एकता का फल – बाल कथा

Ad

जंगल से दूर एक बहुत बड़ा मैदान था। मैदान में एक नीम का पेड़ था। पेड़ की जड़ों पर बहुत सी चींटियां बिल बना कर रहती थीं। नीम का पेड़ जंगल से दूर होने के कारण उस पर किसी पक्षी ने घोंसला नहीं बनाया था। इसलिए बहुत सारी चींटियां उसकी जड़ों पर बिल बना कर रहती थी क्योंकि वहां पक्षियों का खतरा नहीं था। एक दिन एक गोरैया घूमते हुए नीम के उसी पेड़ पर कुछ देर आराम करने के लिए उतर गई। जब उसने पेड़ के नीचे देखा तो अवाक रह गई।

इतनी ढेर सारी चींटियां उसने कभी नहीं देखी थी। दूसरे दिन उसने अन्य पक्षियों को इसकी जानकारी दी। सभी पक्षियों ने सोचा, क्यों न नीम के पेड़ पर घोंसला बनाया जाए। वहां ढेर सारी चींटियां खाने को मिलेंगी। इधर-उधर भटकने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। गोरैया, मैना, बुलबुल तथा कुछ अन्य पक्षियों ने नीम के पेड़ पर अपना घोंसला बनाना शुरू कर दिया। क्या तुम लोगों को मालूम है कि चिड़ियों ने नीम के पेड़ पर घोंसला बनाना शुरू कर दिया है। उनके यहां पर रहने से हम सबकी जान खतरे में पड़ जाएंगी।

चिड़ियों के डर से चींटियों की कैद जैसी हालत

इसलिए सभी चींटियां सावधानी बरतें कि जब चिड़ियां आसपास बैठी हों तो कोई भी चींटी बिल से बाहर न निकले, प्रियंका चींटी ने दूसरी चींटियों को चेतावनी दी। सभी चींटियां इस सूचना को सुन कर घबरा गईं। कुछ दिन बाद चिड़ियों ने घोंसले में रहना शुरू कर दिया। फिर चींटियों में घबराहट फैल गई। वे अपने बिल से बाहर नहीं निकलती थी। यहां तक कि खाने की तलाश में निकलना भी उनके लिए मुश्किल हो गया था। कोई न कोई चिड़िया पेड़ की डाल पर इस ताक में बैठी रहती कि चींटियां बिल से बाहर निकलेंगी।

एक दिन एक छोटी चींटी अपने बिल से बाहर निकल आई। एक गोरैया ने उस पर तुरंत हमला कर दिया और उसे खा गई। बिल से बाहर न जाने के कारण चींटियों के सामने खाने-पीने की समस्या आ गई। कई चींटियों के यहां तो राशन एकदम खत्म ही हो गया। परेशान होकर एक दिन प्रियंका चींटी ने अपनी सहेलियों को बुलाया और कहा – बहनों, ऐसी स्थिति में हम सब भूख से मर जाएंगी। हमें अपनी रक्षा के लिए मिल-जुल कर कोई निर्णय लेना होगा। अगर हम लोगों ने एक होकर चिड़ियों से छुटकारा पाने के लिए कुछ नहीं किया तो हमें यह जगह छोड़नी पड़ेगी। सोनिका चींटी ने कहा।

चिड़ियों को भगाने की तरकीब पर सहमति

हम अपनी पुरानी जगह छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, सभी चींटियों ने एक साथ ऊंची आवाज में कहा। तब हमें चिड़ियों को इस पेड़ से भगाने के लिए कुछ तो करना होगा, प्रियंका चींटी बोली। लेकिन हम छोटी-छोटी चींटियां इन चिड़ियों को कैसे भगा सकेंगी? कजली चींटी ने पूछा। प्रियंका चींटी ने कहा, बहन, एकता में बल होता है। यदि हम एक होकर चिड़ियों को भगाने के लिए प्रयास करेंगी तो हमें अवश्य सफलता मिलेगी। मैंने एक तरकीब सोची है। कैसी तरकीब? कई चीटियों ने एक साथ पूछा। रात को चिड़ियों के सो जाने के बाद सभी चींटियां नीचे आग जलाएंगी।

Ad

आग से निकलने वाले धुएं के कारण चिड़ियों का रहना मुश्किल हो जाएगा फिर वे इस पेड़ को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगी। लेकिन यह बहुत कठिन काम है, कजली चींटी बोली। तुम ठीक कह रही हो अगर हम मिल कर मेहनत करेंगी तो कठिनाई नहीं होगी। फिर जान बचाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा प्रियंका ने कहा। हमें यह काम आज रात से ही शुरू कर देना चाहिए। बहनों, तुम सभी इसके लिए तैयार हो न? सोनिया चींटी ने पूछा। हां, हम तैयार हैं, सभी चींटियों ने एक साथ कहा। रात में जब चिड़ियां सो गई तो चींटियां बिल के बाहर इकट्ठी हुईं।

समझौते के बाद लौटी शांति, पेड़ खाली हुआ

सभी चींटियां कड़ी मेहनत कर कूड़ा-करकट तथा घास-फूंस इकट्ठा करने लगी। फिर प्रियंका चींटी ने उसमें आग लगा दी। आग से उठने वाले धुएं से चिड़िया व्याकुल हो गईं। उनके बच्चों का दम घुटने लगा। पेड़ की सबसे नीचे वाली डाली पर गोरैया का घोंसला था। वह ज्यादा परेशान थी। उसने चींटियों से विनती की, बहन, कृपा कर आग को बुझा दो। हम लोगों का दम घुट रहा है। पहले वादा करो कि सुबह होते ही तुम सब इस पेड़ को छोड़ दोगी और भविष्य में कभी इस पेड़ पर नहीं आओगी, प्रियंका चींटी ने चिड़ियों से कहा।

सभी चिड़ियों ने ऐसा करने का वादा किया। तब प्रियंका चींटी ने अन्य चींटियों से कहा कि वे आग को बुझा दें। चींटियों ने मिलकर आग को अच्छी तरह बुझा दिया। धुआं भी बंद हो गया। चिड़ियों ने राहत की सांस ली। सुबह होते ही सभी चिड़िया नीम के पेड़ को छोड़ कर अपने पुराने घोंसलों की ओर उड़ गईं। अब चींटियों को कोई खतरा नहीं था। वे पहले की तरह वहां आराम से रहने लगीं।

-नरेंद्र देवांगन

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Ad

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button