उत्तर-पूर्व भारत में विस्तार के लिए ग्रेस कैंसर फ़ाउंडेशन ने किया मेघालय सरकार के साथ करार

हैदराबाद/शिलांग,  
हैदराबाद स्थित गैर-सरकारी संगठन ग्रेस कैंसर फ़ाउंडेशन ने मेघालय सरकार के साथ एक करार पर हस्ताक्षर करते हुए भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में कैंसर जागरूकता और स्क्रीनिंग पहलों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

प्रसिद्ध सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. चिन्नाबाबू सुनकवल्ली द्वारा स्तापित ग्रेस कैंसर फ़ाउंडेशन ने विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर घोषणा की कि इस करार के तहत फरवरी 2026 से मेघालय और त्रिपुरा में निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। फ़ाउंडेशन पिछले 12 वर्षों से कैंसर जागरूकता, प्रारंभिक पहचान और रोगी सहायता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। यह विस्तार तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की उस अपील के बाद किया गया है, जो उन्होंने जीसीएफ के 11वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान की थी। राज्यपाल ने संगठन से अपनी सेवाएँ उत्तर-पूर्वी राज्यों तक बढ़ाने का आग्रह किया था और स्वास्थ्य सेवाओं में करुणा के महत्व पर ज़ोर दिया था। राज्यपाल ने सहानुभूति-आधारित स्वास्थ्य पहलों की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा था कि हम 3जी, 4जी और अब 5जी की बात करते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ‘जी’ गुडनेस (भलाई) की बात करनी चाहिए। राज्यपाल की इस परिकल्पना के अनुरूप, अब फाउंडेशन ने सेवाएँ मेघालय तक ले जा रहे हैं, ताकि गुणवत्ता-युक्त कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता वंचित समुदायों तक पहुँच सके।

डॉ. चिन्नाबाबू ने बताया कि विश्व कैंसर दिवस तथा शिलांग में आयोजित द्वितीय मेघालय कैंसर कॉन्क्लेव 2026 के अवसर पर जीसीएफ वे मॉडल के तहत स्क्रीनिंग की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। फ़ाउंडेशन की स्थापना जरूरतमंदों को उपचार (क्यूर), देखभाल (केयर) और करुणा  प्रदान कर कैंसर के बोझ को कम करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 2025 में ग्रेस कैंसर फ़ाउंडेशन ने 61,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की, जिससे 1,000 से अधिक मामलों में कैंसर की प्रारंभिक पहचान संभव हुई। वर्ष 2026 में फ़ाउंडेशन का लक्ष्य अपने कार्यक्रमों के तहत एक लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग करना है।

डॉ. सुनकवल्ली ने यह कहा कि समय के साथ यह मिशन एक समग्र स्वास्थ्य आंदोलन में बदल गया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा, प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार, पुनर्वास और अत्याधुनिक अनुसंधान के माध्यम से कैंसर से मुक्ति की दिशा में कार्य करना है। पिछले 12 वर्षों में ग्रेस कैंसर फ़ाउंडेशन ने 130 देशों में लगभग 1.4 करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

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