तालियाँ गूँज उठीं


एक लड़की उदास बैठी थी, तभी वहां से एक संत जी निकले। वे लड़की को उदास देखकर उसके पास रुके और पूछा -बेटी तुम इतनी उदास क्यों बैठी हो? लड़की कुछ न बोली। तब संत जी ने काफी जोर देकर पूछा तो वह लड़की फूट पड़ी और कहा -सब मुझे काली-काली! बदसूरत-बदसूरत! कह कर चिढ़ाते रहते हैं और मुझे कोई प्यार नहीं करता। कोई बच्चा मुझे अपने साथ नहीं खिलाता? कोई मुझे गेम में इनाम नहीं देता? संत जी ने उसके सिर पर स्नेह से हाथ फेर कर कहा-बेटी तुम्हारी सारी समस्याओं का हल चुटकियों में हो सकता है।

कैसे-कैसे। अपनी बड़ी-बड़ी आंखें हैरत से नचाकर लड़की बोली। पढ़ाई से। संत जी मधुर स्वर में बोले। पढ़ाई तो मैं करती हूं। खूब करती हूं और हर साल पास भी हो जाती हूं। सिर्फ पास होने से काम न चलेगा। तुम्हारी पढ़ाई ऐसी हो, जिससे देश-विदेश तक तुम्हारा नाम रोशन हो। लोग तुम्हारे पास आएं, पढ़ाई के टिप्स पूछने। कामयाबी के टिप्स पूछने। तुम इतने अच्छे नंबर लाओ कि पत्रकारों का रेला लग जाए तुम्हारे आस-पास, फिर देखना, कौन तुम्हें प्यार नहीं करता? कौन सम्मान तुम्हारा नहीं करता? फिर कौन तुम्हें बदसूरत कहेगा? सबकी आंखों का नूर बन जाओगी..नूर।

पर उसके लिए तो मुझे महंगी कोंचिग ज्वाइन करनी पड़ेगी। तभी मैं कुछ बड़ा कर सकती हूँ। ऐसा कुछ नहीं है बेटा। स्वामी विवेकानंद, डॉ. भीमराव अंबेडकर, अब्राहम लिंकन, सरोजिनी नायडू, महादेवी वर्मा, सुभाष चंद्र बोस जैसे अनेक महान लोग हुए हैं, जिन्होंने अपने स्वाध्याय से, अपने गुरुजनों से मार्गदर्शन और प्रेरणा प्राप्त करते हुए समाज में उच्च स्थान बनाया, क्या यह सब किसी कोचिंग में पढ़ने गए थे? लड़की ने सिर हिलाकर ना कहा।

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पढ़ाई से मिली पहचान, पिंकी बनी सबकी शान

संत जी चले गए, उनकी सलाह-मशविरा को लड़की ने गांठ बांध ली। उसने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना शुरू किया, अब उसे सिर्फ एक ही चिंता रहती थी पढ़ाई की, एक ही लगन पढ़ाई, एक ही दिलचस्पी पढ़ाई। आखिरकार एक दिन उसकी मेहनत का ईश्वर ने उसे सुफल दिया। उसने प्रदेश की हाई स्कूल की परीक्षा में टॉप कर दिया। सब अखबारों में उसके खूब चित्र छपे, टीवी चैनल्स में उसकी खूब चर्चा होने लगी। उसके पूरे शहर में, उसके नाम से हलचल मच गई, जिसे देखो वही उसके नाम की माला जप रहा था।

उसके स्कूल की चर्चा, उसके नाम से होने लगी। स्कूल में उसे खूब सम्मानित किया गया। जहां लोग उसके साथ बैठना पसंद नहीं करते थे, अब वही लोग उसके साथ सेल्फी ले रहे थे, स्कूल के अध्यापक-अध्यापिकाएं सब उस पर अपार स्नेह लुटा रहे थे, हृदय से लगाकर वात्सल्यमई प्रेम से, उसे अभिभूत कर रहे थे। जनपद की लगभग सभी संस्थाओं ने उसे सम्मानित किया। कुछ दिन बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने, उसे प्रतिभाशाली बच्चों के साथ सम्मानित करने के लिए एक बड़े मंच पर सादर आमंत्रित किया। वह विशाल मंच पर मुख्यमंत्री से सम्मान पाकर बहुत खुश थी।

उसके सम्मानित होने का लाइव प्रसारण, उसके मम्मी-पापा टीवी पर देख रहे थे, बेटी को मुख्यमंत्री के हाथों से सम्मानित होते हुए देखना उनके लिए बड़े गौरव, हर्ष तथा परमानंद सुख के जैसा था। उसके मम्मी-पापा फूले नहीं समा रहे थे। संचालक ने मंच से उसे, दो शब्द बोलने के लिए डाइज़ से आवाज दी। उसने बोलना शुरू किया-आज इस बड़े मंच पर सम्मानित होकर मुझे बड़ी खुशी मिल रही है, यह सब मेरे मित्रों और सहपाठियों का प्रोत्साहन है। उनका स्नेह है। टीवी के आगे उसका सम्मान समारोह देख रहे, उसके सहपाठी एक-दूसरे का हैरत से मुंह ताक रहे थे।

पिंकी के ओजस्वी विचारों से गूंजी तालियों की सभा

कहां वह सब पिंकी को अपमानित और जलील करने का कोई मौका न छोड़ते थे, आज वही पिंकी उनकी प्रशंसा के सेतु पर सेतु बांधे जा रही थी। पिंकी अपनी रौ में बोल रही थी-मेरा बस यही आप लोगों से कहना है, आज इस चमक-दमक भरे जीवन में, नित बदलती आज की दुनिया में, अगर हम कुछ खो रहे हैं तो वह है इंसानियत, प्रेम, भाईचारा। हमें सबसे मिलजुल कर रहना चाहिए। किसी से किसी प्रकार का बैर या भेदभाव नहीं होना चाहिए। जातिभेद, लिंगभेद और रंगभेद जैसी कुरीतियों से हमें आजाद होकर एक सुंदर स्वस्थ भारत का निर्माण करना है।

संसार के समस्त प्राणियों की रचना ईश्वर ने की है। हमें उसकी रचना का सम्मान करना चाहिए और किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। किसी के साथ हिंसा नहीं करनी चाहिए। उसके ओजस्वी विचारों को सुनकर सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। तो देखा बच्चों, किस तरह मेहनत व लगन से पढ़ाई करके पिंकी ने वह सब कुछ पा लिया जिसके लिए कभी वह तरस रही थी। कभी उसे दुख था कि कोई उसकी कद्र नहीं कर रहा, बात नहीं कर रहा, फिर एक दिन ऐसा आया जब हर कोई उससे बात करना चाहता था। मेहनत व लगन से पढ़ाई करके आप सब भी ऐसा कर सकते हैं।

सुरेश सौरभ

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