 बजे तक निरंतर जारी है जिसमें लगभग 60 बच्चों ने भाग लिया। संघ की ओर से अल्पाहार की व्यवस्था करने के साथ-साथ प्रभावना दी गई। अध्यक्ष गौतमचंद गुगलिया ने बताया कि श्रीपाल चारित्र का वाचन प्रारंभ हो चुका है। आयंबिल व नीवी तप लाभार्थी परिवार स्व. जेठी बाई व स्व. सायरचंद गांधी के दिव्याशीष से स्व. इंदिरा देवी धर्म पत्नी उगमचंद गांधी की पुण्य स्मृति में उगमचंद, मनमोहनचंद, नितेश, अभय, राकेश, अजय देव गांधी परिवार हैं।

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