वैभव के जलवे से भारत जीता, रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप

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चौदह एक ऐसी आयु है जब युवा लड़के अपने पसंदीदा सितारों के पोस्टर अपने कमरे की दीवारों पर लगाते हैं और अपने कम्पास बॉक्स के अंदर रखते हैं। लेकिन वैभव ने जो असहाय अंग्रेज़ गेंदबाज़ों के साथ किया है, उसके बाद वह स्वयं पिन-अप स्टार बन गये हैं, अपने से अधिक आयु के लड़कों के लिए। हरारे के आसमान के नीचे अनगिनत क्रिकेटिंग महत्वकांक्षाएं आयी और गई हैं। भारत के युवा क्रिकेटरों का जो नवीनतम बैच है, उसने भी अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज की है। भारत की जेब में एक और आईसीसी ट्राफी आ गई है। वैभव ने इससे भी कुछ अधिक गहरा अर्जित किया है- छक्कों में लिखी हुई कमिंग-ऑ़फ-एज स्टोरी (जवान हो जाने की कहानी)।

हरारे में सांझ का अंधेरा अभी पूरी तरह से छाया भी न था कि किशोरावस्था ने ख़ामोशी से अपना बिस्तर बांधा और लड़कों का एक समूह मर्दों में तब्दील हो गया। पावार (6 फरवरी 2026) को स्कोरबोर्ड ने अपना फैसला सुना दिया था। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 9 विकेट खोकर 411 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था और इंग्लैंड इस लक्ष्य से 100 रन पीछे रह गया, जबकि उसके सभी खिलाड़ी पैवेलियन लौट चुके थे। इस तरह भारत की टीम ने रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 का विश्व कप अपने नाम किया।

पूर्व विजेता कप्तानों की परंपरा में आयुष म्हात्रे शामिल

आयुष म्हात्रे से पहले मुहम्मद कैफे़ (2000), विराट कोहली (2008), उन्मुक्त चंद (2012), पृथ्वी शॉ (2018) और यश ढुल (2022) इस कप को भारत के लिए उठा चुके हैं। हाल के महीनों में भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक बड़ी सफलताएं हासिल की हैं- रोहित शर्मा के नेतृत्व में टी-20 विश्व कप व चैंपियंस ट्राफी जीतीं, फिर हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में भारत की परियों ने ओडीआई विश्व कप (महिला) अपने नाम किया और अब आयुष म्हात्रे ने अंडर-19 ओडीआई विश्व कप में कामयाबी दिलायी है। प्रबल उम्मीद यही है कि इस समय जो भारत व श्रीलंका में संयुक्त रूप से टी-20 विश्व कप (पुरुष) खेला जा रहा है, उसमें सूर्य कुमार यादव एंड कंपनी सफलता के इस सिलसिले को जारी रखेगी।

अगर वह ऐसा कर लेते हैं तो यह इस लिहाज़ से रिकॉर्ड होगा कि किसी टीम ने टी-20 विश्व कप (पुरुष) न तो लगातार दूसरी बार जीता है और न किसी मेज़बान टीम ने इस ट्राफी को उठाया है। बहरहाल, भारत की इस नवीनतम कामयाबी का सेहरा निश्चितरूप से 14-वर्षीय सलामी बैटर वैभव सूर्यवंशी को जाता है, जिन्होंने अपनी पारी के दौरान राहुल द्राविड जैसा संयम, वीरेंद्र सहवाग जैसा विस्फोटक अंदाज़, विराट कोहली जैसी खेल की समझ और सचिन तेंदुलकर जैसी रनों की भूख प्रदर्शित की।

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हरारे में खुद का रिकॉर्ड तोड़ा, नई ऊँचाइयाँ छुईं

फाइनल में वैभव के मात्र 80 गेंदों में 175 रन ने न सिर्फ इंग्लैंड के हौसले पस्त कर दिये बल्कि इस पारी से उन्होंने रिकॉर्डों का अम्बार लगा दिया। दुबई में 12 दिसंबर 2025 को वैभव ने यूएई अंडर-19 के खिलाफ 95 गेंदों में 171 रन बनाने का भारतीय रिकॉर्ड स्थापित किया था, हरारे में उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। यह इस लिहाज़ से भी उल्लेखनीय है कि दुबई में 150 रन बनाने के लिए उन्होंने 84 गेंदें खेली थीं और हरारे में 150 रन उन्होंने 71 गेंदों में बनाये।

वैभव के 150 रन तो सिर्फ गेंद को सीमा पार कराने से आये कि उन्होंने 15 चौके व 15 छक्के लगाये, जोकि जूनियर क्रिकेट में रिकॉर्ड है। यूथ ओडीआई के नॉकआउट गेम में वैभव से अधिक व्यक्तिगत स्कोर किसी ने नहीं किया है, उन्होंने पाकिस्तान के समीर मिन्हास का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 21 दिसंबर 2025 को दुबई में भारत के खिलाफ अंडर-19 एशिया कप के फाइनल में 113 गेंदों पर 172 रन बनाये थे।

यहां यह बताना भी आवश्यक है कि वैभव ने 80 गेंदों में जो 175 रन बनाये हैं वह अंडर-19 में भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर है, जबकि इससे पहले यह रिकॉर्ड राज बावा के पास था, जिन्होंने 22 जनवरी 2022 को तरौबा में युगांडा अंडर-19 के खिलाफ 162 नाबाद रन बनाये थे। भारत ने इंग्लैंड पर जो 100 रन से जीत दर्ज की है वह अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में सबसे अधिक अंतर से है। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पास था, जिसने 11 फरवरी 2024 को बेनोनी में खेले गये फाइनल में भारत अंडर-19 को 79 रन से पराजित किया था।

वैभव-आयुष की 142 रन साझेदारी से बना विशाल स्कोर

इंग्लैंड के खिलाफ विशाल स्कोर बनाने में वैभव के अतिरिक्त कप्तान आयुष (53 रन) का भी अच्छा योगदान रहा कि दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 142 रनों की साझेदारी की। फिर विहान मल्होत्रा (50 रन), अभिज्ञान कुंडू (40 रन) व कनिष्क चौहान (35 रन) ने भी ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करते हुए स्कोर को 400 के पार पहुंचा दिया। ज़ाहिर है इस लक्ष्य ने इंग्लैंड के लिए दिल्ली बहुत दूर कर दी और वह 311 पर सिमट गया, बावजूद इसके कि जब वह 7 विकेट खोकर 177 के स्कोर पर लड़खड़ा रही थी, तो कैलेब फाल्कनर ने 67-गेंदों में 115 रनों की साहसिक पारी खेली।

वैसे तारीफ आयुष की कप्तानी की भी करनी होगी कि जब इंग्लैंड साहस दिखा रहा था और ऐसा लग रहा था कि मैच में कुछ भी हो सकता है, तो टीम को इस मुस्तैदी से बांधे रखा कि लगा उनमें जन्मजात नेतृत्व के गुण हैं व वह कप्तान की ज़िम्मेदारी को समझते हैं, जबकि इस स्तर पर कप्तानी भाषण से अधिक बहानों को दूर करने से अधिक संबंधित होती है। मैच के बाद आयुष ने कहा, वैभव की पारी की व्याख्या करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

हम जानते हैं कि वह कितने शानदार बैटर हैं और इस मैच में उन्होंने दिखा दिया कि वह क्या कर सकते हैं। हम सिर्फ रोहित शर्मा व हरमनप्रीत कौर की विरासत को आगे लेकर जाना चाहते थे और अब हमने भी जीत हासिल कर ली है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि वैभव की इस पारी की तारीफ करने के लिए शब्द कम ही पड़ जायेंगे। अधिकतर लड़के 14 साल की आयु में परीक्षाओं को लेकर चिंतित रहते हैं व पैनिक करते हैं, लेकिन वैभव तो गेंदबाज़ों को डरा रहे हैं, शतक लगा रहे हैं और विश्व कप जिता रहे हैं।

14 साल की उम्र में वैभव ने रचा क्रिकेटिंग इतिहास

किशोर वाई-फाई का पीछा करते हैं, वैभव क्रिकेट के मैदान पर रेकॉर्डों का पीछा कर रहे हैं। ज्यादातर 14 साल के बच्चे अपने घरों में नियमों की पाबंदियों से जूझते रहते हैं, वैभव मैदान में फील्ड सेटिंग को भेदते रहते हैं। वह अपने जीवन के 14वें बसंत में क्रिकेटिंग महानता को गले लगा रहे हैं और लीजेंड बनने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। इसलिए अंदाज़ा यह है कि वैभव को जल्द ही भारत की सीनियर टीम के साथ खेलते हुए देखा जा सकेगा।

पिछले साल आईपीएल में तो शतक लगाकर अपने आगमन की दस्तक तो दे ही दी थी। सवाल यह है कि मासूम कंधों पर इतनी परिपक्वता कहां से व कैसे आयी? वैभव के व्यक्तिगत कोच व मुंबई के पूर्व बैटर जुबिन भरुच बताते हैं, समय व स्पेस वैभव के ज़बरदस्त एसेट्स हैं। उनका सिर प्राकृतिक रूप से गेंद की लाइन में आता है और बल्ला हमेशा गेंद की लाइन के बाहर रहता है। वह प्रैक्टिस में हज़ारों गेंद हिट करते हैं, जिससे उन्हें स्ट्रोक्स के लिए कीमती समय मिलता है।

सारिम अन्ना
सारिम अन्ना

चौदह एक ऐसी आयु है जब युवा लड़के अपने पसंदीदा सितारों के पोस्टर अपने कमरे की दीवारों पर लगाते हैं और अपने कम्पास बॉक्स के अंदर रखते हैं। लेकिन वैभव ने जो असहाय अंग्रेज़ गेंदबाज़ों के साथ किया है, उसके बाद वह स्वयं पिन-अप स्टार बन गये हैं, अपने से अधिक आयु के लड़कों के लिए। हरारे के आसमान के नीचे अनगिनत क्रिकेटिंग महत्वकांक्षाएं आयी और गई हैं। भारत के युवा क्रिकेटरों का जो नवीनतम बैच है, उसने भी अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज की है। भारत की जेब में एक और आईसीसी ट्राफी आ गई है। वैभव ने इससे भी कुछ अधिक गहरा अर्जित किया है- छक्कों में लिखी हुई कमिंग-ऑ़फ-एज स्टोरी (जवान हो जाने की कहानी)।

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