आत्मा-परमात्मा का योग लाता है कर्मों में कौशलता : रमेशजी

हैदराबाद, हमारे जीवन का लक्ष्य आत्मा-परमात्मा से योग करना चाहिए। इसके लिए अहंकार को त्याग कर गुरु के प्रति समर्पित हो जाएँ। आत्मा तथा परमात्मा का यह योग हमारे कर्मों में कौशलता लाता है।

उक्त उद्गार बंजारा हिल्स स्थित अला लिबर्टी में आयोजित सत्संग में सद्गुरु रमेशजी ने व्यक्त किए। रमेशजी ने कहा कि अक्षय का अर्थ किसी चीज का क्षय या खत्म न होना है। एक प्रकार से इस सृष्टि में सब कुछ अक्षय है। जीवन के बाद भी हम खत्म नहीं होते, वरन पाँच तत्वों में ही विलीन हो जाते हैं। जीव चेतना में समा जाती है। फिर से उन्हीं पंच तत्वों और जीव से नये जीवन की यात्रा आरंभ होती है। इसी प्रकार प्रकृति की हर चीज जहाँ से उत्पन्न हुई है, वहाँ जाकर लीन होती है और फिर वहाँ से नए स्वरूप में उत्पन्न होती है।

यह क्रम सतत रूप से चलता रहता है। इस क्रम में माया तथा परमात्मा दोनों के दर्शन किए जा सकते हैं। जब तक ज्ञान नहीं है, तब तक माया का प्रभाव रहता है। ज्ञान परमचेतना के दर्शन की दृष्टि प्रदान करता है। आत्मा तथा परमात्मा का योग कर्मों में कुशलता लाते हुए हमें मुक्त रखता है।

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आत्मकल्याण के लिए समर्पण और भावना का महत्व

रमेशजी ने कहा कि संसार में हर प्रकार की चीज होती है। इनका चुनाव करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। जैसी हमारी वृति होती है, हम वैसे ही बनते हैं। इसलिए आत्मकल्याण के लिए वृति को परम चेतना में लगाना चाहिए। परमज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें किसी सक्षम गुरु के प्रति समर्पित हो जाना चाहिए। गुरु और परमात्मा में कोई अंदर नहीं होता। वह बाहर से शरीर रूपी गुरु होता है और अंदर से परमात्मा होता है।

बस हमें सिर झुकाकर उसके प्रति समर्पण का पूर्ण भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समर्पण हमें हमारे करोड़ों जन्मों के कर्मों से बचा सकता है। गुरु माँ ने कहा कि हम माया में इस प्रकार फँसे हुए हैं कि जीवन के अंतिम सत्य को अनदेखा कर देते हैं। इसलिए इसके प्रभाव से बाहर आना चाहिए। हम जब तक प्रेम और भावना रूपी अक्षयपात्र का प्रयोग दूसरों के लिए करते रहेंगे, भगवान निरंतर रूप से अपना आशीर्वाद देते रहेंगे।

जिस दिन हम स्वार्थी होकर स्वयं के लिए सोचेंगे, प्रेम रूपी अक्षय पात्र से कुछ नहीं हासिल कर पाएँगे। इसलिए सभी के प्रति सच्ची और अच्छी भावना तथा विचार रखने चाहिए। भावना के माध्यम से जीवन में सब कुछ हासिल किया जा सकता है।

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