पर्यावरण की आवश्यकता है वर्षावन

(विश्व वर्षावन दिवस)

वर्षावन उन वनों को कहते हैं, जो अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में होते हैं। इनके महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता, क्योंकि यह हैं तो पृथ्वी पर जीवन है। ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) वर्षावन कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच में पाये जाते हैं। इनमें प्रतिवर्ष 175-200 सेंटी मीटर बारिश होती है।

इन वर्षावनों पर खतरा मंडरा रहा है। इसलिए इनके क्षेत्रफल में निरंतर कमी आ रही है। इनके नष्ट होने से सुंदर क्षेत्र बर्बाद होने के साथ ग्लोबल क्लाइमेट पर असर पड़ने से पृथ्वी ग्रह से अधिकतर पौधों व पशुओं की प्रजातियां गायब हो जाएंगी।अत वर्षावन को बचाना आवश्यक है। इसी ज़रूरत पर बल देने व जागृति फैलाने के लिए हर साल 22 जून को वर्षावन दिवस मनाया जाता है, एक विशेष थीम के साथ।

वर्ष 2025 के लिए वर्षावन दिवस की थीम है-फारेस्टस एंड फ़ूड (वन और भोजन)।
भारत में वनों का बहुत गहरा ताल्लुक संस्कृति, अर्थव्यवस्था व जैवविविधता से है। इसलिए इनकी सुरक्षा पर्यावरण की आवश्यकता है और यह एक मौलिक ज़िम्मेदारी भी है।

वर्षावन में ऊंचे-ऊंचे पेड़ होते हैं, जो हमेशा हरेभरे रहते हैं। इन क्षेत्रों में बहुत अधिक बारिश होती है। वर्षावन पृथ्वी के सबसे पुराने जीवित इकोसिस्टम हैं। कुछ तो कम से कम 60 मिलियन वर्षों पुराने हैं। संसार में पांच सबसे बड़े वर्षावन हैं- अमेज़न रेनफॉरेस्ट, कांगो बेसिन, न्यू गिनी रेनफॉरेस्ट, बोर्नेओ लोलैंड फॉरेस्ट और वाल्डिवियन टेम्परेट रेनफॉरेस्ट।

वर्षावन क्यों ज़रूरी हैं और इन्हें बचाना क्यों जरूरी है?

वर्षावन पृथ्वी के लगभग 6 प्रतिशत क्षेत्र में हैं। यह संसार के ज्ञात पौधों व पशु-प्रजातियों की आधे से अधिक के लिए घर हैं। वातावरण को ठंडा रखने में वर्षावन ही मदद करते हैं। अमेज़न को पृथ्वी का एयर कंडीशनर माना जाता है। यह फोटोसिंथेसिस के ज़रिये वातावरण से कार्बन को खींचता है और लगभग 20 प्रतिशत ऑक्सीजन का योगदान करता है। गौरतलब है कि अमेज़न दुनिया का सबसे बड़ा वर्षावन है। यह 2,300,000 वर्ग मील में फैला है।

अगर अमेजन देश होता तो यह संसार का सातवां सबसे बड़ा राष्ट्र होता। वर्षावनों की बायोडाइवर्सिटी अविश्वसनीय है। इनमें हर समय नई प्रजातियों की खोज होती रहती है। जिन प्रजातियों पर लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है, उन्हें भी वर्षावनों में पाया जा सकता है, जैसे- टाइगर, जावन राइनो, गोरिल्ला, आरंगुटान आदि। वर्षावनों के लिए वनों की कटाई प्रमुख खतरा है। कई कारणों के चलते मूल अमेजन का लगभग 13.2 प्रतिशत हिस्सा लुप्त हो गया है।

वर्षावनों की कटाई पर रोक लगाना आवश्यक है। घरों के गमलों में लगाए जाने वाले पौधे भी अधिकतर वर्षावन से ही आते हैं। मनीप्लांट वर्षावन की ही देन है। आधुनिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाली लगभग 25 प्रतिशत ड्रग्स वर्षावनों से ही आती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि वर्षावन के तकरीबन 70 प्रतिशत पौधों में कैंसररोधी गुण होते हैं। इसलिए पेड़ लगाने से उन 1.6 बिलियन लोगों की मदद होगी, जिनकी जीविका वनों पर निर्भर है। पेड़ वातावरण में कार्बन कम करने का प्रयास करते हैं। पृथ्वी की बायोडाइवर्सिटी को बरकरार रखते हैं। पशुओं को चारा व शरण प्रदान करते हैं।

भारत में वर्षावन और उन्हें बचाने की ज़रूरत

भारत में वर्षावन अंडमान व निकोबार द्वीपों, अरब सागर के किनारों वाली पश्चिम घाटों, भारत के तटवर्ती प्रायद्वीपों, उत्तरपूर्व में ग्रेटर असम क्षेत्र और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में पाये जाते हैं। देहिंग पटकाई वर्षावन दुनिया के सबसे उत्तरी ट्रॉपिकल वर्षावनों का एक हिस्सा है। भारत में ट्रॉपिकल निचली भूमि वर्षावन का सबसे बड़ा विस्तार है।

इसलिए देहिंग पटकाई को पूर्व का अमेजन या भारत का अमेजन कहा जाता है। यह असम में कुंवारी वर्षावन का एकमात्र टुकड़ा है, जो हरे-भरे व अर्द्ध-सदाबहार वनस्पतियों से घिरा हुआ है। इस जंगल को इसके विस्तार व घनेपन के कारण पूर्व का अमेजन कहा जाता है।
वर्षावन पृथ्वी के फेफड़े हैं।

फेफड़े काम करना बंद कर दें तो जीवन शेष नहीं रहता है। इसलिए हर साल 22 जून को विश्व वर्षावन दिवस मनाया जाता है ताकि हर किसी को याद रहे व प्रोत्साहित किया जा सके कि वर्षावनों को सुरक्षित रखने व इसके लिए संघर्ष में शामिल होने की उनकी भी ज़िम्मेदारी है।

एक दिलचस्प बात है कि वर्षावन काफी हद तक खुद को ही पानी देते हैं। इसका अर्थ यह है कि पौधे वातावरण में पानी छोड़ते हैं। इसे ट्रांसपिरेशन कहते हैं। नमी की वजह से वर्षावनों के ऊपर बादल बन जाते हैं, जो बरसकर वर्षावन को पानी देते हैं।

वर्षावनों को बचाने के उपाय और हमारी ज़िम्मेदारी

बहरहाल, चिंता का विषय यह है कि पेड़ों की कटाई के कारण 40 फुटबॉल मैदानों के बराबर का क्षेत्र हर मिनट वर्षावनों से गायब हो रहा है। कटाई का यही सिलसिला चलता रहा तो अगले 100 वर्षों के भीतर दुनिया से वर्षावन लुप्त हो जाएँगे। तब इस पृथ्वी का क्या होगा? जीवन का क्या होगा? समय रहते हमें अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए।

विशेषज्ञ वर्षावनों को बचाने के लिए मुख्यत पांच तरीके बताते हैं- जीवन के लिए वर्षावनों के महत्व को समझें, होशियारी से खरीदारी करें, सोशल मीडिया पर वर्ल्ड रेन फॉरेस्टडे का प्रयोग करके उसे शेयर करें, जिससे लोगों को वर्षावन का महत्व समझ आए, पेड़ लगाएं व पेड़ों को कटने से रोकें।

गौरतलब है कि पहला वर्षावन दिवस 22 जून, 2017 को रेनफॉरेस्ट पार्टनरशिप के प्रयासों से मनाया गया था, जो ऑस्टिन, टेक्सास स्थित गैर-मुनाफे वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन है और समुदाय-आधारित प्रोजेक्ट्स के माध्यम से ट्रॉपिकल वर्षावनों को सुरक्षित रखने व उन्हें मूल रूप में विकसित करने के लिए समर्पित है।

शाहिद ए चौधरी

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