तेलंगाना उच्च न्यायालय में चार अहम मामलों की सुनवाई दिए महत्वपूर्ण आदेश

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय में शुक्रवार को चार अलग-अलग मामलों पर सुनवाई हुई, जिनमें शिक्षा संस्थानों की अपील, पेंशन विवाद, पुलिस प्रतिवाद में देरी और राकिया अवमानना याचिका जैसे मुद्दों पर अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं और आदेश जारी किए।

कॉलेजों की अपील पर न्यायालय की टिप्पणी

फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ तेलंगाना हायर इंस्टीट्यूशंस (फाती) की याचिका पर उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार से शुल्क प्रतिपूर्ति बकाया वसूलने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति पर बैठक आयोजित करने की अपील में कुछ भी गलत नहीं है। अदालत ने शहर के पुलिस आयुक्त को एलबी स्टेडियम या पर्वतपुर स्थित अरोड़ा परिसर में जनसभा आयोजित करने के लिए दायर आवेदन पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया।
महासंघ ने याचिका में कहा कि सरकार द्वारा 10 हजार करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति बकाया राशि समय पर न चुकाने से 2,200 कॉलेज प्रभावित हो रहे हैं। न्यायमूर्ति एन.वी. श्रवण कुमार ने मामले की सुनवाई के बाद आदेश जारी किया।

पेंशन विवाद में आठ सप्ताह का निर्देश

दूसरे मामले में न्यायमूर्ति नामवरपु राजेश्वर राव ने सरकार को 80 वर्षीय पूर्व सहायक सिविल सर्जन डॉ. एम. सुरेश कुमार के पेंशन आवेदन का आठ सप्ताह के भीतर समाधान करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने भ्रष्टाचार मामले में निर्दोष घोषित किए जाने के बावजूद पेंशन और ग्रेच्युटी न मिलने पर यह याचिका दायर की थी। अदालत ने दो सप्ताह में नई याचिका दाखिल करने और विभाग को समयसीमा में निर्णय देने का निर्देश दिया।

प्रतिवाद में देरी पर अदालत की नाराजगी

तीसरे मामले में उच्च न्यायालय ने केपीएचबी पुलिस के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई, जिसने दिसंबर 2023 में दर्ज एक थर्ड-डिग्री टॉर्चर याचिका पर अब तक कोई प्रतिवाद दाखिल नहीं किया था। न्यायमूर्ति एन.वी. श्रवण कुमार ने कहा कि इस तरह की देरी अस्वीकार्य है और पुलिस को दो सप्ताह के भीतर प्रतिवाद दाखिल करने का आदेश दिया। यह याचिका बैंक कर्मचारी एम. प्रणीत ने दर्ज कराई थी।

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राकिया अवमानना याचिका खारिज

चौथे मामले में उच्च न्यायालय ने रास अल खैमाह निवेश प्राधिकरण (राकिया) द्वारा इक्वेस्ट एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद और अन्य के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी मुद्दों को वाणिज्यिक न्यायालय में ही उठाया जाए। यह मामला वैनपिक परियोजना से संबंधित लगभग 600 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़ा था।

इन चारों मामलों में अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार और संबंधित विभागों को समयसीमा का पालन करना चाहिए ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

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