एकल न्यायाधीश के आदेश रद्द
हैदराबाद, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार यादाद्रि भुवनगिरी जिले के मोत्कूर सर्वे नंबर 859, 860 में कीमती 4 एकड़ जमीन किसी भी तरह से प्राइवेट पार्टियों को ट्रांसफर न करें। राजस्व विभाग के प्रधान सचिव, जिलाधीश और मोत्कूर म्युनिसिपल कमिश्नर ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में हॉस्टल, स्कूल भवन, खेल के मैदान और दूसरी सुविधाओं के निर्माण के लिए जमीन इस्तेमाल करने के आदेश जारी किए हैं।
ए. रवि कुमार और आर. निक्समय्या ने एक मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम बनाने के लिए 6 एकड़ जमीन दान की थी। वर्ष 2005 में यह जमीन नलगोंडा जिला खेल विकास प्राधिकरण को स्थानांतरित कर दी गई थी। लेकिन, स्टेडियम का निर्माण शुरू नहीं हुआ और इसमें से 2 एकड़ जमीन पर कस्तूरबा स्कूल का निर्माण किया गया। उन्होंने बाकी जमीन वापस करने के लिए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की।
बालिकाओं के हित में हाईकोर्ट का फैसला, निजी कब्जे पर रोक
सुनवाई करने वाले एकल न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि बाकी 4 एकड़ जमीन वर्ष 2024 में सौंप दी जानी चाहिए, क्योंकि स्टेडियम का निर्माण कार्य सालों से शुरू नहीं हुआ है। इसे चुनौती देते हुए, सरकार के साथ एक और जनहित याचिका दायर की गई। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।
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दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि अगर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में हॉस्टल, स्कूल भवन और प्लेग्राउंड के लिए जमीन दी जाती है, तो उनका इस्तेमाल एससी, एसटी, ओबीसी और बीपीएल परिवारों की लड़कियों के लिए किया जाएगा। खंडपीठ ने अधिकारियों से स्पष्ट कह दिया कि प्राइवेट लोगों को कब्जा करने से रोकने के लिए इसके चारों ओर बाड़ लगाई जानी चाहिए। एकल न्यायाधीश के आदेश रद्द कर दिए गए। जनहित याचिका के साथ अपील भी मंजूर कर ली गई।
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