Marwari poem
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कविता
व़कत बी कैसा पल्टी खाराए
व़कत भी1 कैसा पल्टी खाराए, किस्कू बोले सरक्त2 नइँ है।नइँ होना सो होते जाराए, किस्कू बोले सरका नइँ है।। म्हेनत…
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व़कत भी1 कैसा पल्टी खाराए, किस्कू बोले सरक्त2 नइँ है।नइँ होना सो होते जाराए, किस्कू बोले सरका नइँ है।। म्हेनत…
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