तेलंगाना में मधुमेह रोगियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी

हैदराबाद, विश्व मधुमेह दिवस पर जयंती सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल द्वारा एसआर नगर में मधुमेह के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ हृदय, मस्तिष्क और गुर्दे को प्रभावित करने वाली संबंधित पुरानी बीमारियों में वृद्धि को उजागर करने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। अवसर पर कहा गया कि तेलंगाना में मधुमेह रोगियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है।

अवसर पर जानकारी देते हुए कहा गया कि मधुमेह की समस्या भारत के लिए एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। यह स्वास्थ्य समस्या देश भर में लगभग 10 करोड़ वयस्कों को प्रभावित कर रही है। भारत में मधुमेह के प्रसार के मामले में चौथे स्थान पर स्थित तेलंगाना की चिंताजनक स्थिति है, जहाँ बीस से अधिक उम्र के लोगों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार राज्य में मधुमेह के मामले 14 से 18.1 प्रतिशत के बीच हैं, जबकि 20 से 70 वर्ष की आयु के वयस्कों में यह राष्ट्रीय औसत 8.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुना है। सक्रिय जीवनशैली बचाव की पहला कदम है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप तथा कोलेस्ट्राल आदि के प्रमुख मापदंडों को बनाए रखना गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकता है।

आहार नियंत्रण और जीवनशैली सुधार सर्वोत्तम

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और जयंती सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल प्रबंध निदेशक डॉ. शरत चंद्र के. ने कहा कि मधुमेह के मामलों में तीव्र वृद्धि का जन स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। 80 प्रतिशत मधुमेह रोगियों में उच्च रक्तचाप होता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। जिसके कारण जीवन की गुणवत्ता बिगड़ती है। उन्होंने कहा कि हम दिल के दौरे, हृदय गति रुकने, स्ट्रोक और गुर्दे की विफलता में वृद्धि देख रहे हैं, यह सभी मधुमेह से जुड़े हैं। डेस्कटॉप पर काम करने वाले लोग मधुमेह के मामलों में वृद्धि का एक कारण हैं, तेलंगाना और हैदराबाद में ऐसी नौकरियों का प्रतिशत अधिक है और इसलिए मधुमेह से ग्रस्त आबादी भी अधिक है।

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अवसर पर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण कुमार एटा, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पयनम प्रणुथी तथा जनरल फिजिशियन डॉ. सुंदर सिंह सहित अन्य चिकित्सकों ने अवसर पर कहा कि भारतीयों में मधुमेह की संभावना अधिक होने का कारण उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन भी है। मधुमेह गुर्दे की बीमारी के लिए एक बड़ा बोझ है। हमारे देश में गुर्दे की बीमारी के लगभग 50 प्रतिशत रोगी मधुमेह से ग्रस्त हैं। रोग की प्रगति का शीघ्र पता लगाना और निवारक उपाय रोग को नियंत्रित करने और रोगी के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसके साथ ही जीवनशैली प्रबंधन, आहार नियंत्रण, शारीरिक गतिविधि और चिकित्सा प्रबंधन मधुमेह तथा इससे होने वाली जटिलताओं को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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