पुण्य प्रबल होने पर ही साथ देता है वैभव : सुधाकँवरजी

हैदराबाद, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमणोपासक संघ, रामकोट के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन सभा में सुधाकंवरजी म.सा. आदि ठाणा-5 णे कहा कि जीवन में धनसंपदा, वैभव तब तक साथ देते हैं, जब तक पुण्य प्रबल हो, आयुष्य प्रबल हो, स्वास्थ्य अच्छा हो। धर्म इस भव में सुख तो देता है, जीवन के बाद भी सुख प्राप्त होता है।

यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, म.सा. ने कहा कि जीवन के चार सूत्र बताए गए हैं। कामार्थी- कामवासना में रहना, धनार्थी- धन में रत रहना, पुण्यार्थी- पुण्य करते रहना और आत्मार्थी- आत्मा में रमण रहना। जिसका आचरण और चारित्र्य शुद्ध होता है, वह कभी नहीं बदलता उसके सौंदर्य में और निखार आता है।

सुयशाजी म.सा. ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में कुछ तत्व हैं, जिससे सुख और दुःख आते हैं। चक्रवर्ती के रूप और सौंदर्य की देवता भी प्रशंसा करते हैं। मगर शरीर कभी भी रोगग्रस्त हो सकता है। जैसे बचपन और जवानी में देखते हैं, वैसा रूप सौंदर्य बुढ़ापे में नहीं रहता। संपत्ति पुण्य के प्रभाव से प्राप्त होती है और पुण्य के अभाव से चली भी जाती है। स्वजन सुख-दुःख में साथ देते है और संकट के समय साथ छोड़ भी देते है। इसलिए यह तीन चीजों का घमंड-अहंकार नहीं करना चाहिए। यह तीन चीजें स्थायी नहीं हैं, कभी भी धोखा दे सकती हैं। धर्म हमारे साथ है, तो कभी भी धोखा नहीं मिलेगा।

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धर्मसभा का संचालन करते हुए संघ के महामंत्री राजेश सुराणा ने बताया कि महामंत्र नवकार जाप का लाभ भावना और बबिता तातेड़ ने लिया। आज का आयंबिल सरोज सिंघवी का है। तेले की कड़ी में शकुंतला सिसोदिया ने 3 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। संघ के प्रवीण डागा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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