बदल गया टपकू बादल (बाल कथा)

बहुत समय पहले की बात है, जब धरती इतनी गर्म नहीं होती थी और आकाश में बादल आराम से तैरते थे। उन्हीं बादलों में से सात खास बादल थे -गोलू, भोलू, झोलू, मटकु, नटखट, फुसफुस और सबसे छोटा, सबसे चंचल – टपकू। टपकू का नाम टपकू इसलिए पड़ा, क्योंकि वह कभी सही समय पर नहीं बरसता था। जहाँ सब बादल खेतों की प्यास बुझाने, तालाब भरने या पेड़-पौधों को नहलाने जाते, वहीं टपकू अचानक किसी की छतरी, खिड़की या तकिये पर टपक पड़ता। उसकी शरारतों से बच्चे हँसते भी थे और परेशान भी हो जाते थे।

एक दिन सूरज मामा ने सभी बादलों को अपने पास बुलाया और कहा, बच्चों, अब धरती पर बहुत गर्मी है। खेत सूख रहे हैं, तालाब खाली हैं और जानवर प्यासे हैं। अब तुम सबको वहां बरसने के लिए जाना होगा। सब बादलों ने अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी ले ली। सबसे पहले गोलू गया पहाड़ों की ओर, भोलू चला दक्षिण भारत की तरफ, झोलू उड़ गया रेगिस्तान की तरफ, तो मटकु और नटखट बड़े शहरों के पास गए, फुसफुस झीलों और जंगलों में बारिश करने चल पड़ा।

अब बारी थी टपकू की। सूरज मामा ने पूछा, और तुम, टपकू? टपकू मुस्कराकर बोला, मैं उस गाँव में जाऊँगा जहाँ बच्चे मुझे बहुत याद करते हैं! टपकू की टप-टप बारिश टपकू झूमता-गाता गाँव की ओर चला। नीचे धूल उड़ रही थी, बच्चे पसीने से तर थे, बकरियाँ चुपचाप बैठी थीं। टपकू ने सोचा, अब मज़ा आएगा! और वह एक घर की छत पर टपक पड़ा – टप! टप! टप! एक बच्चा चिल्लाया, अरे! टपकू आ गया! सब बच्चे दौड़कर बाहर आ गए।

जब बारिश बनी परेशानी – टपकू की पहली सीख

टपकू ने उनके ऊपर बूँदें टपकाईं, कभी तेज, कभी धीरे। बच्चे नाचे, गाए, लेकिन तभी टपकू फिर उड़ गया। सब बोले, अरे, रुक जा ना! ये क्या बारिश हुई? टपकू हँसता रहा, बस हल्की-फुल्की बारिश है, मज़ा लो! दूसरे दिन गाँव की एक बच्ची मीरा स्कूल जा रही थी। उसके पास छाता नहीं था।

तभी टपकू ने उसकी कॉपी पर बारिश की बूँदें टपका दीं। स्याही फैल गई, पन्ने भीग गए। मीरा रोती हुई बोली, टपकू भैया, तुम तो सबकी मदद करते हो, लेकिन मेरी कॉपी खराब कर दी। क्या बारिश का यही काम है?
टपकू एकदम चुप हो गया।

पहली बार किसी ने उसकी बारिश से दुखी होकर बात की थी। वह ऊपर उड़ गया और सोचने लगा, क्या मैं सिर्फ शरारतों के लिए हूँ? क्या बारिश सिर्फ खेलने की चीज़ है? टपकू अपने बड़े भाइयों गोलू और भोलू के पास गया और सारी बात बताई। भोलू ने प्यार से कहा, देखो टपकू, बच्चों को हँसाना अच्छा है, लेकिन अगर कोई दुखी हो जाए तो सोचना पड़ता है। बारिश सिर्फ मस्ती नहीं, जिम्मेदारी भी है।

यह भी पढ़े: चिंपू बंदर को मिला सबक (बाल कथा)

टपकू की मस्ती और समय के साथ बदलाव

गोलू ने थपकी दी, अगर तुम चाहो, तो तुम भी पक्के बादल बन सकते हो। खेतों को पानी दो, तालाब भरो, जानवरों की प्यास बुझाओ। टपकू ने सिर हिलाया, हाँ भैया, अब मैं जिम्मेदारी निभाऊँगा! अगले दिन आकाश में टपकू कुछ बदला-बदला सा दिखा। वह और मोटा हो गया था, उसकी गरज तेज हो रही थी और वह सीधा गाँव की ओर बढ़ रहा था। बच्चों ने देखा, अरे! टपकू फिर आया है! लेकिन इस बार वह झमाझम बरसा! चारों ओर पानी ही पानी – खेत हरे हो गए, बगीचे महक उठे, तालाब भर गए और बच्चों ने कागज़ की नावें तैराईं।

मीरा ने छतरी लेकर आसमान की ओर देखा और मुस्कराकर बोली, अब टपकू भैया नहीं, झमाझम राजा आ गए हैं! अब गाँव के बच्चे उसे टपकू बादल नहीं कहते थे। उन्होंने उसका नया नाम रखा – झमाझम टपकू। और टपकू? वह अब भी हँसता, खेलता, पर जब भी धरती प्यासी होती – वह सबसे पहले आ जाता। तो बच्चों, देखा आपने कि किस तरह टपकू समय रहते बदल गया और उसने अपनी जिम्मेदारी समझ ली। मस्ती करना अच्छा होता है, लेकिन जब किसी को ज़रूरत हो तो जिम्मेदारी निभाना सबसे बड़ा काम होता है।

-डॉ. सत्यवान सौरभ

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button