प्रभु को प्राप्त करने के लिए ज्ञानी नहीं, प्रेमी बनें : इंद्रेशजी

हैदराबाद, प्रभु को यदि प्राप्त करना है तो जीव को ज्ञानी नहीं, बल्कि प्रेमी बनना आवश्यक है। प्रेम के वशीभूत होकर प्रभु जीव से बहुत अधिक निकट हो जाते हैं। उक्त उद्गार शमशाबाद स्थित एस.एस. कन्वेंशन में शिव मंदिर गौशाला शमशेरगंज एवं ओम शिव मंदिर गौशाला पालमाकुल द्वारा खाटू श्यामीजी के महाराज श्री प्रताप सिंह जी चौहान एवं महाराज श्री श्याम सिंहजी चौहान के सानिध्य में आयोजित श्री गिरधरलाल जी कृपा उत्सव गौ सेवार्थ पूर्णतया समर्पित दिव्य श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक पूज्य श्री इंद्रेशजी उपाध्याय ने दिये।

महाराज ने कहा कि भगवान ने रास विहार किया, उसके बाद ठाकुरजी ने राक्षसों का वध किया। नारदजी ने जाकर कंस को समझाया कि तुम्हारा शत्रु दिन ब दिन बड़ा हो रहा है, कुछ नहीं कर रहे हो। अभी तक राक्षस तुमने भेजे, उनका वध कर दिया गया, पर कभी आपने उन्हें अपने पास बुलाया नहीं। कंस महाराज ने अक्रूर महाराज को वृंदावन में भेजा। वहां जाकर नंदबाबा यशोदा से अनुग्रह किया कि कंस ने धनुर यज्ञ किया है और उसमें ब्रज से अनेक क्षेत्र से पुरस्कार दिये जा रहे हैं इसलिए कृष्ण बलराम को बुलाया है।

भगवान का प्रभाव, शिक्षा और जीवन संदेश

यशोदा ने मना किया पर ठाकुरजी अक्रूरजी के साथ गए। ठाकुरजी ने मथुरा में कुबलिया पीठ के हाथी का उद्धार किया। कथा के स्वभाव के दर्शन हैं। भगवान का प्रभाव बाहर दिखाई देता है और अपना स्वभाव घर के भीतर होता है। वृंदावन में स्वभाव रूप है उससे बाहर प्रभाव रूप है। मथुरा में ठाकुरजी ने रणभूमि में प्रवेश किया और मल्ल युद्ध किया। सबको भगवान अलग अलग दिखाई दे रहे हैं।

बडे बडे मल्ल पहलवानों को ठाकुरजी पहलवान दिख रहे हैं। 11 वर्ष 56 दिन की आयु है। 50-50 साल के पहलवान की तरह है। भगवान सुन्दर होने के बाद भी कंस को अपनी मृत्यु दिखने लगी। ठाकुरजी होते हुए कंस को काल दिखा। महाराज ने कहा कि भगवान स्वयं कहते हैं कि मुझे जो जैसे भजता है, मैं उसे वैसे ही मिलता हूँ। मीरा श्रीकृष्ण को लाला मानकर प्रेम करती हैं। जैसा विचार करते हैं ठाकुरजी वैसे ही दिखेंगे।

ठाकुरजी का रूप जैसा चाहे, वैसा मिलेगा। महाराज ने कहा कि आज का युग का पता नहीं कैसा है। दो-ढाई साल के बच्चों को स्कूल में डाल देते हैं जबकि शास्त्र कहता है कि पांच वर्ष तक बालकों का मानसिक विकास करें। पढाई से दूर माता-पिता के साथ बच्चा रहे। पांच वर्ष का हो तो कम से कम 15 साल पढ़ाओ, डांटो और जरूरत पडे तो मारो पर जैसे 16 वर्ष का हो तो पुत्र-पुत्री के साथ मित्र का आचरण करो। आज हम लोग कौन सी स्थिति में जा रहे हैं।

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ज्ञान से श्रेष्ठ है प्रेम का बंधन

महाराज ने कहा कि छोटे छोटे बच्चे भद्दे गाने सुनते हैं जबकि उसका अर्थ भी नहीं पता। बच्चों को बचपन में भगवान की लीला सुनाओ। कीर्तन भजन सुनाओ। महाराज ने कहा कि ठाकुरजी जब गुरुकुल गये तो वहां उनके मित्र सुदामा बने। अध्ययन के बाद ठाकुरजी मथुरा आये प्रवेश किया। हाथी घोड़ा लाखों की तादाद में वासुदेव की जयकार कर रहे हैं। ठाकुरजी को राजकुमार की जयकार का स्वर अच्छा नहीं लगा, क्योंकि ठाकुरजी को यशोदा कहती कन्हा गोपाल, गोविन्द एक एक नाम सुन्दर था।

सभी ठाकुरजी की पूजा कर रहे हैं क्योंकि राजकुमार बने हैं। वृंदावन में तो कान्हा वन माला पहनते थे। अब राजा बन गये। सोने की जूती पहनते हैं। ठाकुरजी को पसंद नहीं है। ठाकुरजी ने उद्धव को वृंदावन में भेजा। श्रीकृष्ण को उदास देखकर उद्धव ने कहा कि मोह व्याकुल होना मानव का धर्म है आप परमात्मा होकर व्याकुल हैं। इस पर प्रभु ने कहा कि उद्धव ज्ञान के पाश में, वैराग्य के पाश में मैं नहीं बंध सकता, पर प्रेम के पाश में बंध जाता हूँ। इसलिए वृंदावन के प्रेम में बंध गया। प्रेम की रस्सी ने बांध लिया है।

इंद्रेशजी ने आगे कहा कि उद्धव प्रभु को अतिप्रिय थे इसलिए वृंदावन भेजे गये लेकिन वृंदावन में पता चला कि वास्तविक प्रेम क्या होता है। ज्ञान भी प्रेम के आगे विफल हो गया। ज्ञान से अधिक प्रेम है जो भावनात्मक रूप से व्यक्ति के साथ जुड़ा रहता है। प्रभु को यदि प्राप्त करना है तो जीवन को ज्ञानी नहीं, बल्कि प्रेमी बनाना होगा। महाराज ने रुक्मिणी मंगल की कथा एवं सुदामा चरित के पश्चात भागवत का सार श्रवण करवाने के बाद कथा को विराम दिया। सभी का आभार व्यक्त करते हुए गौ सेवा में तत्पर रहने की प्रेरणा दी।

कथा यजमानों व सहयोगियों का आभार व भंडारा

अवसर पर कथा यजमान रोशनलाल राजेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम सुन्दर रामेश्वर डालिया, माणकचंद नरेश कुमार नालपुरिया, घीसाराम जगदीश प्रसाद अग्रवाल, ताराचंद शैलेश सोनी, भंडारा सहयोगी प्रभुदयाल पंच परिवार (टिबा बसई वाले), मोहनलाल सुशील कुमार अग्रवाल, प्रमुख यजमान भरत भूषण राहुल अग्रवाल, गुलाबचंद बैजनाथ सिगनोडिया, गजानंद सुरेश कुमार नालपुरिया, गुलाबचंद वासुदेव पोद्दार, जयनारायण शीतल पांडेय, रमेशचंद अग्रवाल मिल्लुराम रमेश चंद पोद्दार, राजेश अग्रवाल बनवारीलाल विजय कुमार व परसराम सिंघानिया हनुमान प्रसाद बाबूलाल सिंघानिया शामिल है।

अवसर पर शिव प्रकास बंसल जतिन बंसल नितिन बंसल, श्री भवानी ज्वेलर्स, पुरुषोत्तम भगेरिया, मुख्य यजमान विकास अग्रवाल, संतोष नरेडी, रतन केड़िया, रोहित केड़िया, मनोहरलाल राकेश अग्रवाल नालपुरिया, विष्णु दयाल हितेश गुप्ता, रितेश संघी, गोपाल अग्रवाल बद्रीप्रसाद ज्योति प्रसाद नाथूलाल सत्यनारायण, रविन्द्र कुमार अग्रवाल, जय जैन, ब्रिजमोहन संतोष कुमार चौखानी, महेश अग्रवाल मातादीन सुरेश कुमार गोयल, प्रभातीलाल मुसद्दीलाल, मुन्नालाल अग्रवाल, अमित अग्रवाल, घीसालाल गोवर्धनदास तापडिया, डालचंद लक्ष्मीप्रसाद सूरज प्रसाद डोकानिया, नागनाथ राजेश माशेट्टे, चन्द्रमोहन पंकज अग्रवाल महावीर प्रसाद सतीश अग्रवाल, आर. नानकराम परिवार ने सहयोग प्रदान किया। हवन, पूर्णाहुति के बाद भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

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