भोजशाला में निर्विघ्न उपासना, देवी सरस्वती की सूर्येदय से लेकर सूर्यास्त तक पूजा
धार (मध्यप्रदेश), वसंत पंचमी पर शुक्रवार को धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हिंदू समुदाय के हजारों श्रद्धालुओं ने वाग्देवी (देवी सरस्वती) की सूर्येदय से लेकर सूर्यास्त तक लगातार पूजा-अर्चना की और विवादित परिसर के एक अन्य स्थान पर मुस्लिम समाज के करीब 15 लोगों ने जुमे की नमाज भी अदा की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 11वीं सदी के विवादित परिसर में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएँ की गई थीं। वसंत पंचमी का हिंदू त्योहार और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के मद्देनजर इस ऐतिहासिक शहर में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए करीब 8,000 की तादाद में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी।






जिलाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया, उच्चतम न्यायालय के निर्देश जारी होने के बाद दोनों पक्षों के साथ बैक की गई थी और उन्हें इनकी विस्तृत जानकारी देते हुए वसंत पंचमी की व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया था। उन्होंने बताया कि इन निर्देशों के मुताबिक दोनों पक्षों को उनकी उपासना पद्धति के पालन के लिए विवादित परिसर में अलग-अलग जगह दी गई।
मिश्रा ने बताया, हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने इस परिसर में अपनी उपासना पद्धति का निर्विघ्न पालन किया। इस दौरान समूचे धार जिले में शांति और लोक व्यवस्था बरकरार रही। उन्होंने बताया कि नमाज के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार विवादित परिसर के अंदर ही एक स्थान नियत किया गया और इसकी मुस्लिम समुदाय को लिखित जानकारी भी दी गई थी।
मिश्रा ने नमाज स्थल का विवरण दिए बिना नमाज अदा बताया
मिश्रा ने नमाज की जगह का ब्योरा दिए बगैर बताया कि इस स्थान पर शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे तक शांतिपूर्ण और निर्विघ्न नमाज अदा की गई। इस बीच, धार के निवासी इमरान खान ने प्रशासन पर सवाल उाए। उन्होंने कहा, हम 15 से 20 लोगों को प्रशासन के कुछ अधिकारी यह कहते हुए अपने साथ ले गए थे कि हमें (विवादित परिसर के) मस्जिद प्रांगण में नमाज पढ़ाई जाएगी। हमें मस्जिद परिसर के पास एक स्थान पर रखा गया था, लेकिन बाद में प्रशासन का कोई भी अधिकारी हमसे मिलने तक नहीं आया और हम वहाँ नमाज नहीं पढ़ सके। प्रशासन ने हमारे साथ बड़ा धोखा किया है।
इस व्यक्ति के दावे के बारे में प्रतिक्रिया माँगे जाने पर जिलाधिकारी मिश्रा ने कहा, मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहूँगा। मैं आधिकारिक रूप से केवल इतना कहूँगा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक बनाई गई व्यवस्था के मुताबिक मुस्लिम समुदाय के 15 से 17 लोगों ने नियत स्थान पर शांतिपूर्वक नमाज पढ़ी है। इस समुदाय ने हमसे पहले भी सांकेतिक नमाज की चर्चा थी।
मिश्रा ने कुछ अन्य स्थानीय लोगों के इस दावे पर भी सीधी टिप्पणी नहीं की कि विवादित परिसर में नमाज अदा कराने के लिए बाहरी लोगों को लाया गया था। मिश्रा ने कहा, मुझे नहीं लगता कि (उच्चतम न्यायालय के) निर्देशों में कहीं भी इस बात का कोई वर्णन था कि लोग (नमाजी) कहाँ के रहने वाले होने चाहिए। सूर्येदय के साथ ही विवादित परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया था।
हजारों श्रद्धालु भगवा झंडे थामकर शोभायात्रा में पहुंचे
स्थानीय संगन भोज उत्सव समिति के सदस्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वाग्देवी (सरस्वती) का चित्र स्थापित करके पूजा शुरू की। इस दौरान हवन कुंड में आहुति डाल कर अखंड पूजा (सूर्येदय से सूर्यास्त तक पूजा का लगातार चलने वाला क्रम) की शुरुआत की गई और दिन ढलने तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। पूजा स्थल को फूलों की मालाओं और भगवा झंडों से सजाया गया था। विवादित परिसर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात थे।
दिन चढ़ने के साथ ही विवादित परिसर में हिंदू पक्ष के श्रद्धालुओं की तादाद बढ़नी शुरू हो गई और दोपहर 12 बजे हजारों श्रद्धालु भगवा झंडे थामे शोभायात्रा के रूप में विवादित परिसर पहुँचे। इनमें बड़ी तादाद में महिलाएँ भी शामिल थीं। अपने परिवार के साथ दर्शन करने आईं सारिका शर्मा ने कहा कि वसंत पंचमी के अवसर पर देवी सरस्वती के दर्शन करके हमें बहुत अच्छा लग रहा है। हम चाहते हैं कि भोजशाला मसले का स्थायी समाधान जल्द हो।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी भोजशाला पहुँच कर वाग्देवी के दर्शन किए। उन्होंने कहा, वाग्देवी का मंदिर हमारी आस्था का केंद्र है। ठाकुर ने कहा कि वह वसंत पंचमी पर विवादित परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का स्वागत करती हैं। इस वर्ष वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण दोनों समुदायों ने विवादित परिसर में पूजा-अर्चना और नमाज के लिए दावा किया था।
एसआई संरक्षण में विवादित परिसर का धार्मिक महत्व
स्थिति को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को हस्तक्षेप किया और समय-विभाजन का स्पष्ट फॉर्मूला तय किया था। शीर्ष अदालत ने विवादित परिसर में वसंत पंचमी पर सूर्येदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी थी। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
भोजशाला को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई ने सात अप्रैल 2003 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है। हालाँकि, वसंत पंचमी और जुमे की नमाज जब भी एक ही दिन पड़ती है, तब दोनों समुदायों के टकराव की आशंका के कारण प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं।
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बनाएँगे वाग्देवी का मंदिर : विहिप
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने शुक्रवार को इस संकल्प की घोषणा की कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण की तर्ज पर कानूनी प्रक्रिया के जरिये धार के भोजशाला परिसर में वर्ष 2034 तक वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर का बनाया जाएगा। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है।
यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है और इस स्थल को लेकर अदालत में मुकदमा लंबित है। कुमार ने वसंत पंचमी पर भोजशाला में वाग्देवी के दर्शन से पहले एक बड़ी सभा में कहा कि इस स्थान पर वाग्देवी की पहले से प्राण-प्रतिष्ित मूर्ति फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में है। उन्होंने कहा, हमें इस मूर्ति को भारत वापस लाना है। हमें अदालत में लंबित मुकदमा जीतकर इस मंदिर का स्वरूप सरस्वती माँ की प्रतिष्ठा के अनुरूप बहाल करना है।
मंदिर के साथ गुरुकुल में छात्र वेद-पुराण और शास्त्र पढ़ते थे
विहिप नेता ने दावा किया कि भोजशाला में वाग्देवी का मंदिर 1034 में बना था, लिहाजा इस निर्माण और इसमें वाग्देवी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा को 992 साल पूरे हो गए हैं और 2034 में 1000 साल पूरे जाएँगे। उन्होंने कहा, क्या हम और आप संकल्प करें कि हम न्यायालय की प्रक्रिया पूरी करेंगे, वाग्देवी की मूर्ति वहाँ (लंदन) से वापस लाएँगे और जैसे अयोध्या में राम मंदिर बना है, 2034 में वैसी ही भव्यता से यहाँ (भोजशाला) वाग्देवी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करेंगे।
कुमार ने दावा किया कि भोजशाला में मंदिर के साथ गुरुकुल भी था जहाँ बड़ी तादाद में छात्र वेद-पुराण और शास्त्रां को अध्ययन करते थे। उन्होंने कहा, इसलिए यहाँ (भोजशाला) दोबारा मंदिर बनेगा, तो देश के केंद्र में स्थित धार विद्या, ज्ञान और अध्ययन का शहर बनेगा। सभा में साधु-संतों ने धार के विवादित परिसर को हिंदुओं का धार्मिक स्थान बताते हुए सरकार से माँग की कि लंदन के संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूर्ति भारत वापस लाई जाए, इसे परिसर में स्थापित किया जाए और उज्जैन के श्री महाकाल लोक गलियारे की तर्ज पर धार में वाग्देवी गलियारा बनाया जाए। (भाषा)
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