हाईकोर्ट ने हैद्रा को लगाई फटकार

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हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सरकारी भूमि के संरक्षण के नाम पर गरीब लोगों के निर्माणों को ढहाए जाने पर पुन एक बार हैद्रा को जमकर फटकार लगाई। हैद्रा की इस कार्रवाई को अनुचित बताया। अदालत ने सवाल उठाया कि जल संसाधनों के पास संपन्न लोगों के निर्माण कार्यों में हैद्रा क्यों नहीं हस्तक्षेप कर रहा है। सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर केवल गरीबों के मकान ढहाया जाना सही नहीं है।

संपन्न लोगों के निर्माणों पर भी नजर डालनी चाहिए। अदालत ने हैद्रा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या संपन्न लोगों के लिए कोई विशेष कानून है। कानून सभी के लिए समान होता है। जो कानून गरीबों के खिलाफ अमल में लाया जा रहा है, क्या वह कानून संपन्न लोगों पर लागू नहीं होता। झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को ढहाकर समाचार-पत्रों में फोटो छपवाना उचित नहीं है।

दुर्गम चेरुवु, मियाँपुर तालाब के आस-पास निर्माण को लेकर संयुक्त सर्वे करवाकर अवैध निर्माण कार्यों को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। रंगारेड्डी ज़िला, राजेन्द्रनगर मंडल, अत्तापुर के सर्वे नं. 329/1, 329/2 और 329/3 स्थित 6.10 एकड़ भूमि के संबंध में तहसीलदार द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए शम्स फातिमा खान और एक अन्य ने अदालत की शरण ली।

इनके द्वारा दायर याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस सी.वी. भास्कर रेड्डी ने आज सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि वक्फ बोर्ड के सीईओ द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर तहसीलदार द्वारा वाल्टा कानून के तहत नोटिस जारी करना अनुचित है। नोटिस जारी करने का अधिकार तहसीलदार को नहीं है। भू-संपत्ति वक्फ बोर्ड की होने पर वक्फ बोर्ड का सीईओ इस मामले पर कार्रवाई कर सकता है।

हैदराबाद उच्च न्यायालय ने गरीबों और संपन्नों पर समान कानून की अपील की

सरकार की ओर से अधिवक्ता ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि मीरालम टैंक के आस-पास अवैध निर्माण को लेकर दायर याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार अवैध निर्माण हटाने के लिए सरकार कार्रवाई कर रही है। इस पर न्यायाधीश ने हस्तक्षेप कर कहा कि हैदराबाद सिटी ऑफ लेक्स (तालाबों का शहर) था और एक समय हैदराबाद शहर में 2,200 तालाब थे, लेकिन अब वर्तमान समय में मात्र 180 तालाब ही है।

राजस्व अधिनियम के तहत तालाबों का संरक्षण संभव न होने के कारण तत्कालीन निजाम ने तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष कानून लाने की आवश्यकता जताई थी। हैद्रा केवल गरीब लोगों के निर्माण कार्यों को ढहा रहा है, लेकिन हैद्रा को संपन्न लोगों के अवैध निर्माणों पर भी नजर डालनी चाहिए।

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उन्होंने उनके समक्ष पेश किए गए इस मामले पर सर्वे करवाने और सर्वे में सरकारी भूमि साबित होने पर सरकार को चाहिए कि वे राजस्व अधिनियम के तहत कार्रवाई करें। यदि भू-संपत्ति वक्फ बोर्ड की साबित होती है, तो इस पर निर्णय वक्फ बोर्ड पर ही छोड़ देना चाहिए। इस फैसले के साथ न्यायाधीश ने याचिका पर सुनवाई पूर्ण करने की घोषणा की।

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