(जन्म दिवस)
श्रमण संघीय महासाध्वी प्रवचन रत्नाकर प्रज्ञा ज्योति संबोधि कुशल दक्षिण चंद्रिका प.पू.श्री सुधाकंवर म.सा. का जन्म मध्यप्रदेश के सिंगोली नगर में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में पाम संवत् 2012 को हुआ। इनके पिता वसंतीलाल और वीरमाता अनुप बाई मेहता थीं।
सुधाकंवर म.सा. ने पंद्रह वर्ष की उम्र में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पाम संवत् 2028 को सिगोली नगर में प्रवर्तक प.पू.श्री मोहनलाल म.सा के मुखारविंद से संयम ग्रहण किया और शासन प्रभाविका राजस्थान प्रवर्तनी गुरूवर्या प.पू.श्री यशकंवर म.सा.के सान्निध्य में अध्ययन किया।
इनका प्रथम चातुर्मास गुरूणी पूज्य श्रीयशकंवर म.सा.के जन्मग्राम जाट नगर में संपन्न हुआ। इन्होंने अब तक 54 चातुर्मास संपन्न किए। इनमें सिद्धांताचार्य, तत्वज्ञानी, बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी, स्नेह प्रतिमूर्ति, वाणी माधुर्य और चारित्र्य त्रिवेणी, कवि हृदय, मृदुल व्यवहार, जिन शासन गौरव, स्वस्थ विचार, उदार चिंतन, भावनाशील हृदय आदि मानवतावादी दृष्टिकोण की स्पष्ट झलक मिलती है।
यह भी पढ़े : जो भाव से आए उसे प्रेम दें : जयश्रीजी म.सा.
इनकी वाणी में अद्भुत जादू है, जो किसी को भी आकर्षित करती है। इनमें युवावर्ग को धर्म की ओर उन्मुख करने की अपार क्षमता है। शील सुवास, गुण श्री चरित्र, प्रीति पथ, आस्था के स्वर, यश बत्तीस, सांस-सांस सुमिरन करो, श्रद्धा शतक, पढमं नाणं, कांटो में खिले फूल, यश सुधा कलश, अहिंसा धर्म उद्गगाता और श्री यश गौरव गाथा (सचित्र) जीवन ग्रंथ, साधना के शिखर पुरूष गुरू वेणी अन्य पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।
