तेलंगाना उच्च न्यायालय ने हैद्रा आयुक्त को लगाई फटकार
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने संक्रांति पर्व के दौरान अंबरपेट के बतुकम्माकुंटा झील पर हुए कार्यक्रम के दौरान हैद्रा आयुक्त ए.वी. रंगनाथ के बर्ताव पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने इस बात पर गहरा गुस्सा जताया कि रंगनाथ के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला लम्बित रहने के बावजूद यह कार्यक्रम किया गया।
आयुक्त के खिलाफ अदालत में अवमानना की याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप है कि रंगनाथ ने बतुकम्माकुंटा झील के पुनरुत्थान कार्य को लेकर उच्च न्यायालय के पिछले स्थगनादेश का उल्लंघन किया। इस मामले में हैद्रा आयुक्त रंगनाथ गत 5 दिसंबर, 2025 को उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए और बिनाशर्त माफी माँगी। अदालत की अवमानना का मामला लम्बित होने के बावजूद उच्च न्यायालय ने आयुक्त को संक्रांति पर्व से एक दिन पूर्व पुनरुत्थान के लिए बतुकम्मा कुंटा झील के पास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए गंभीर रूप से दोषी पाया।
समाचार-पत्रों में प्रकाशित समाचार के अनुसार कार्यक्रम में शामिल हुए रंगनाथ ने लोगों को संबोधित किया और जिम, शौचालय और दूसरी सुविधाओं के साथ इलाके का और विकास करने का आश्वासन दिया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस बी.आर. मधुसूदन राव की खण्डपीठ ने शुक्रवार को इस मामले पर विस्तार से सुनवाई की। खण्डपीठ ने सवाल किया कि जिस व्यक्ति पर आरोप है, वह अदालत के अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्थल पर कैसे जा सकता है।
खंडपीठ ने आयुक्त रंगनाथ के अधिकार पर उठाए सवाल
खण्डपीठ ने सवाल किया कि रंगनाथ को कार्यक्रम करने और भाषण देने का क्या अधिकार था। खण्डपीठ ने याद दिलाया कि अदालत की अवमानना के मामले में आयुक्त की जाँच करनी है या उन्हें सजा देनी है, यह मामला अभी भी अदालत में लम्बित है। खण्डपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या वे (न्यायाधीश) या हम में से कोई भी अखबारों को इंटरव्यू देकर उन्हें बता सकता है कि मामले में क्या हो रहा है।
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने हैद्रा आयुक्त के भाषण का कंटेंट पेन ड्राइव के जरिए अदालत को सौंपा। खण्डपीठ ने कहा कि हैद्रा आयुक्त का व्यवहार चिंता का विषय है और याद दिलाया कि हैद्रा आयुक्त पहले भी अदालत आए थे और बिनाशर्त माफी माँगते हुए कहा था कि उन्हें अदालत की अवमानना की कार्यवाही के बारे में पता था। खण्डपीठ ने इस बात में गलती पाई कि हैद्रा आयुक्त जिन्होंने माफी माँगी थी, ने अपना व्यवहार नहीं बदला है। सरकारी अधिवक्ता के बार-बार कहने पर हैद्रा आयुक्त को प्रतियाचिका दायर करने की मंजूरी दी गई। खण्डपीठ ने प्रतिवादियों को 30 जनवरी तक प्रतियाचिका दायर करने के आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी तक टाल दी।
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